
Varanasi: पुराने वेद, पुराण और लगभग सभी ग्रंथ संस्कृत भाषा में लिखे गये है। संस्कृत भाषा को सबसे प्राचीन भाषा का दर्जा प्राप्त है। ऐसा माना जाता है, कि सभी भाषाओं कि उत्पत्ति संस्कृत भाषा से ही हुई है। लेकिन आज के समय में संस्कृत भाषा हमारे समाज और पूरे देश से धीरे धीरे दूर होती जा रही है। लोग संस्कृत भाषा का प्रयोग ना के बराबर करने लगे है।
हमारे स्कूल में भी संस्कृत भाषा को सिर्फ 10वी क्लास तक सीमित कर दिया गया है। इसके बाद संस्कृत भाषा का हमारी पुस्तकों में कोई स्थान नहीं रह जाता है। हालांकि यह बात अलग है, कि धार्मिक पुस्तकों में संस्कृत भाषा के उपयोग किये जाने की वजह से लोग इस भाषा का प्रयोग कुछ समय के लिए कर लेते है।
अब वाराणसी एयरपोर्ट में होगी संस्कृत में घोषणा
यह स्थिति बहुत ही विचारणीय है, कि किस तरह से संस्कृत भाषा जिसे सभी भाषाओं का गुरू माना जाता है। आज पूरी तरह से विलुप्ति की कगार पर आ पहूँची है। हमारी सरकार काफी प्रयास कर रही है, कि इस भाषा को फिर से वही दर्जा मिल सके जो पुराने समय में इसे दिया जाता था। लेकिन यह प्रयास किस हद तक सफल हो पाएंगे। यह देखने वाली बात होगी।
इसी प्रयास को आगे बढ़ाते हुए उत्तरप्रदेश (Uttar Pradesh) के वाराणसी एयरपोर्ट (Varanasi Airport) में एक नई पहल की जा रही है। अब वाराणसी एयरपोर्ट में संस्कृत भाषा (Sanskrit Language) में भी अनाउंसमेंट होंगे। क्या है पूरी बात, आखिर क्यूँ कि जा रही है यह पहल आइये जानते है।
पहले सिर्फ अंग्रेजी और हिन्दी भाषा का किया जाता था प्रयोग
अभी तक हम सभी ने यह देखा है कि एयरपोर्ट में सभी तरह के अनाउंसमेंट (Announcement) ज्यादातर अंगेजी भाषा में ही होते है। एयरपोर्ट में हिन्दी और अंग्रेजी भाषा में ही सभी प्रकार की घोषणाएं होती है। सिर्फ इन भाषाओं का ही एयरपोर्ट में उपयोग किया जाता है। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा अब हमें एयरपोर्ट में संस्कृत भाषा भी तीसरी लेंगवेज के तौर पर सुनने मिलेगी। वाराणसी एयरपोर्ट में सूचनाओं को देने के लिए संस्कृत भाषा को भी जोड़ दिया गया है।
बीएचयू के सहयोग से की जा रही है नई पहल
वाराणसी में अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट लाल बहादुर शास्त्री में संस्कृत भाषा में जरुरी सूचना संबंधित अनाउंसमेंट होने लगे है। इस अनाउंसमेंट की शुरूआत लाल बहादुर शास्त्री हवाई अड्डे (Lal Bahadur Shastri International Airport) में एएआई भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने वाराणसी के बनारस हिन्दु विश्वविद्यालय जिसे शॉर्ट में बीएचयू (BHU) कहा जाता है।
उनके सहयोग से प्रारंभ किया है। इसकी शुरूआत हाल ही में की गई है। काशी शहर संस्कृत भाषा का पीठ स्थान माना जाता है। जब इस पहल की शुरूआत करते हुए एयरपोर्ट में संस्कृत में घोषणा हुई, तो वहाँ उपस्थित लोग इस अनाउंसमेंट को सुनकर खो गये। सरकार की इस पहल को बहुत से लोगों ने सराहा भी।
ट्विटर हेंडल पर वीडियों शेयर करके दी गई जानकारी
इस बात की जानकारी वाराणसी एयरपोर्ट के द्वारा दी गई। उन्होंने अपने ट्विटर हेंडल पर संस्कृत में अनाउंसमेंट का वीडियों (Sanskrit Announcement Video) शेयर किया और जानकारी देते हुए लिखा कि, अब से वाराणसी एयरपोर्ट में एक नई शुरूआत की जा रही है।
अब तक सिर्फ इंग्लिश और हिंन्दी भाषा का प्रयोग एयरपोर्ट पर किया जाता था, लेकिन अब से संस्कृत भाष में भी कोविड 19 से संबंधित सभी मानदंडो कि अनाउंसमेंट होगी। जैसे ही यात्री वाराणसी एयरपोर्ट पर पहुँचेंगे, उन्हें एहसास हो जायेगा कि वह काशी संस्कृत पीठ पर अपने कदम रख चुके है।
भाषा को सम्मान देने के लिए उठाया गया कदम
वाराणसी एयरपोर्ट के निदेशक श्री आर्यमा सान्याल जी ने इस विषय में कहा किे इस पहल को इसलिए शुरू किया जा रहा है। ताकि संस्कृत में घोषणा करके हम प्राचीन भाषा संस्कृत को सम्मान दे सके। जैसे ही संस्कृत भाषा में अनाउंसमेंट की क्लिप सोशल मीडिया पर डाली गई। इस क्लिप ने पूरे भारत में तहलका मचा दिया।
कुछ लोगो को एयरपोर्ट अथोरिटी की यह शुरूआत काफी अच्छी लगी और उन्होंने इस नई पहल की तारीफ की और एयरपोर्ट अथोरिटी को बधाई देते हुए उनकी सराहना की। वही कुछ लोगों ने इस पहल को क्रिटिसाइज किया। आलोचना करते हुए लोगो ने कहा कि इस तरह की पहल से कुछ नहीं होता। इस भाषा को देश में पुन: जीवित करने में इससे किसी भी तरह की मदद नहीं मिलेगी।
अब #भाविप्रा वाराणसी विमानतल पर अंग्रेजी और हिंदी के बाद संस्कृत में भी कोविड मानदंडों की घोषणा की जा रही है|
हमारे सम्मानित यात्रियों को विमानतल पर
आते ही महसूस हो जाएगा कि वे काशी – संस्कृत भाषा के पीठ स्थान में प्रवेश कर चुके हैं|@AAI_Official @aaiRedNR pic.twitter.com/E0RcD3LfSS— VARANASI AIRPORT (@AAIVNSAIRPORT) June 17, 2022
हर किसी की अपनी अलग राय होती है। हमें यह पहल काफी अनोखी लगी। संस्कृत भाषा भले ही आज हमारे जीवन से विलुप्त होती जा रही हो। लेकिन इस तरह की पहल से इसे सम्मान जरूर मिलेगा और नई पीढ़ी इस भाषा के महत्व को समझ पाएगी। वाराणसी एयरपोर्ट की इस पहल के लिए हम उन्हें बधाई देते है।



