MP में लगेगी आदि शंकराचार्य की 108 फीट ऊंची अष्टधातु की मूर्ति, STATUE OF ONENESS कहा जायेगा

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Adi Shankaracharya Statue
MP govt to install Adi Shankaracharya's 108-foot-high statue in Omakareshwar. Adi Shankara statue STATUE OF ONENESS to connect Madhya Pradesh with world.

Omkareshwar: अब आने वाले समय में मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) का ओंकारेश्वर (Omkareshwar) टूरिज्म की दुनिया में एक नया अध्याय जोड़ने जा रहा है। इस प्रदेश में अष्टधातु से बनी आदि शंकराचार्य की 108 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की जाएगी। यह प्रतिमा 54 फीट ऊंचे प्लेटफॉर्म पर स्थापित करने की बात कही गई है।

इस मूर्ति (Statue of Adi Shankaracharya) के प्रोजेक्ट की लागत लगभग 2 हजार करोड़ रुपए आएगी। सबसे खास बात है कि जिस कंपनी ने गुजरात में स्टेच्यू ऑफ यूनिटी बनाने में अपना योगदान दिया है, उसी कंपनी को इस प्रतिमा को बनाने का जिम्मा दिया जाएगा।

इस मूर्ति को कमल के आकार के लगभग 27 फीट ऊंचे बेस पर खड़ा किया जाना है। यह प्रोजेक्ट 2023 तक बनकर पूर्ण होना है। संतों ने बताया कि यह प्रकल्प अद्वैत वेदांत संस्थान विश्व में पर्यटन के साथ ही अध्यात्मिक क्रांति का भी प्रचार करेगा।

आदि शंकराचार्य की प्रतिमा (Adi Shankaracharya Statue) की समुद्र तल से ऊंचाई लगभग 280 मीटर (918 फीट) होगी। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के कार्यालय ने खबर दी है की शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास के न्यासी मंडल की बैठक हाल ही में शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में की गई। इसमें शंकराचार्य की प्रतिमा, यहाँ के संग्रहालय और अंतरराष्ट्रीय वेदांत संस्थान के विषय में बातचीत हुई।

यह मूर्ति स्टैचू आफ वननेस (एकात्मता की मूर्ति) कहलाएगी

मुख्यमंत्री शिवराज (CM Shivraj Singh Chouhan) ने कहा कि आचार्य शंकर की ज्ञान भूमि ओंकारेश्वर का प्रकल्प अद्वैत वेदांत के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इसे एकात्मता की प्रतिमा ‘STATUE OF ONENESS’ नाम दिया गया है। बैठक में महामंडलेश्वर आचार्य अवधेशानंद सहित कई संत रहे उपस्थित रहे। इस दौरान इस पूरे प्रोजेक्ट का प्रेजेंटेशन भी दिखाया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि इस प्रतिमा स्टेच्यू ऑफ वननेस की स्थापना सहित अन्य कार्यों के लिए पूरी परियोजना बनाने के लिए वास्तुविद सलाहकार की नियुक्ति भी की गई है। ओंकारेश्वर में एक टेंपल टाउन की छवि विकसित होगी। ओंकारेश्वर प्रकल्प के लिए 58.30 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध कर ली गई है।

मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास ‍निगम को मैनेजमेंट और निर्माण एजेंसी के रूप में नियुक्त किया गया है। इस संस्थान के अंतर्गत सात केंद्र (स्कूल) स्थापित किए जा रहे हैं। इस केंद्र का मुख्य द्वार जगन्नाथ पुरी मंदिर के द्वार जैसा बनाया जाएगा।

बाकी का संरक्षण पूर्वी भारत के वास्तु विद एवं कलात्मक शैली के अनुसार बनाया जाएगा। 7 केंद्रों में आचार्य हस्तामलक अद्वैत विज्ञान केंद्र, आचार्य सुरेश्वर अद्वैत सामाजिक विज्ञान केंद्र, आचार्य तोटक अद्वैत संगीत एवं कला केंद्र, महर्षि वेदव्यास अद्वैत ग्रंथालय, आचार्य गौड़पाद अद्वैत विस्तार केंद्र और आचार्य गोविंद भगवत्पाद अद्वैत गुरुकुलम् हैं। इनमें अलग-अलग मठ और पीठ की विभिन्न रूपों में झलक भी देखने को मिलेगी।

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ समय पहले केदारनाथ में भगवान आदि शंकराचार्य की समाधि स्थल पर उनकी मूर्ति का अनावरण किया था। भगवान आदि शंकराचार्य को मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर में उनके गुरु गोविंद भगवत्पाद द्वारा द्वारा सन्यास दिलाया गया था। ओंकारेश्वर में ही आदि शंकराचार्य, शंकर से शंकर भगवत्पाद कहलाए। आदि शंकरचार्य को गुरु गोविंद ने ओंकार में प्रेरित किया कि आप अद्वैत वेदांत दर्शन के माध्यम से पूरे भारत का आध्यात्मिक पुनर्जागरण करें।

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