
Photo Credits: Twitter
Nalanda: IIT से पासआउट पूजा भारती (Pooja Bharati) की बड़ी सरकारी कंपनी GAIL (Gas Authority Of India Limited) में शानदार नौकरी कर रहीं थीं। लेकिन जब कभी उन्हें अपने गांव की याद आती, उनका मन उदास हो जाता। मूलरूप से नालंदा (Nalanda) जिले के बिहारशरीफ (Bihar Sharif) की निवासी पूजा भारती एक होनहार विद्यार्थि थीं।
2005 में उन्होंने IIT की प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण की और 2009 में केमिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की पढ़ाई पूरी होते ही उनकी नौकरी GAIL में लग गई। पूजा का गांव में उनका बड़ा घर था। खेत थे, बाग-बगीचे थे। शहर की नौकरी में उन्हें धनराशि तो मिली लेकिन सुकून नहीं।
यही कारण था कि नौकरी में रहते हुए उन्हें जब भी कुदरत के करीब जाने का अवसर मिलता, वो गांव जातीं। IIT में पूजा के बैचमेट रहे मनीष (Manish) ने पास आउट होने के बाद नौकरी करने की जगह बिहार लौटकर कृषी से जुड़ा स्टार्टअप शुरू किया।
पूजा बताती हैं की मैं और मनीष खेती किसानी को लेकर बातें करते थे। मुझे ये महसूस हुआ कि कृषि क्षेत्र में ऐसे लोगों की आवश्यकता है, जो सोच-समझकर खेती करते हों, क्योंकि अक्षर खेती से ज्यादातर वो ही लोग जुड़े हैं, जिनके पास नौकरी या अपना कोई व्यपार नहीं होता है। कोई और विकल्प ना होने की वजह से वे खेती करते हैं।मेने वर्ष 2015 में जॉब छोड़ी और उसके बाद अगले एक वर्ष तक जैविक खेती के विषय में सीखा।
क्या है बैक टु विलेज मॉडल
उन्होंने कंपनी बैक टु विलेज की स्थापना की जो की गांवों में उन्नत कृषि केंद्र चला रही है। अभी ओडिशा (Odisha) में उनके दस केंद्र चल रहे हैं। पूजा बताती हैं कि हम गांव के प्रगतिशील किसान को प्रशिक्षण देते हैं और वहां एक छोटा सा दफ्तर और लगभग दो एकड़ का फार्म शुरू करते हैं। हम अपने फार्म में जेवीक तरीके से वही फसलें उगाते हैं, जो आमतौर पर वहां के किसान उगाते हैं।
Co-founder Puja Bharti visiting nursery of Palmarosa in Mayurbhanj. Tribal farmers r going to cultivate Palmarosa in approx 100 Acres with help of B2V & SOOVA under contract farming. Trenches are being made to prevent water logging.#ଗାଁ_କୁ_ଅଗ୍ରସର #चलें_गाँव_की_ओर #BackToVillage pic.twitter.com/IQGHiAP6ne
— Back to Village (@B2V_Org) September 1, 2018
पूजा का कहना है कि बाजार में जीविक उत्पादों के दाम ज्यादा होने की एक कारण ये भी है कि इनकी मांग ज्यादा है और सप्लाई कम है। वो कहते हैं, इलीट क्लास ऑर्गेनिक प्रोडक्ट की मांग करती है। इसी कारण से दाम अधिक है। जीविक खेती करने वाले किसानों के उत्पाद हाट में आधे घंटे में बिक जाते हैं, जबकि बाकी किसानों को चार-पांच घंटे लगते हैं।
Co-founder Puja Bharti imparting training to farmers of Deoghar (Jharkhand) on Natural/Organic Farming….#NaturalFarming #OrganicFarming #BackToVillage pic.twitter.com/iOmiXVETh9
— Back to Village (@B2V_Org) September 1, 2018
पूजा कहती हैं की मैं बिल्कुल स्पष्ट थी कि खेती (Farming) में इतनी आमदनी नहीं होगी। परन्तु यहां मैंने जो कमाया है, उसे केवल पैसों में नहीं गिना जा सकता। यहां मन की प्रसन्नता बहुत है, स्वास्थ्य बेहतर है, तनाव नहीं है। मेरी असली कमाई यही है। मुझे अच्छा भोजन मिल रहा है, अच्छी हवा, अच्छा पानी और मन की शांति मिल रही है। मैं बीमारियों से दूर हूं।
Group photo of Team B2V with Shri Kiran D. M. (CEO, ONGC Foundation), Dhokra artisans & tribal cultural performers after the launch of CSR Project on Dhokra Craft in Odisha.#BackToVillage #RuralEmployment #Handicraft #CSR pic.twitter.com/q7xK1v1NNw
— Back to Village (@B2V_Org) October 23, 2021
अब क्षेत्र में पूजा को लोग जानते है और उनका बहुत मान सम्मान भी है। वे अन्न किसानों को किसानी के टिप्स दे रही है। प्रदेश की सरकार ने भी उनके काम की सराहना की है। मीडिया और अखबारों में उनके बारे में खबरे भी आई है, जिससे आस पास के अन्न क्षेत्रों के लोग भी उनसे प्रेरणा ले रहे है।



