IIT हैदराबाद का अनोखा गार्ड-रूम, जो गर्मी में भी ठंडा रहेगा, इस तरह पराली की ईंटों से बनाया गया

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IIT Hyderabad Guard Room
India's first bio-brick structure was inaugurated at IIT Hyderabad. A Guard Room of IIT Hyderabad is made by Eco friendly Bio Bricks. These Bio Bricks made by Stubble Parali.

Photo Credits: IIT Hyderabad

Hyderabad: आपको बीते कुछ सालों में देश के कई शहरों, खासकर के दिल्ली के बढ़ते प्रदूषण के बारे में सुना होगा। हरियाणा और पंजाब में किसानों के पराली जलाने के चलते भी प्रदूषण की समस्या पर खबरें देखि होंगी। पराली जलाने (Stubble burning) से वायु प्रदूषण बढ़ जाता है। किसान अपने खेतों में इसे जला देते हैं और समस्या को बढ़ावा दे देते है। अब इसी समस्या का हल IIT हैदराबाद ने खोज निकाला है।

IIT हैदराबाद (Indian Institute of Technology IIT, Hyderabad) ने एक खास इंट तैयार की है, जिसे ‘Bio Brick’ कहा जा रहा है। इस संस्थान के डिज़ाइन विभाग के पीएचडी स्कॉलर प्रियब्रत राउतराय (Priyabrata) और उनके साथी, अविक रॉय (Avik Roy) ने मिलकर खेतों में फसल के बाद बच जाने वाली पराली का इस्तेमाल करके Bio Brick बनाई है, जिसे इमारत बनाने के लिए उपयोग में लाया जा सकता है।

भारत की पहली Bio Bricks वाली बिल्डिंग

मीडिया रिपोर्ट्स बता रही हैं की सितंबर, 2021 में IIT हैदराबाद में Bio Brick से बने एक गार्ड-रूम का उद्घाटन किया गया था। बताया गया की यह भारत की पहली बिल्डिंग है, जो इन खास Bio Brick ईंटों से बनाई गई है। IIT हैदराबाद की तरफ से मीडिया में बताया गया की Bio Brick के जरिये वह पराली (Parali) जलाने की समस्या का समाधान कर सकते हैं। अभी यहाँ पर सस्टेनेबल आर्किटेक्चर पर काम चल रहा हैं।

बता दें की ओडिशा से आने वाले प्रियब्रत और अविक, दोनों ही पेशे से आर्किटेक्ट हैं। प्रियब्रत अभी पीएचडी कर रहे हैं और अविक KIITS स्कूल ऑफ़ आर्किटेक्चर, भुवनेश्वर में शिक्षक के तौर पर काम कर रहे हैं। यह दोनों अपनी अपनी पढाई डिग्री करने के बाद दिल्ली में अलग-अलग जगह पर जॉब कर रहे थे।

ऐसे आया बायो ब्रिक्स बनाने का आईडिया

फिर साल 2011 दोनों ने साथ मिलकर अपना Design firm, R Square Dezign शुरू किया। उन्होंने कई डिजाइनिंग प्रोजेक्ट्स सफलता से पूरे किये। फिर बीते कुछ समय से दिल्ली में बढ़ रहे प्रदूषण पर दोनों का का घ्यान गया।

कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री में बढ़ती ईंट की डिमांड

उन्होंने पाया की एक तरफ पराली की समस्या थी और दूसरी तरफ कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री में बढ़ती ईंट की डिमांड थी। कुछ प्रयोग के बाद दोनों ने इस समस्या का एक हल खोज निकाला और वह Bio Brick के रूप में सामने हैं।

दोनों ने देखा की एक तरफ पराली जलाने के चलते होने वाले वायु प्रदूषण की समस्या थी, तो दूसरी तरफ किसान, जिनके पास पराली के प्रबंधन का कोई जुगाड़ नहीं था। पूरे देश में करीब 140000 ईंटों की भट्ठियां हैं, लेकिन फिर भी घर और बिल्डिंग के निर्माण कार्यों के लिए ईंटों की आपूर्ति पर्याप्त नहीं हो पाती है।

ईंट की यह भट्ठियां बहुत अधिक ऊर्जा लेती हैं और प्रदूषण भी बढ़ाती है। ऐसे में अविक और प्रियब्रत ने विचार किया कि कृषि अपशिष्ट चीज़ों (Farm Waste) का सही उनयोग किया जायें, तो सच्चा रहेगा। उन्होंने साल 2015 से इस पर काम करना शुरू कर दिया था।

उन्होंने अलग-अलग फसलों जैसे गन्ना, गेहूं और चावल आदि के वेस्ट पर रिसर्च करना शुरू किया। फिर प्रियब्रत को 2017 में IIT हैदराबाद में पीएचडी में एडमिशन मिल गया और अविक ने कॉलेज में शिक्षक के तौर पर काम शुरू किया।

उसके बाद लगभग छह सालों की मेहनत के बाद अलग-अलग फसलों के वेस्ट से ईंट बनाने में सफलता मिल गई। उन्होंने अपनी ‘Bio Brick’ को Rural Innovators Start-Up Conclave 2019 में प्रेजेंट किया। जहां उन्हें सस्टेनेबल हाउसिंग केटेगरी में Special Recognition Trophy मिली। फिर दोनों ने अपनी इस खोज और तकनीक पर पेटेंट फाइल कर दिया और अप्रैल 2021 में उन्हें पेटेंट हासिल हो गया।

पराली से यह खास इंट बनाने की विधि

इस पराली की ईंट को बनाने के लिए सीमेंट और चुने को बाइंडर के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। पराली को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा जाता है और फिर इसमें पानी के साथ चुना और सीमेंट मिलाया जाता है। फिर इसे शेप में डालकर 2-3 दिन तक सुखाया जाता है। बस सूखने के बाद ईंट तैयार हो जाती है।

दोनों ने सबसे पहले IIT हैदराबाद के कैंपस में इस बायो इंट से 6 बाइ 6 फ़ीट का एक गार्ड रूम (Guard Room) तैयार है। इसकी दीवारें और छत, दोनों ही बायो ब्रिक से बनी हैं। इस कमरे का स्ट्रक्चर मेटल के फ्रेम से बनाया है। इस गार्ड रूम को बनाने के लिए पहले मेटल का फ्रेम तैयार किया और फिर इसमें मोल्ड लगाकर रॉ मटेरियल से दीवारें बनाई।

मोल्ड को दो दिन बाद हटा दिया गया और इसके बाद 10 दिन तक दीवारों को सूखने के लिए छोड़ दिया। छत के लिए पीवीसी शीट पर बायो ब्रिक लगाई, ताकि यह इंसुलेटर का काम करें। सितंबर 2021 में यह गार्डरूम बन चूका (India’s first bio brick made building) था और उनका प्रयोग सफल रहा।

यह एक फ्रेंडली है और बायो ब्रिक के चलते रूम के कमरे के अंदर का तापमान बाहर के तापमान से लगभग 6 डिग्री कम रहता है। क्योंकि यह मटेरियल इंसुलेटर की तरह कार्य करता है। यह आग प्रतिरोधी क्षमता भी रखता है। अब किसानों के लिए एक अन्न साधन से भी हो आमदनी हो सकती है। अगर किसानों को पराली के प्रबंधन का सही रास्ता दिया जाये तो कोई भी पराली नहीं जलाएगा, जिससे वायु प्रदूषण नहीं होगा।

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