इन 85 साल के रिटायर शिक्षक ने अपने घर पर पक्षी अभ्यारण्य बनाया, 1500 पक्षियों को दिया आसियाना

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Ramjibhai Makwana
Ramjibhai Makwana A Person who Dedicated life in the service of birds. 85 year old Gujarat retired teacher’s home is a bird sanctuary.

Ramtekri, Gujarat: हिंदू संस्कृति में मानव सेवा के अलावा अन्य पशु पक्षियां की सेवा करना भी बहुत पुण्य माना गया है। हमारे चारों ओर के वातावरण में ढेर सारे जीव जंतु रहते है। कुछ पानी में रहने वाले कुछ हवा में उड़ने वाले, तो कुछ जमीन में रंगने वाले। मानव और जीव जंतु एक दूसरे पर आधारित है।

वातावरण का संतुलन बनाये रखने के लिए सभी जीव जंतु आवश्यक है। बढ़ती आबादी और मानव सुबिधाओं से जंगलों की कटाई हो रही है। जिससे जीवो का आवास अस्त व्यस्त हो जाता है और शिकारिओं के कारण कुछ प्रजाति विलुप्त होते जा रही है। इसी के बीच एक बुजुर्ग दम्पति पिछले 40 सालों से पक्षियों का भरण पोषण कर रहे है तो आइए जानते है, कौन है ये और किस तरह करते है, अपना काम।

साधारण परिचय

गुजरात (Gujarat) राज्य के सीहोर जिले के रामटेकरी (Ramtekri) इलाके के रहने वाले रिटायर्ड शिक्षक (Retired teacher) जिनका नाम रामजी भाई मकवाना (Ramjibhai Makwana) है। रिटायरमेंट के बाद वह रामटेकरी आये और अपना एक आश्रम खोला जिसका नाम पक्षी तीर्थ आश्रम है।

उन्होंने बताया कि जब वह छोटे थे। तब एक कहानी सुनी थी, जिसका सारांश निकलता था की पक्षियों को दाना खिलाने से भगवन प्रसन्न रहते है। वह आज तक न वो कहानी भूले है और न उससे मिली शिक्षा।

पिछले 40 साल से वह रामटेकरी में बनाए आश्रम में अपनी पत्नी के साथ मिलकर जीव सेवा करते है। पशु पक्षी और बेसहारा लोगो की मदद भी करते है। उनके द्वारा बनाया गया यह आश्रम किसी अभ्यारण (Sanctuary) से कम नहीं है।

उन्होंने अपने पैसो से अलग अलग पक्षियो के लिए अलग अलग खाना पानी की व्यवस्था की। वहां 1500 से ज्यादा पक्षी भोजन पानी की तलाश में उनके आश्रम (Aashram) आते है। उनको दाना चुगते देख दोनों हर्ष से उल्लसित हो जाते है।

अपने काम के प्रति इतनी लगन, की से कभी छुट्टी नहीं ली

सूरज की पहली किरण पड़ते ही दोनों पति पत्नी अपने काम में लग जाते है। उनके द्वारा बनाये खाने के डिब्बे में दाना डालना और पानी की प्यालियों में पानी भरने का काम दोनों मिलकर करते है। इतना ही नहीं रामजीभाई की पत्नी हेरी बेन पशुओं के लिए स्वयं रोटी बनाती है और अपने हाथों से खिलाती है।

रामजीभाई की उम्र 85 साल है। इस उम्र में भी वह एक दिन की छूटी नहीं लेते। वह कहते है अगर मैंने छूटी ले ली तो मेरे बच्चे समान पक्षियों का पेट कैसे भरेगा। इस लिए उन्होंने कई सारे फलदार पौधे लगाए जिससे पक्षी उन्हें खा कर भी अपना पेट भर लेते हैं।

रामजीभाई का उदाहरण सबके लिए प्रेरणा दायक है।

सीताराम (Sitaram) नाम से प्रसिद्ध रामजी भाई मकवाना स्वभाव से बहुत सरल और सुलझे हुए व्यक्ति है। लोग उनकी और उनके कार्य की बहुत ही सराहना करते हैं। रामजी भाई (Ramji Bhai) गरीब लोगो की भी खूब सहायता करते है।

उनके आस पास रहने वाले निवासियों ने बताया कि गरीब गांव वालों की सहायता, उन्होंने आपने पेंशन के पैसे से की। पक्षी ही नहीं बल्कि, जो भी बेसहारा आता है, तो वहां से खाली हाथ नहीं जाता है। रामजी भाई कहते है, शुरू में यह कार्य उन्होंने स्वयं के पैसो से किया था और आज लोग उन्हें दान देकर जाते है।

रामजी भाई का परिवार भी उनकी खूब सहायता करते है। रामजी भाई कहते है “नेकी करने वालो की मदद तो स्वयं भगवान भी करते है।” इस लिए कई लोग अब हमारी मदद करने आते है। इस वजह से ही हम आज आपने काम को अच्छे से कर पा रहे है।

शहर का एक घर, जहा जंगल जैसी शांति है

राम जी भाई सुबह जल्दी उठ कर गांव में घूमते है और वहां से टूटे फूटे डिब्बे लेकर आते है। जो पक्षियों के लिए भोजन रखने के काम आता है। लोग उनके काम की सराहना करते है और उनका इंतजार करते है की पक्षियो के लिए कुछ न कुछ बना कर भेज सके रामजीभाई के इस प्रेम को देख कर पक्षियों की तादात भी बढ़ती जा रही है।

रामटेकरी में हर दिन मोर, बुलबुल, ढेल, मैना, कबूतर, तोता, चिड़िया, लैला जैसे कई पक्षी दाना चुगने और मजे से वातावरण का आनंद लेते दिखाई पड़ते हैं। इस मनोरम दृश्य को देखने कई पर्यटक आते है और उनको देख कर खूब आनंदित होते है। निःस्वार्थ भाव से बेज्वानो की सेवा परम आनंन्द की अनुभूति कराती है।

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