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Delhi: मुकेश अंबानी पूरे विश्व के ब्लू हाइड्रोजन के क्षेत्र में वैश्विक लीडर बनने की रेस में सबसे आगे हैं। मीडिया सूत्रों के मुताबिक़, मुंबई में उनकी कंपनी 4 अरब डॉलर के एक संयंत्र का पुनर्निमाण करने जा रही है। अब पेट्रोलियम कोक को संश्लेषण गैस में चेंज करके 1.2-1.5 डॉलर पर किलोग्राम के रेट से ब्लू हाइड्रोजन (Blue Hydrogen) का प्रोडक्शन किया जायेगा।
भारत के सबसे रहीस व्यक्ति मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) की लीडरशिप में रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) का मकसद अपनी हरित ऊर्जा योजना में आहे बढ़ना और ब्लू हाइड्रोजन के सबसे बड़े उत्पादकों में की लिस्ट में सबसे आगे रहना है। बताया जा रहा है की ब्लू हाइड्रोजन को जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuel) का इस्तेमाल करके बनाया जाता है। इसके प्रोडक्शन के दौरान बनने वाले कार्बन डाइऑक्साइड को भी उपयोग में लाया जाता है।
रिलायंस एक काम चलाऊ उपाय को जब तब इस्तेमाल करेगा, जब तक कि अक्षय ऊर्जा का उपयोग करके पानी के इलेक्ट्रोलिसिस से प्रोडूस ग्रीन हाइड्रोजन (Green Hydrogen) की लागत पर्याप्त नहीं हो जाती। जब ग्रीन हाइड्रोजन की कीमत कम होगी, तब इसका इस्तेमाल करके काम को आगे बढ़ाया जायेगा।
रिलायंस कंपनी (Reliance Company) ने अपने ऑफिसियल बयान में कहा, “जब तक हरित हाइड्रोजन की लागत कम नहीं हो जाती, RIL भारत में मिनिमम इन्वेस्टमेंट के साथ हाइड्रोजन पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करने वाला पहला हो सकता है। पहले सिनगैस से हाइड्रोजन को हरे हाइड्रोजन की मदत से प्रतिस्थापित किया जाता है और अब पूरे सिनगैस को रसायनों में चेंज कर दिया जाता है।” यह प्रक्रिया ऐसे ही चलती हैं।

अंबानी की कंपनी ने जीवाश्म ईंधन पर बहुत ध्यान दिया है। वह डीजल और गैसोलीन जैसे ईंधन की सेलिंग को क्लीनर ऑब्शन के साथ बदलने की योजना बना रहे हैं, क्योंकि वह 2035 तक अपने ग्रुप के लिए कामयाबी हासिल करना चाह रहे है। इससे भारतीय बाज़ार को भी बहुत फ़ातेड़ा होगा।
यह परियोजना अंतरराष्ट्रीय संयंत्रों को चुनौती देगी, जैसे कि एक सऊदी अरब में प्रस्तावित है, जो हाइड्रोजन उत्पादन को बढ़ावा देने की बात कर रहा है। अंबानी (Ambani) ने इस दशक के आखिर तक हरित हाइड्रोजन (Green Hydrogen) का उत्पादन 1 डॉलर प्रति किलोग्राम करने की हामी भरी है। बीते महीने उन्होंने नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए करीब 75 बिलियन डॉलर के निवेश की योजना की घोषणा की है। यह पहल भारत को एक हाइड्रोजन पावर बना सकती है।
India's Reliance plans to turn syngas into blue hydrogen https://t.co/V09jSKA4Nr pic.twitter.com/iLYm5rEwZo
— Reuters Asia (@ReutersAsia) February 12, 2022
ऐसा अनुमान है की आज से 15 साल बाद हमारे जीवन में ग्रीन हाइड्रोजन का बहुत महत्व होगा। भारत सहित विश्व के सभी देश इस पर काम करना शुरू कर चुके हैं। ग्रीन हाइड्रोजन एक रासायनिक पदार्थ है, जो ऊर्जा के स्रोत से लेकर सभी अन्य तरीकों से इस्तेमाल होता है।
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For details and registration: iccmumbai@iccmail.in#webinars #chemicalindustry pic.twitter.com/syJvBaQqwl— Indian Chemical Council (@icc_india) February 14, 2022
ग्रीन हाइड्रोजन एक ऐसी प्रोसेस के माध्यम से निर्मित होता है, जो किसी ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन नहीं करता। ग्रीन हाइड्रोजन को ईंधन बनाने के लिए पूरी दुनिया के देश किसिष कर रहे है। ऐसा अंदाज़ा है की भारत में रिफाइनरियों, उर्वरकों और सिटी गैस ग्रिड जैसे अनुप्रयोगों के लिए ग्रीन हाइड्रोजन की मांग साल 2030 तक ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तौर पर बढ़कर 2 मिलियन टन प्रति वर्ष हो जाएगी।
#RelianceIndustries: Mukesh Ambani’s Reliance Industries Ltd. has set the target to become one of the world’s largest producers of Blue Hydrogen. The plan comes as a temporary arrangement to reduce the cost of green #hydrogen. #Sustainability #MukeshAmbani #India #bluehydrogen pic.twitter.com/YuSXu8deF8
— The Logical Indian (@LogicalIndians) February 14, 2022
एक मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है की निर्माण क्षेत्र की प्रमुख कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) और प्रमुख अक्षय ऊर्जा कंपनी रिन्यू पावर (ReNew Power) ने हाल ही में भारत में 60 अरब डॉलर के उभरते ग्रीन हाइड्रोजन बाजार का फायदा लेने के लिए एक डील की है। यह कंपनियां 2 साल में भारत और पड़ोसी देशों में सेगमेंट से 2 अरब डॉलर की बिजनेस कैपेसिटी को पूरा करेगी। इससे ईंधन और ऊर्जा के क्षेत्र में भारतीय बाज़ार को बहुत लाभ होगा और नई संभावना बनेंगी।



