दो दोस्तों की अनोखी पहल, पराली वाले प्रदूषण का समाधान निकाला, मिला 10 करोड़ का पुरुस्कार

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Vidyut Mohan Parali Fire
Earthshot prize winner recognised for innovative effort to tackle northern India’s smog crisis. India’s Vidyut Mohan and Kevin Kung works on Parali Fire problem Solution.

Delhi: भारत की राजधानी दिल्ली सर्दियों में वायु प्रदूषण की समस्या से गुजरती है। राज्य की हालत समय के साथ साथ खराब से खराब होती जा रही है। जिसके लिये राज्य सरकार केवल दिवाली के पटाखों (Fire Crackers) को नियंत्रित कर रही है, जो की दिल्ली में फैलने वाले वायु प्रदूषण का केवल दो प्रतिशत के आसपास है और थोडा बहुत वाहनों पर रोक थाम कर रही है।

जबकि प्रदूषण की मुख्य वजह फैक्ट्रियों के धुयें और पराली को आग लगाने के कारण है। आज हम आपको दो एसे वैज्ञानिकों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने पराली से उत्पाद निर्माण की तकनीक इजाद की है। सर्दियों के प्रारंभ के साथ ही राजधानी दिल्ली में वायु की गुणवत्ता बेकार होने लगती है।

इस वजह से लोगों का अपने घरों से बाहर निकल पाना मुश्किल हो जाता है। इसका मुख्य कारण दिल्ली और पड़ोसी राज्यों में धान की फसल कटने के पश्चात पराली को आग लगा देना है। वहीं अब दो युवा वैज्ञानिकों ने पराली जलाऐ जाने से होने वाले प्रदूषण से निपटने के लिए बड़ी उपलब्धि प्राप्त की है।

प्रिंस विलियम ने किया सम्मानित

युवा वैज्ञानिक (Young Scientist) विद्युत मोहन (Vidhyut Mohan) और उनके साथी केविन कुंग (Kevin Kung) ने इसका एक बायोटेक समाधान निकाला है। वहीं इसके लिए दोनों को इस वर्ष का अर्थशॉट प्राइज (Earthshot Prize) भी दिया गया है।

बता दें कि ब्रिटेन के युवराज प्रिंस विलियम (Prince William) और उनकी पत्नी ने रविवार को इन दोनों युवा वैज्ञानिकों को तकरीबन 10 करोड़ रुपए पुरस्कार से सम्मानित किया है। दावा किया जा रहा है कि मोहन और कुंग द्वारा सुझाए गए समाधान से दिल्ली को हानिकारक धुंध से निजात मिलने के साथ जलवायु मे बदलाव की परेशानी के समाधान में भी सहायता मिलेगी।

जानकारी के लिए बता दें कि मोहन और कुंग ने मिलकर ‘तकचर’ (Takachar) नाम से मिशन को प्रारंभ किया है। इस मिशन का लक्ष्य पराली को उपयोगी उत्पादों में परिवर्तित करना है। इसके चलते दोनों वैज्ञानिक पिछले 3 वर्श से भारत, केन्या और अमेरिका में अपने पायलट प्रोजेक्ट का परीक्षण कर रहे हैं।

इन वैज्ञानिकों का कहना है कि दुनिया में हर वर्ष तकरीबन 120 अरब डॉलर की पराली निकलती हैं, जिसे जला दिया जाता है।Earthshot Prize की वेबसाइट के अनुसार अगर इस तकनीक का उपयोग किया जाए, तो पूरे विश्व से हर वर्ष एक अरब टन कार्बन उत्सर्जन को कम किया जा सकता है।

यह भारतीय किसानों के लिए वरदान के रूप में सामने आएगा और साथ ही प्रकृति के लिए भी एक वरदान सिद्ध होगा। बताया जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में इस तकनीक का परीक्षण जमीनी स्तर पर हरियाणा के रोहतक जिले में किया जाएगा।

पराली जलाने की समस्या का असल कारण

बता दें की खरीफ की प्रमुख फसल धान की कटाई अक्टूबर से शुरू होती हैं। धान फसल की कटाई के बाद खेतों में इसके ठूंठ रह जाते हैं, जिसे किसान जलाते हैं। उत्तर भारत में पराली जलाना (Parali Fire) लंबे समय से वायु प्रदूषण का एक प्रमुख कारण रहा है, जबकि केंद्र सरकार ने पिछले चार वर्षों में इस मुद्दे को हल करने के लिए 2,245.17 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।

पराली जलाने (Stubble Burning) की समस्या से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष में 2021-22 में पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश को 491 करोड़ रुपये जारी किए। इसमें से 235 करोड़ रुपये पंजाब को, 141 करोड़ रुपये हरियाणा को और 115 करोड़ रुपये उत्तर प्रदेश को जारी किए गए हैं।

राजधानी दिल्ली में स्मॉग की समस्या के लिए हरियाणा एवं पंजाब (Haryana And Punjab) में धान की फसल की कटाई के बाद जलाई जाने वाली पराली (Parali) को जिम्मेवार माना गया है। इस पर जमकर सियासत भी हो रही है और किसान इसे परेशानी मजबूरी बताते हैं।

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