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Hyderabad: जब कभी कोई आपसे भारत के सबसे अमीर व्यक्तियों के बारे में पूछता है, तो सबसे पहले हमारे दिमाग में टाटा बिरला या अंबानी जैसे उद्योगपतियों का नाम ही मंद में आता है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि इस समय भारत के अमीर व्यक्तियों में इन उद्योगपतियों का नाम काफी चर्चा में है और यह हम अच्छी तरीके से जानते हैं।
इनकी चर्चा देश ही नही विदेश में भी की जाती है। लेकिन किसी को भी यह जानकर हैरानी नहीं होगी कि अब तक के सबसे अमीर भारतीय उपनिवेशिक शासन से पहले भारत की एक बहुत ही प्राचीन सांस्कृतिक विरासत रही है और यहां पर बहुत ही बड़े राजा महाराजा हुआ करते थे, जो भारत के कुछ इलाकों पर राज करने वाले राजा भी होते थे, उनके पास इतनी अचल संपत्ति थी कि उसको संभालना बहुत कठिन होता था।
आज हम आपको ऐसे अमीर शख्स के बारे में बताने जा रहे है, जिसको जानकर आप हैरान हो जाएंगे उनका नाम है मीर उस्मान अली खान (Mir Osman Ali Khan)। यहाँ हम बात कर रहे हैं, एक ऐसे नवाब की जिनकी रियासत में स्वतंत्रता से पहले भारत में कई 565 बड़ी छोटी रियासतें थी।
इन सभी रियासतों में से हैदराबाद सबसे समृद्ध एवं शक्तिशाली रियासत हुआ करती थी। इस रियासत में बहुत से निजाम नवाबों ने राज्य किया और हम बात कर रहे हैं इसी रियासत के अंतिम नवाब निजाम उस्मान अली खान (Nizam Osman Ali Khan) की।
उस्मान अली खान आसफ जाह, 6 अप्रैल 1886-1967 हैदराबाद रियासत के अंतिम निजाम शासक (Hyderabad Riyaasat Last Ruler) थे। उस समय जो भारत की सबसे बड़ी रियासत मानी जाती थी। ब्रिटिश काल में उस्मान अली खान 29 अगस्त 1911 को 25 वर्ष की उम्र में सिंहासन पर विराजमान हुआ।
उन्होंने साल 1948 तक हैदराबाद रियासत पर अपना दबदबा बनाये रखा। तब तक कि जब तक भारत ने इसे अपने अधीन नहीं किया। उन्हें हैदराबाद के निजाम हिज एक्सल्टेड हाइनेस के रूप में दर्जा दिया जाता था और सभी निजाम से उनको व्यापकता से देखा जाता था।
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दुनिया के अब तक के सबसे धनी लोग (Most Richest Person in The World) में से एक उनकी संपत्ति अमेरिकी सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 2 प्रतिशत थी। उस्मान अली खान लगभग 37 सालों तक हैदराबाद रियासत पर राज्य किए।
हैदराबाद के निजाम को विश्व के सबसे अमीर लोगों में से एक माना जाता था और उनका निधन 1967 में 80 वर्ष की आयु में हो गया था। 1911 से 1948 तक वे इस रियासत के निज़ाम (शासक) रहे, जब सरदार पटेल की अगुवाई में भारतीय सेना ने कार्यवाही करके इन्हें पद से मुक्त कर दिया और हैदराबाद को भारतीय गणतंत्र में शामिल कर लिया।
1937 :: मीर उस्मान अली खान, हैदराबाद के निज़ाम का टाइम मैगज़ीन कवर।
टाइम मैगज़ीन ने निज़ाम को दुनिया का सबसे अमीर आदमी बताया pic.twitter.com/JT83MMT5TI
— Pyro Bors (@PyroBors) September 17, 2019
बाद में 26 जनवरी 1950 को वे हैदराबाद राज्य के पहले राजप्रमुख नियुक्त किये गए थे। एक समय में उस्मान विश्व के सबसे अमीर व्यक्ति थे। वे आज भी भारत के इतिहास में सबसे धर्मनिरपेक्ष राजा में अपनी जगह आज भी बनाये हुये है।
निजाम को एक बहुत ही प्रशिक्षित कुशल शासक माना जाता था और वहां की प्रजा उन्हें निजाम सरकार और हुजूरे निजाम जैसे नामों से पुकारा करती थी। उस समय उनका राज्य का क्षेत्रफल करीब करीब 86,000 वर्ग मील लगभग 223,000 वर्ग किलोमीटर था। जो उस समय ब्रिटेन और स्कॉटलैंड का आकार था।
सातवा निजाम मीर उस्मान अली खान असाफ जाह व सरदार वल्लभभाई पटेल यांच्या भेटी दरम्यान #मुक्तीलढा pic.twitter.com/FfCjZ9T7wX
— इडलीवाला अण्णा (@ashutoshab) September 17, 2015
