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Orchha: भारत को सोने की चिड़ियाँ कहा जाता था। पुराने जमाने में भारत एयर भारतियों के पास सोने की कोई कमी नहीं थी। मंदिरों में भी अपार सोना चढ़ाया जाता था। फिर बाहरी सुल्तानों के आने और उनकी करतूतों की वजह से लोग अपना और मंदिरों का सोना ज़मीन में गाड़ कर छुपाने लगे। कई टन सोना चंडी और मूर्तियां नदियों में प्रवाहित कर दी गई और ज़मीं में गाड़ दी गई।
ऐसे में आज भी पूरे देश में जगह जगह खुदाई में सोना और खज़ाना निकलता रहता है। प्राचीन समय में मध्यप्रदेश भो बहुत धनवान रहा था। यहाँ भी दुनिया के सबसे बड़े और धनवान राजा हुए, जैसे रहा विक्रमादित्य और राजा भोज। चंदेल, कलचुरी और गोंड राजा भी मध्य प्रदेश की शान रहे हैं।
MP के पन्ना में ज़मीन हीरे उगलने वाली मानी जाती है। अब मध्य प्रदेश का एक जिला ऐसा है, जिसकी धरती पुराने सिक्के उगल रही है। यह खबर टीकमगढ़ से आ रही है। जहां हाल ही में 100 से अधिक पुराने और दुर्लभ सिक्के (Antique Coins) निकल गए हैं। आये दिन और भी प्राचीन सिक्के निकलते रहते हैं।

फिलहाल तो मध्यप्रदेश पुरातत्व विभाग ने निकले सिक्कों (Old Coins Found) को एकत्रित करके कब्जे में ले लिया है और इनका परीक्षण किया जा रहा है। लोकल लेवल पर बताया गया है की ये सिक्के मुगल काल के हैं। कुछ सिक्के चांदी (Silver Coins) के भी पाए गए हैं।
जानकारी तो ये भी मिली है कि, खदान पर मजदूरों के अलावा आसपास के लोग भी आकर खुदाई करने लगे हैं, ताकि जमीन से निकलने वाले सिक्के उन्हें हासिल हो जाएँ और उन्हें महंगे दाम पर बेच सकें। इसी लालच में लोग यहाँ आकर खुदाई करके की कोशिश करते हैं।
आपको बता दें कि, टीकमगढ़ जिले में एक पत्थर की खदान में काम चल रहा था। खुदाई के वक़्त मजदूरों को रेत में दबे एक बर्तन में मुगल काल के कुल 164 सिक्के दिखाई दे गए। इस संबंध में जिला खनन अधिकारी प्रशांत तिवारी ने बताया कि, पत्थर खनन से जुड़े एक निजी ठेकेदार ने उन्हें सिक्कों के पाए जाने की सूचना दी थी।
मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के जिला मुख्यालय से लगभग 55 किलोमीटर दूर नंदनवारा गांव (Nandanwara Village) में यह घटना प्रकाश में आई। खनन अधिकारी में पत्रकारों को बताया की, कुल 164 सिक्कों में चांदी के 12 और बाकि तांबे पाए गए हैं। जिन पर उर्दू या फारसी में नक्काशी की गई है। अब यह सिक्के सुरक्षित करके जिले के कोषागार में जमा करा दिए गए हैं।
अफसर ने बताया कि, पुरातत्व विभाग की एक टीम सिक्कों की जाँच कर रही है। अभी सिक्कों के सही सही काल का पता लगाने के लिए उन पर उखेरी गई भाषा की जाँच की जा रही है। तभी सिक्कों के बारे में सही जानकारी दी जाएगी।
आपको बता दें की निवाड़ी जिले में ओरछा स्थान पहले से ही फेमस है और यहाँ का राम राजा मंदिर प्रसिद्ध स्पॉट है। यह नंदनवारा गांव से 45 किमी दूर स्थित है। निवाड़ी जिले को 2018 में टीकमगढ़ (Tikamgarh) से अलग कर बनाया गया था। एक वक़्त यहाँ ओरछा के राजा का राज रहा और फिर मुगलों के आक्रमण कर यहाँ राज किया। समय समय पर यहाँ ज़मीन से मिटटी के बर्तन और टूटी मूर्तियां मुलती रहती हैं।



