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अंतरिक्ष प्रोग्राम में भारत आज रात एक और इतिहास रचने जा रहा। शुक्रवार 6 सितंबर की रात करीब डेढ़ से ढाई बजे के मध्य भारत की ओर से भेजा गया चंद्रयान-2 चांद के दक्षिणी ध्रुव पर Land करेगा। इस ऐतिहासिक पल को लेकर प्रत्येक भारतवासी उत्साहित हैं।
दुनिया की नजरें इसी पर टिकी हुई है हर किसी भारतवासी को इस “सॉफ्ट लैंडिंग” की प्रतीक्षा बहुत तीव्र गति से हो रही है, सभी को उस पल का बेसब्री से इंतजार है। चंद्रयान-2 की लैंडिंग का गवाह बनने के लिए खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ISRO ऑफिस में अपनी उपस्थिति दर्ज करेंगे।
Details of India's #Chandrayaan2 Mission: VIKRAM- #Chandrayaan2’s lander, is named after Dr Vikram A Sarabhai, the Father of the Indian Space Programme. It is designed to function for one lunar day, which is equivalent to about 14 Earth days. pic.twitter.com/d5ncwYgBLY
— ANI (@ANI) September 6, 2019
इस ऐतिहासिक पल से कुछ घंटे पहले भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ISRO चीफ के K Sivan ने न्यूज एजेंस ANI से इंटरव्यू में बताया, “हम एक ऐसी स्थान पर उतरने जा रहे हैं, जहां इससे पहले कोई नहीं गया था। हम सॉफ्ट लैंडिंग के बारे में आश्वस्त हैं। हम रात का इंतजार कर रहे हैं।”
ISRO आज देर रात चांद के जिस दक्षिणी ध्रुव पर अपना लैंडर विक्रम उतारेगा, वह कई कारणों ने महत्वपूर्ण है। यहां कई बड़े गड्ढे हैं। इसी भाग पर सौर मंडल में उपस्थित बड़े गड्ढों में से एक बड़ा गड्ढा यहीं उपस्थित है जिसका नाम साउथ पोल आइतकेन बेसिन है। इसकी चौड़ाई 2500 KM और गहराई 13 KM है।
We are landing where no one has gone before: ISRO Chief
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— ANI Digital (@ani_digital) September 6, 2019
चांद के इस भाग के सिर्फ 18 फीसदी हिस्से को पृथ्वी से देखा जा सकता है और शेष बचे 82 फीसदी भाग की प्रथम बार तस्वीर सोवियत संघ के लूना-3 शोध यान ने 1959 में भेजी थी। तब इस भाग को प्रथम बार देखा गया था।
दक्षिणी ध्रुव के भाग में सोलर सिस्टम के प्रारम्भिक दिनों के जीवाष्म उपस्थित होने की संभावनाएं हैं। चंद्रयान-2 चांद की सतह की Mapping भी करेगा। इससे उसके तत्वों के बारे में भी जानकारी मिलेगी। ISRO के अनुसार इसकी पूरी संभावनाएं हैं कि दक्षिणी ध्रुव पर पानी मिले।



