सांगली में बहनों ने सेना जवानों की कलाई पर बांधी राखी और बाढ़ से बचाने के लिए धन्यवाद किया।

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भाई और बहन के पवित्र प्यार का पर्व रक्षाबंधन आने वाला है। मार्केट में राखियां सज गई हैं और बहने अपने भाइयों की कलाई में रखी बढ़ाने के लिए तरह -तरह की राखियां खरीद रही हैं। वहीं कल महाराष्ट्र के सांगली जिले में कई महिलाओं और युवतियों ने सेना के जवानों की कलाई पर राखी बांधकर उनको धन्यवाद दिया।

इस टाइम सांगली बाढ़ की वजह से सुर्खियों में बना हुआ है। जहां के कई गांवों बाढ़ की चपेट में आकर मुख्य धारा से कटकर अलग हो गए थे। सेना के जवानों और NDRF की टीमों ने पहुंचकर लोगों को बाढ़ के प्रकोप से निकलकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और अपनी जान की परवाह किये बिना उनकी जान बचाई।



सांगली के लोगो को बाढ़ के प्रकोप से बचाकर उनकी जान बचाने के लिए महिलाओं और युवतियों ने जवानों की कलाई पर राखी बांधी और कहा कि आपने मेरी अपनी जान पर खेल कर हमारी जान बचाई है इसलिए आप ही मेरे भाई हो। राखी बंधवाने के बाद जवानों ने भी उनकी रक्षा का वचन दिया और अपने -अपने कार्य पर दोबरा वापस लौट गए।

इस बार रक्षाबंधन में राखियों की दुकान में विंग कमांडर अभिनंदन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी राखी मिलती हुई दिखाई दे रही है। बच्चे इस प्रकार की राखी को बहुत पसंद कर रहे हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी को भी राखी भेजने का सिलसिला प्रारम्भ हो चुका है। वैसे तो हर साल रक्षाबंधन पर प्रधानमंत्री को राखी भेजी जाती है, लेकिन इस बार प्रधानमंत्री के लिए भी रक्षाबंधन कुछ अलग ही है।



ये रक्षाबंधन इसलिए खास बन गया है क्योंकि मोदी सरकार के तीन तलाक विरोधी कानून से उत्साहित होकर वाराणसी की महिलाओं ने प्रधानमंत्री को राखी भेजी है। कई महिलाओं ने तो खुद अपने हाथ से राखियां बनाकर प्रधानमंत्री मोदी को भिजवाई हैं।


उनके इस कार्य की कुछ मौलानाओं ने प्रशंसा की तो वहीं कुछ ने कहा ये लोकप्रियता बढ़ाने का तरीका है। विरोधियों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ RSS पर आरोप लगाया है।

अपने हाथ से खुद डिज़ाइन कर राखी भेजने वाली मुस्लिम महिलाओं ने कहा “जिस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन तलाक जैसी कुप्रथा को समाप्त करवाया, वह केवल एक भाई ही कर सकता है। अपने भाई के लिए हम बहनें अपने हाथों से राखी बनाकर भेज रहे हैं। यह रक्षाबंधन सभी के लिए खास बन गया है।



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