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Bhopal: गाय के गोबर को लेकर अलग अलग खबरें आती ही रहती है। कभी गोबर घर लीपने के काम आता है, तो कभी गाय के गोबर की बनी ईंटों से घर बनाया जाता है। वैसे गाय के गोबर के कण्डों से खाना भी पकाया जाता है, जो बहुत स्वादिष्ट होता है।
भारत के प्राचीन ग्रंथो और हिन्दू धर्म में गाये के सूत्र के अलावा गोबर की भी अहमियत और उपयोगिता (Cow Dung uses and Benefits) का वर्णन है। पहले विदेशी लोग भारतियों को पुराने रीती रिवाज़ो वाला देश कहते थे। परन्तु अब विदेश में खोजकर्ता और वैज्ञानिक इन्ही भारतीय प्राचीन तकनीकों को अपनाकर नई नई खोज करने में लगे हुए है।
अब ब्रिटेन (Britain) में गाय का गोबर इस वक्त सुर्ख़ियों में है। ब्रिटिश किसानों (British Farmers) ने गाय के गोबर से बिजली (Cow poo can produce electricity) बनाने का तरीका खोज लिया है। वहां के किसानों के एक समूह के अनुसार उन्होंने गाय के गोबर से ऐसा पाउडर (Cow Dung Powder) तैयार किया गया है, जिससे बैटरियां बनाई गई हैं।

विदेशी मीडिया की रिपोर्ट में यह बताया गया है की गाय के एक किलोग्राम गोबर से किसानों ने इतनी बिजली बना ली, कि 5 घंटे तक वैक्यूम क्लीनर चलाया जा सकता है। ब्रिटेन की आर्ला डेयरी के लोगो ने गोबर का पाउडर बनाकर उसकी बैटरियां बना दी, इन बैटरियों को काउ पैटरीज़ (Cow Patteries) नाम दिया गया है।
इन पैटरीज़ (Patteries) का साइज AA Size रखा गया है। हैरानी की बात यह है की इन पैटरीज़ से साढ़े 3 घंटे तक आप अपने प्रेस से कपड़े में इस्त्री कर सकते हैं। इससे मोबाइल चार्ज करने से लेकर अन्न बिजली वाले काम भी आसानी से किये जा सकते हैं।
खबर है की Britaish Daily Co-Operative Arla की ओर से ये बैटरी बनाई जा रही है। ऐसा दावा किया जा रहा है कि एक गाय के गोर से 3 घरों को साल भर बिजली मुहैया करवाई जा सकती है। एक किलोग्राम गोबर के ज़रिये 3.75 किलोवाट बिजली (Cow dung Electricity) पैदा की जा सकती है।
Princy Mthombeni pointed out that 600 million people in Africa don't have access to electricity. She spoke of the need for massive amounts of clean energy to help improve the lives and health of people still relying on coal, or things like cow dung, paraffin, and candles. pic.twitter.com/iJ2ACHyW5Y
— Iida Ruishalme (@Thoughtscapism) November 14, 2021
मीडिया रिपोर्ट्स में ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है की यदि 460000 गायों के गोबर से बिजली तैयार की जाये, तो 12 लाख ब्रिटिश घरों में बिजली सप्लाई की जा सकेगी। डेयरी में साल भर में 1 मिलियन टन गोबर निकलता, जिससे बिजली बड़े लेवल पर बनाई जा सकती है।
इस डेयरी में सभी उपयोगी चीज़ों के लिए गोबर से बनी बिजली का ही उपयोग किया जाता है। इससे निकले वेस्ट को खाद के रूप में उपयोग में लाया जाता हैं। बिजली बनाने की इस प्रोसेस को एनएरोबिक डाइजेशन (Anaerobic digestion) कहा जाता है, जिसमें जानवरों के वेस्ट से इलेक्ट्रिसिटी तैयार की जाती हैं। इसमें गोबर को सुखाकर पाउडर तैयार किया जाता है और उसे ऊर्जा में बदल दिया जाता है।



