
Khargone: कामयाबी की कुंजी कठोर परिश्रम है। कोई भी बच्चा अपनी मां के पेट से कुछ भी सीख कर नही आता। वो तो चलना भी जन्म के बाद सीखता है। कई बार गिरता है उठता है और फिर चलता है। यही तो संघर्ष है जो बच्चा जमीन पर चलने के लिए कर रहा है।
इसके बाद वो अपने जीवन की दौड़ में दौड़ना सीखता है। जो काम बिना किए छोड़ दिया जाए, तो फिर उस इंसान का मनुष्य जन्म कोई मतलब का नही होता। बिना परिश्रम के व्यक्ति अपने जीवन में कुछ हासिल नहीं कर सकता।
हम जानते है की वर्तमान समय में हर युवा चाहता है की वो पढ़ लिख कर अच्छी नोकरी करे और अपने माता पिता का नाम रोशन करे परंतु दिन वा दिन प्रतिस्पर्धा बढ़ती ही जा रही है। दुनिया में 80 फीसदी युवा डिफेंस के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहते है और खाकी वर्दी उनका सपना होता है।
यूपीएससी की परीक्षा (Civil Service Exam) देश में सबसे कठिन परीक्षा मानी जाती है। उस परीक्षा में पास होना ही विद्यार्थी के लिए गौरव की बात होती है। देश का हर युवा चाहता है आईएएस अधिकारी बनना परंतु कुछ गिने चुने लोग ही इस परीक्षा में चयनित हो पाते है। क्योंकि कामयाब समर्पण मांगती है, जो हर किसी के बस की बात नहीं होती।
आज की इस पोस्ट में हम एक ऐसी बेटी की सफलता की कहानी जानेंगे जिसने अपनी शुरूआती शिक्षा सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल से की और आज अपनी मेहनत के दम पर आईएएस अधिकारी (IAS Officer) बनी काफी चुनौती का सामना किया तब जाकर सफल हुई। तो आओ जानते है उनकी सक्सेस स्टोरी।
गरिमा अग्रवाल होनहार छात्रा की सफलता की कहानी
देश का प्रत्येक युवा यूपीएससी में सफलता प्राप्त कर आईएएस अधिकारी बनने के सपना को पूरा करने के लिए मेहनत करता है। परंतु जो व्यक्ति ईमानदारी से मेहनत करता है, उसे ही यह सफलता मिल पाती है। गिने चुने विद्यार्थी में से गरिमा अग्रवाल (Garima Agrawal) भी एक हैं। गरिमा ने अपने अथक परिश्रम से ऐसी ऊंची उड़ान भरी। पहले वे आईपीएस के लिए चुनी गई।
IPS के पद पर रहकर IAS की तैयारी करना आसान नहीं होता।इस मुश्किल चुनौती को स्वीकार कर सफलता की इबारत लिखने वाली खरगोन की प्रतिभाशाली बिटिया गरिमा अग्रवाल एवं उनके परिजनों को बधाई।#UPSC
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उसके बाद दोगुनी मेहनत कर आईएएस के लिए चुनाव हुआ जो उनका सपना था। गरिमा की सबसे अच्छी बात है कि वे सरस्वती विद्या मंदिर की छात्रा थी और प्रारंभिक शिक्षा उन्होंने उसी स्कूल से की। वह पढ़ाई मे शुरू से ही आगे रही है। 10वीं में उन्होंने 92 प्रतिशन अंक प्राप्त किए थे और 12वीं में 89 प्रतिशत अंक प्राप्त किए।
आईआईटी की छात्रा है गरिमा
मंदिरों का गड़ मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) राज्य के खरगोन (Khargone) जिले की रहने वाली गरिमा अग्रवाल आज उन्होंने अपनी मेहनत से वो ऊँचाइयों को छुआ है। जो देश के हर युवा का ख्वाब है।
कक्षा 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने जेईई एग्जाम दिया उसमे भी वे सफल हुई आईआईटी हैदराबाद (IIT Hyderabad) से उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। डिग्री पूरी होते ही उन्हे जर्मनी की एक कंपनी में इंटर्नशिप के लिए चुन लिया गया। इंटर्नशिप पूरी की। परंतु मन में कुछ और ही था इसी लिए उनका मन नहीं लग रहा था।
विदेश में रह कर अच्छे पैकेज पर काम कर सकती थी
उन्हे विदेश में शानदार नौकरी मिल गई थी, वे वहा सेटल हो सकती थी। परंतु उन्होंने इस जॉब के बदले उन्होंने प्रशासनिक अधिकारी बनने को चुना। अपने सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने जी तोड़ मेहनत की।
Meet IITian-turned-IAS officer Garima Agrawal, who secured AIR 40 in UPSC exam#UPSCMotivation | #UPSC https://t.co/qUWSv6Kgrk pic.twitter.com/PjkyBXKleE
— DNA (@dna) March 17, 2022
इंटरशिप खत्म कर वे जर्मनी से वापस भारत आई और यूपीएससी (UPSC) की तैयारी में जुट गई। लगभग डेढ़ साल तक उन्होंने सेल्फ स्टडी करके खुद को यूपीएससी के लिए तैयार किया और फिर एग्जाम दिया। पहली बार में ही उन्हे अच्छा परिणाम मिला। वह वर्ष 2017 में आईपीएस के लिए चुनी गईं।
सपने बेहद बड़े थे इसी लिए संतुष्ट नहीं थी
IPS ऑफिसर बनने पर भी उनको कुछ अधूरापन सा लग रहा था। वे अपनी जिंदगी से कुछ और चाहती थी। वे आईपीएस अधिकारी बनने पर भी संतुष्ट नहीं थी। उनका सपना आईएएस अधिकारी बनना था। वे आईपीएस के बाद भी पढती रही फिर वर्ष 2018 में एक बार फिर परीक्षा दी। इस बार उन्होंने अपना सपना पूरा कर लिया 40वीं रैंक के साथ गरिमा आईएएस अधिकारी बनी।