यह वो शासक था, जो सभी ब्रिटिश भारत (British India) में सर्वोच्च रैंकिंग में राजकुमार था। उस वक़्त वे 21 बंदूकों की सलामी के हकदार थे। कहा जाता है की किसानों के प्रति अपने समर्पण को दिखाते हुए उन्होंने भूमिहीन किसानों के लिए अपने निजी भूमि से 14,000 एकड़ को दान में दे दिया।
कितनी थी निजाम नवाब की कुल संपत्ति
कुछ सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार उस्मान अली खान की संपत्ति (Nizam Mir Osman Ali Khan Net Worth) लगभग 17.47 लाख करोड़ 230 अरब डॉलर से ज्यादा थी। इस समय पर उस्मान अली खान की संपत्ति वर्तमान टेस्ला के मालिक एलन मस्क के लगभग बराबर गिनती में आती है।
एलन मस्क इस समय 273 अरब डॉलर के साथ विश्व के सबसे अमीर आदमी में अपनी जगह बनाये हुए है। इसके बाद ऐमजॉन की जेफ बेजोस नाम आता है जिन की वर्तमान संपत्ति 188 अरब डॉलर है। हम आपको बता दें कि उस समय हैदराबाद के इस निजाम को दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों में से एक गिना जाता था।
धन का प्रमुख स्रोत
उस्मान अली खान की आय का मुख्य साधन यह “गोलकोंडा खान” था, जो निजाम के लिए राजस्व का मुख्य स्रोत था। 19 वीं शताब्दी में हैदराबाद और बेरर विश्व बाजार में हीरे के एकमात्र निर्यात करने वाले थे। मतलब उस्मान की अमीरी गोलकोंडा की हिरा उगलने वाली खान की वजह से थी।
तारिख़े गवाह है उस हस्ती उस इतिहास की
बस तुम गुमराह हो अनजान हो जानों तो बहुत कुछ मिलेगा जानने को,," हैदराबाद निज़ाम मीर उस्मान अली ख़ान ने मुल्क की हिफाजत के लिये 5 टन सोने दिया था"!!@WasiuddinSiddi1 @SalmanP0001 pic.twitter.com/hAvGwaCnkI
— 🇮🇳सत्यवाणी🇮🇳 (@khanashraf045) September 5, 2020
बता दें की साल 1965 में जब भारत चीन से युद्ध कर रहा था। उस समय भारत की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर हो चुकी थी, उस समय के प्रधानमंत्री रहे, श्री लाल बहादुर शास्त्री ने देश के अमीर लोगों से आर्थिक सहायता की गुजारिश की थी। जिसमें उस्मान अली खान भी शामिल थे, जिन्होंने भारत सरकार को बिना देरी किए कि 5000 किलो सोना दे दिया था।
कंजूसों में गिनती थी
इतने धनी होने के बाद भी उनकी गिनती कंजूसों में की जाती थी। ऐसा कहा जाता है कि वह इतने कंजूस थे कि उन्होंने सोना दिल्ली भेजते समय कहा था कि, हम सिर्फ सोना को दान में दे रहे हैं इसलिए इन लोहे की बॉक्स को वापस हैदराबाद भेज दिया जाए।
नोट चूहे कुतुर देते थे
ऐसा कहा जाता है कि चूहे उस्मान अली खान के नोट काट जाया करते थे। उस्मान अली खान जहां पर वह विश्राम करते थे, वहीं जमीन पर धन-संपत्ति को ऐसे ही छोड़ देते थे। ऐसा भी सुना जाता है कि वे नगदी दो अखबारों में लपेट कर रखते थे, लेकिन हर वर्ष उनके कुछ नोट चूहे कुतर देते थे।
हैदराबाद स्टेट बैंक की स्थापना की
सन 1941 में उन्होंने अपना स्वंय का बैंक, ‘हैदराबाद स्टेट बैंक’ (Hyradabad State Bank) राज्य के केंद्रीय बैंक के रूप में था। लेकिन कुछ कारण बाद में इसका नाम बदल दिया गया, जिसे स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद किया गया और फिर 2017 में उसे भारतीय स्टेट बैंक (SBI) में मिला लिया गया।
#OTD The last Nizam of Hyderabad, Mir Osman Ali Khan was born in 1886. Sharing here a story of Nizam’s visit to Lucknow.
The historical visit of the Nizam of Hyderabad, to Lucknow in 1939 was a prestigious occasion for the elite of the city. pic.twitter.com/x2u7H8BgAb— Guzashta Lakhnau گزشتہ لکھنؤ (@GuzashtaLakhnau) April 6, 2020
8 अगस्त 1941 को हैदराबाद स्टेट बैंक अधिनियम के अंतर्गत स्थापित किया गया था। बैंक ने हैदराबाद की मुद्रा उस्मानिया सिक्का में सफल रहे। यह भारत का एकमात्र राज्य था, जिसमें हैदराबाद के बैंकनोट्स अपनी मुद्रा-हैदराबादी रुपया था।



