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Gangtok: आज के समय में रासायनिक उर्वरकों का उपयोग खेती में बहुत अधिक किया जाने लगा है। जिसकी वजह से हमारी मिट्टी अपनी उपजाऊ क्षमता खोती जा रही है। जिसे दूर करने के लिए आजकल जैविक खेती (Organic Farming) की जा रही है।
हमारी सरकार की तरफ से भी इसे बढ़ावा दिया जा रहा है। ताकि अधिक समय तक एक ही जमीन पर खेती कि जा सके और अच्छी फसल प्राप्त कि जा सके। हमारे देश में सबसे पहले सिक्किम (Sikkim) में जैविक खेती कि शुरूआत कि गई थी। जो कि अब धीरे धीरे पूरे देश और दुनिया में फैलती जा रही है।
क्या होती है आर्गेनिक खेती
आर्गेनिक फार्मिंग, खेती करने की वह प्रकिया है। जिसमें संश्लेषित उर्वरकों एवं रासायनिक कीटनाशकों का बिल्कुल नहीं या फिर बहुत कम प्रयोग किया जाता है। हम जानते है कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के प्रयोग से भूमि कि उर्वरकता कम हो जाती है। जिससे होने वाली फसलों पर प्रभाव पडता है।
इसलिए यह आवश्यक हो गया है कि भूमि की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने के लिये फसल चक्र, हरी खाद, कम्पोस्ट खादी आदि का उपयोग ज्यादा से ज्यादा किया जाये। सन् 1990 के बाद से दुनिया में जैविक उत्पादों का उपयोग काफ़ी बढ गया है।
आर्गेनिक कृषि एक ऐसी प्रणाली है, जिसमें रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक और खरपतवार नाशक की जगह में देशी खाद और पोषक तत्वों का प्रयोग किया जाता है। यह जैविक खाद गोबर खाद, कम्पोस्ट खाद, हरी खाद होती है।
जीव नाशक के तौर पर बायो-पैस्टीसाईडस और बायो एजैन्ट का प्रयोग किया जाता है। जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति ज्यादा समय तक बनी रहती और अधिक समय तक इस भूमि पर खेती कि जा सकती है। जिससे हमें अधिक उत्पाद भी प्राप्त होता है।
आजकल लोग गॉंव छोड कर शहरो में जाना अधिक पसंद करते है, कोई भी गॉंव में रहकर खेती नहीं करना चाहता है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि लोगों को ज्यादा मेहनत करना पसंद नहीं आ रहा है। लोग शहर कि सुख सुविधा देखकर गॉंव से पलायन करने लगे है।
कुछ लोगों का मानना हैं कि खेती-किसानी में कुछ नहीं रखा है। ऐसे लोग जो इस तरह की सोच रखते हे, उन्हें एक बार उत्तरप्रदेश के लखनऊ में रहने वाले सीआईएसएफ के पूर्व जवान (Ex CISF Jawan) अचल जी से मिलना चाहिए।
सीआईएसएफ के जवान अचल बने किसान
अचल जोकि एक नए किसान बन गये है। इन्होंने जैविक खेती करने के लिए अपनी सीआईएसएफ कि नौकरी छोड़ दी और अपने गॉंव वापस आकर खेती करनी शुरू कर दी। एक समय में अचल जी केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल में जॉब किया करते थे।
वह देश कि सेना का हिस्सा हुआ करते थे। लेकिन उन्हें खेती करने में इतना इंटरेस्ट था कि वह खेती के प्रति प्रेम के कारण 2013 में अपनी नौकरी से रिटायरमेंट लेकर अपने गॉंव वापस आ गये।
जैविक खेती को दे रहे है बढ़ावा
अचल जी अपनी पत्नी जिनका नाम वंदिता है। उनके साथ मिलकर अपने पूरे तन मन और धन से जैविक खेती करने में लग गये हैं। नौकरी छोड़ने के बाद अचल ने खेती करना शुरू कर दी, लेकिन उन्होंन डिसाईड किया कि वह कभी भी अपने खेतों को रासायनिक उर्वरक का उपयोग नहीं करेंगे। वह पूरी तरह से देशी तरीके से खेती करना चाहते थे।
अपने इस ख्वाब को पूरा करने के लिए वह स्वयं खेतों में काम करने लगे और युपी के लखनऊ में स्थित मोहनलालगंज के कूढ़ा में अपनी आठ बीघा जमीन पर केले और फूलों की खेती करना प्रारंभ कर दिये। जल्दी ही उनकी मेहनत रंग लाने लगी और उन्हें खेती से लाभ होने लगा। फिर धीरे-धीरे उन्होंने अपनी खेती को बढ़ाते हुए हरी सब्जियाँ भी उगानी प्रारंभ कर दीं। जिससे उन्हें काफी अच्छा प्रॉफिट होने लगा।
लाखों में होती है कमाई
अब समय यह आ चुका है कि अचल (Achal) अब दूसरों को भी जैविक खेती करने के लिए प्रेरणा देते है और जैविक खेती शुरू करने में उनकी मदद भी करते है। वह रोजाना किसानों के लिए जैविक खेती से जुड़ी जानकारी देने के लिए क्लास लगाते हैं। जिसमें वह किसानो को जैविक खेती के बारे में बताते हैं। कि किस तरह से जैविक खेती करने से उनका जीवन बदल सकती है और वह लाखों में मुनाफा कमा सकते है।

अचल जी के मुनाफे कि बात कि जाये, तो वह स्वयं साल भर में लाखों रुपए का मुनाफा प्राप्त कर लेते हैं। जैसिक खेती करने के नए तरीके कि वजह से अचल जी को अलग अलग मंचों पर बुला कर पुरस्कार भी किए जा चुके है और उन्हें सम्मानित कि किया गया है, जिससे उनके पूरे इलाके में उनका नाम बढा है।
अब उनका नाम बहुत ही सम्मान के साथ आदर पूर्वक लिया जाता है। अचल जी अपने इस कार्य से लोगों को प्रेरित कर रहे है और उन्हें भी जैविक खेती करने कि सलाह देते हे। हम अचल जी के इस कदम कि सराहना करते है और उन्हें बधाई देते है, कि आगे भी वह इसी तरह से तरक्की करें और लोगों को अपने साथ जोड़ते चले।



