
Ranchi: दुनिया बहुत आगे बढ़ गई है। परंतु कही कही देश के हालात आज भी नहीं सुधार पाए। लोग आज भी अच्छी जिंदगी को जी नही पा रहे, उन्हे अपना जीवन अभाव के ही बिताना पड़ रहा है। लोग अपना और परिवार का पेट पालने के लिए मजदूरी करते है, ठंडी गर्मी और बरसात सभी मौसम में उनको काम करना ही पड़ता है।
माता पिता का अपने बच्चो के प्रति काफी सारी जिम्मेदारी होती है और वे अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाते भी है। जिस तरह एक मां अपने बच्चे को भूखा नही देख सकती उसी प्रकार एक पिता अपने बच्चे को किसी चीज के अभाव से जीवन बिताते नही देख सकता।
वे हर संभव प्रयास करते है की उनके बच्चे को हर वो चीज दे सके जिसके वे हकदार है। वे बच्चे की प्राथमिकताएं तय करते है और सबसे पहली प्राथमिकता उनकी बच्चो की पढ़ाई होती है। शिक्षा वो हत्यार है जिसे पूरी दुनिया में आप कही भी इस्तेमाल करो हमेशा सफलता ही मिलती है। इसलिए अभिभावक चाहते है को उनका बच्चा उच्च शिक्षा प्राप्त कर सके।
आज की इस पोस्ट में हम ऐसे ही पिता की बात करेंगे, जिसने फुटपाथ में घूम कर टोपिया बेची, जिससे उनकी बेटी अच्छे से पढ़ सके और अपना भविष्य अच्छा बना सके। कहते है एक पिता के लिए उसकी बेटी किसी शहजादी से कम नहीं होती और बेटी के लिए उसका पिता किसी हीरो जैसा होता है। जब इस गरीब पिता की बेटी ने कक्षा 12th में 96 प्रतिशत अंक हासिल किए तो पिता का तो खुशी का ठिकाना ही ना रहा।
सिमरन नोरिन की सफलता की कहानी
सिमरन नौरीन (Simran Naureen) जो उन बच्चो में से एक है, जिन्होंने कक्षा 12 वी में शत प्रतिशत से सफलता प्राप्त की। सिमरन इसी लिए भी खास है क्योंकि उन्होंने गरीबी से लड़कर जीत हासिल की है। इस बिटिया ने खुद पर गरीबी को हावी नहीं होने दिया, बल्कि उससे लड़ कर उसे मात दी। अपने परिवार और पिता की मेहनत को सफल बनाया।
सिमरन के पिता का नाम जशीम अख्तर है, जो साप्ताहिक बाजार में फुटपाथ पर टोपी की दुकान लगाकर उन्हें बेचते है। टोपी बेचकर पिता अपने परिवार को चलाते और अपनी बेटी को पढ़ाते। बेटी ने अपनी पिता की मेहनत को जाया नही जाने दिया, उन्होंने भी अपनी पढ़ाई पूरी ईमानदारी से की। और 12वीं में 96.6 प्रतिशत अंक प्राप्त कर कामयाब हुई।
जिले में पहला और राज्य में 5 वा स्थान प्राप्त किया
झारखंड के रांची जिले की सिमरन कॉन्वेंट गर्ल्स स्कूलमें 12वीं के विज्ञान संकाय की छात्रा हैं। उन्होंने कक्षा 12वी में कुल 500 में से 478 अंक प्राप्त किया है। जिससे पूरी रांची जिले में उनका स्थान पहला आया है।
पूरे झारखंड राज्य में सिमरन ने पांचवा स्थान प्राप्त किया है। रिजल्ट की घोषणा के बाद जब सिमरन अपनी माता के साथ स्कूल गई और अपना रिजल्ट देखा तो वे खुशी से फूले नही समा रही थी। आपको बता दें कि सिमरन कक्षा 10वीं में भी टॉप पर आई थी।
गरीबी के कारण सीबीएससी स्कूल में नहीं पढ़ सकी
सिमरन बहुत ही होशियार बच्ची है। वे बचपन से ही सीबीएसएसी स्कूल में पढ़ना चाहती थी, परंतु आर्थिक परेसानियो के चलते सिमरन की ख्वाहिश ख्वाहिश ही रह गई। वे सीबीएसई स्कूल में नहीं पढ़ सकी। परंतु वे प्राइवेट स्कूल में पढ़ी। उनके पिता सीबीएसएस स्कूल की फीस एफर्ट नही कर सकते थे।
उन्होंने अपनी बेटी को प्राइवेट स्कूल में पढ़ाया। बेटी भी अपने पिता की हालत समझती है इसी लिए उसने उर्सलाइन स्कूल में एडमिशन लिया और अपनी पढ़ाई पूरी की। माता-पिता को गरीबी से जूझते देख सिमरन ने अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने का दृढ़ संकल्प किया।
कहते है बच्चो का मन बहुत कोमल होता है। सिमरन भी एक छोटी बच्ची है और उसके मन में गरीबी और अभाव का दिमाग पे काफी गहरा असर पड़ा आज वे जी तोड़ मेहनत कर रही है, अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधारने में।
आपदा काल में ढेरों मुसीबत का सामना करना पड़ा
सिमरन की मां इशरत बताती है कि जब आपदा में स्थिति बिगड़ रही थी। हाट बाजार बंद हो गए थे तो परिवार की स्थिति और ज्यादा खराब हो गई थी। दो वक्त की रोटी के लिए भी व्यवस्था नहीं हो पा रही थी। कठिन परिस्थिति से लड़ते लड़ते पिता ने किसी तरह भी पढ़ाई का खर्च निकाला। बेटी ने भी दिन रात एक कर दिया और आज देश का सितारा बन कर उभरी है सिमरन।



