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Banda: हर माता पिता का सपना होता है की उनका बेटा या बेटी अच्छी पढाई लिखे करके एक अच्छी नौकरी पा जाये और सेटल हो जाये। बहुत से बच्चे इस राह पर खरे नहीं उतर पाते हैं। ऐसे में हम कुछ ऐसी ऐसी कहानी या कीसे लेकर आते रहते हैं, जिन्हे जानकर आप प्रेरित हो। प्रेरणा एक ऐसी शक्ति है, जिसे पाकर कोई भी अपनी मंजिल तक पहुँचने के लिए काम और मेहनत करने लगता है। आज की कहानी एक छोटे से गाँव के स्टूडेंट की है।
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बांदा (Banda) जिले के एक छोटे से गाँव के लड़के ने कमाल कर दिखाया है। यहां के एक छोटे से गांव तिलौसा (Tilousa Village) के रहने वाले प्रभात ओझा ने साइंटिस्ट की परीक्षा पास (Scientist Exam Cleared) कर अपने परिवार और गाँव का नाम रौशन कर दिया है।
प्रभात (Prabhat Ojha) का चयन राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय भारत सरकार (NIC IT) में ‘वैज्ञानिक बी’ (Scientist B) की पोस्ट पर हुआ है। यह एक बहुत बड़ी कामयाबी है। प्रभात के साथ ही साथ उनके माता पिता का भी सपना साकार हो गया है। उन्होंने भी बहुत जतन किये हैं।
पूरे देश में 44 वीं रैंक
प्रभात ने इस परीक्षा में पूरे देश में 44 वीं रैंक (All India 44 Rank) हासिल कर दिखा दिया है कि यदि पूरी लगन से मेहनत की जाए, तो सफलता सही वक़्त आने पर जरूर मिल जाती है। मेहनत और सब्र का फल मीठा ही होता है।
प्रभात को जानने वालों द्वारा बताया गया है की प्रभात बचपन से ही पढाई में अच्छे रहे हैं। इस कारण उनके माता-पिता ने उनकी पढ़ाई में कोई कमी नहीं छोड़ी और उन्हें पढ़ने के लिए हर सुविधा दी।
पढाई में हमेशा अच्छे नंबर लाये
प्रभात ने भी अपने माता पिता को निराश नहीं किया और पूरी लगन से खूब पढ़ाई की। 10वीं के बाद 12वीं की परीक्षा अच्छे अंकों से पास होने के बाद उन्होंने इंजीनियरिंग में एडमिशन ले लिया और आगे बढ़ते रहे। यहाँ भी अच्छे अंको से पास होरे रहे।
भारतीय रेलवे में इंजीनियर के पद पर सेलेक्ट हुए
साइंटिस्ट बनने के अपने सपने को पूरा करने किए कड़ी मेहनत की। इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रभात ने नौकरी करने की जगह ‘गेट’ की परीक्षा (GATE Exam) के लिए तैयारी की शुरू की और फिर उसमे भी सफल हो गए। उच्च दर्ज़े की ‘गेट’ परीक्षा को पास कर वो उच्च शिक्षा के लिए आईआईटी गुवाहाटी चले गए और फिर भारतीय रेलवे में इंजीनियर के पद पर भी चयनित हुए।
UP: Son, resident of Banda village named the district as Roshan, became a scientist by securing 44th rank pic.twitter.com/kXttQ2jABo
— sanatanpath (@sanatanpath) April 17, 2022
अगर वे चाहते तो वही रुक जाते और रेलवे की जॉब ज्वाइन कर लेते, परन्तु उन्हें अपना सपना पूरा करना था। तो प्रभात नहीं रुके और 2020 में साइंटिस्ट बनने के लिए परीक्षा दी। फिर अभी रिजल्ट आया, तो वे इस परीक्षा में भी पास हो गए थे। उन्होंने अपने माता पिता का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया और सर ऊंचा कर दिया। अब उनके पेरेंट्स भी बहुत खुश और उत्साहित हैं।



