
Bengaluru: पिछले 1 से 2 वर्षो में काफी सारे लोगो ने अपनी अच्छी खासी लगी लगाई नोकरी छोड़ व्यापार प्रारंभ किया। वे कहते है की किसी की नोकरी करने से अच्छा खुद का व्यापार होता है। देश का 60 फीसदी युवा खुद का कारोबार करना चाहता है और उसमे से 40 फीसदी युवा अपना खुद का कारोबार बना भी लेता है।
नोकरी छोड़ खुद का स्टार्टअप (Startup) करना लोगो को आत्मनिर्भर बन रहा है और यह चलन देश में बेहद रफ्तार से हो रहा है। महामारी के पश्चात देश में कई बदलाव आए और इस बदलाब में सरकार ने पूरा साथ दिया है। लोगो ने कई तरह के व्यापार स्थापित किए जिसमे से सबसे खास फूड बिसनेस (Food Business) है।
वर्तमान में कहा जा सकता है की यह व्यापार चलेगा, परंतु 90 के दशक में यह व्यापार थोड़ा कठिन था। इसके बाद भी एक शख्स ने इसकी पहल की। उनका नाम वासुदेव अडिगा (Vasudev Adiga) है, आज की इस पोस्ट में हम इनकी ही कहानी जानेंगे, जिन्होंने अपने खान पान के शोक के चलते अपनी अच्छी खासी नोकरी छोड़ दी और अडीगा (Adiga) की स्थापना किया जो सस्ते और शाकाहारी खाने के लिए प्रसिद्ध हुआ।
Filmy and foody, these Vasudev Adiga's posters pic.twitter.com/LppLXEQTka
— Nambirajan (@nambigram) April 26, 2014
आडिगा ने बेंगलुरु में 30 आउटलेट दिए और उसके बाद इस कंपनी को न्यू सिल्क रूट वेंचर कैपिटल, न्यूयॉर्क देश को बेच डाली। इसके बाद वर्ष 2018 में वासुदेव ने एक बार फिर रेस्तरां-चेन का व्यापार प्रारंभ किया।
इस कंपनी का नाम श्री अनंतेश्वर फ़ूड्स प्राइवेट लिमिटेड (Sri Anantheshwara Foods Private Limited) है। इस नवीन रेस्तरां चेन (Restaurant Chain) में वर्तमान समय के दो ब्रांड, नंदी उपकार और पाकशाला काफी फेमस हैं। इन दोनों ब्रांड ने बीते वर्ष में 50 करोड़ रुपये से भी ज्यादा का व्यापार किया।
खाद्य व्यापार के प्रति वासुदेव का लगाव
वासुदेव कर्नाटक राज्य के अंतर्गत आने वाला जिला उडुपी के एक छोटे से कस्बे कुंडापुरा में जन्मे वासुदेव अपने भाई-बहनों के साथ बैंगलोर में पले बड़े। वासुदेव कहते है की उनकी मां बहुत अच्छा खाना पकाती है। वासुदेव की मां केएन सरस्वती पारंपरिक भोजन बनने में काफी निपूर्ण हैं।
दक्षिण बेंगलुरु (Bengaluru) में स्थित ब्राह्मण कॉफी बार जिसकी स्थापना वर्ष 1960 में हुई। जो मां ने बड़े प्यार से स्थापित की थी। वासुदेव बचपन से ही अच्छा और स्वादिष्ट खाना बेहद पसंद करते थे, इसलिए वे ब्राह्मण कॉफ़ी बार में अपनी मां का हाथ बटाते थे। परंतु उनका कोई विचार नहीं था फूड व्यापार करने का।
बेंगलुरु के BMS कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद वे अमेरिका के विश्वविद्यालय से अपना पोस्ट ग्रेजुएशन करना चाहते थे, परंतु वीजा न मिलने के कारण उनकी इच्छा अधूरी रह गई। वासुदेव बताते है की उन्हे कई अच्छी कंपनियों में जॉब ऑफर की परंतु वे अपनी नोकरी से संतुष्ट नहीं थे।
मां से प्रेरणा लेकर खोला भोजनालय
वासुदेव के लिए उसकी मां उसकी आदर्श है। उनसे प्रेरित होकर ही वासुदेव ने पिता से कुछ पैसे की मदद ली और बसवनागुड़ी में एक यात्री भोजनालय का शुभारंभ किया। उस भोजनालय का नाम श्री लक्ष्मी वेंकटेश्वर फास्ट फूड रखा। जब होटल से उन्हे अच्छा रिस्पॉन्स मिला, तो उन्होंने कुछ समय बाद बैंक से 1.5 लाख रुपये का लोन लिया और अपना कारोबार प्रारंभ किया।
वे बताते है की कर्नाटक में एक दर्शिनी का आयोजन किया जिसने उनके उद्देश्य को पूरा करने के लिए मार्ग सुझाया। उन्होंने प्रदर्शनी की अवधारणा में कई स्वरूपों को प्रस्तुत किया। वासुदेव बताते है की भारत में एक बहुत अजीवो गरीब परेशानी है, यहा के हर क्षेत्र में उनका क्षेत्रीय भोजन लोकप्रिय है। बहुत जगहों पर अन्य क्षेत्र का भोजन उस क्षेत्र के लोग नही अपनाते। इसी लिए रेस्तरां चेन के माध्यम से उत्तर भारतीय और चीनी व्यंजनों के अलावा उडुपी व्यंजनो को भी सर्व किया।
श्री अनंतेश्वर में दो ब्रांड नंदी उपचार और पाकशाला की स्थापना की
वासुदेव अपनी कहानी बताते हुए कहते है की वे अपने व्यावसायिक काम से अपने राज्य से बाहर निकलने का निर्णय लिया। वासुदेव का व्यापार जगह बैठ कर करने जैसा नही था। अपने भोजनालय खोलने के करीब एक वर्ष बाद, वर्ष 2018 में दो नए ब्रांड नंदी उपचार और पाकशाला को स्थापित करने के लिए श्री अनंतेश्वर में प्रारंभ किया। नंदी उपचार ब्रांडके अंतर्गत बेंगलुरु-हैदराबाद राजमार्ग में कस्टमर सर्विस के लिए दो फूड रेस्तरां की शुरुआत की।
From the walls of Vasudev Adiga's restaurant on the Bangalore Mysore road. pic.twitter.com/BiezQpGgad
— Mridula Dwivedi (@mridulablog) July 28, 2018
वासुदेव बताते है की हमारा उद्देश्य उच्च गुणवत्ता का भोजन, त्वरित सेवा साथ ही थके हुए यात्रियों के लिए स्टे व्यवस्था, स्वच्छ शौचालय, कार-पार्किंग प्लेस की अच्छे से अच्छी व्यवस्था करना है। दूसरा ब्रांड पाकशाला आठ शाकाहारी होटल की बनी एक चेन है, जो दक्षिण भारतीय, उत्तर भारतीय और चीनी फूड के लिए बनाई गई है।
महामारी ने फूड बिसनेस पर काफी बुरा असर डाला
आपदा और महामारी ने खाद्य व्यापार पर बहुत बुरी तरह प्रभाव डाला है। नेशनल रेस्तरां एसोसिएशन ऑफ इंडिया जो देश के करीब पांच लाख रेस्तरां को रिप्रेजेंट करता है। उनके अनुमान के मुताबिक करीब 90 फीसदी लोगो ने मार्च 2020 के लॉकडाउन के बाद अपना व्यवसाय बंद कर दिया। परंतु अप्रैल माह से पाकशाला और नंदी उपचार टेकअवे और डिलीवरी के लिए शुरुआत हुई।
At Vasudev Adiga’s, you get food, and fooledhttps://t.co/Kt6AfXv978 pic.twitter.com/2inHcslO5a
— Bangalore Mirror (@BangaloreMirror) September 24, 2016
इसमें पार्सल खाने के लिए लोगो की संख्या में बढ़ोतरी हुई और स्विगी और ज़ोमैटो के माध्यम से काफी अच्छे ऑर्डर मिले। लोगो में महामारी के कारण काफी ज्यादा दहशत है, इसलिए लोग अभी भी काफी ज्यादा सावधान है और वे ऑनलाइन या दूर से ऑर्डर ले रहे है। इस व्यवस्था से वासुदेव ने अपने व्यापार को कायम रखा है।



