खैराना के किसान सुरेश राणा की जबरदस्त तकनीक, PM मोदी को भी पसंद आई उनकी खेती की स्टाइल

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Farmer Suresh Singh Rana
Farmer Suresh Singh Rana from Khairana is innovative farmer doing successful farming and earning money. He earns well from farming.

Kairana: भारत कृषि प्रधान देश है, जो भी भारत की मिट्टी को एक बार चूम लेता है और अपने माथे में लगा लेता है, फिर उसका कही भी बसने का मन नही करता। खेती कर आज गांव के लोग भी मालामाल हो रहे है। अपनी नई नई तकनीक से खेती (Farming) कर सबको आकर्षित कर रहे है।

भारत में कृषि में 1960 के दशक के मध्य तक पारंपरिक बीजों का इस्तेमाल किया जाता था, जिनकी उपज अपेक्षाकृत ज्यादा नही थी। उन्हें सिंचाई की ज्यादा जरूरत नही पड़ती थी। किसान उर्वरकों के रूप में गाय के गोबर आदि का इस्तेमाल करते थे।

1960 के बाद उच्च उपज बीज (HYV) का इस्तेमाल शुरू हुआ। इससे सिंचाई और रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का प्रयोग में बढ़ोतरी हो गई। इस कृषि में सिंचाई की जरूरत पड़ने लगी। इसके साथ ही गेहूँ और चावल के उत्पादन में काफी बढ़ोतरी हुई, जिसके कारण इसे हरित क्रांति नाम से भी पहचाना जाता है।

अपने कार्य के क्षेत्र में विभिन्न विभिन्न प्रकार के प्रयासों से इंसान सफलता के नए रास्ते खोल लेते हैं और सफलता (Success) की उन बुलंदियों को छूने लगते हैं कि देश के बेड़े बेड़े शख्सियत द्वारा उनकी प्रसंसा होने लगती है। आज हम खैराना गांव के सुरेश सिंह राणा के विषय में बात कर रहे है।

जिन्होंने मक्के की खेती ना सिर्फ आमदनी को बढ़ाया है, बल्कि वह भूजल स्तर को बढ़ाने में भी अग्रसर रहे हैं। खैराना (Khairana) गांव के रहने वाले सुरेश सिंह राणा (Suresh Singh Rana) वर्षो से खेती कर अपने परिवार का पेट पाला करते आ रहे हैं।

वह बताते हैं कि चैनी धान की फसल भूजल स्तर के साथ फसल को बीमारियां लगा रही थी। हानी अधिक हुई, तो काशीपुर के वैज्ञानिकों ने फसल चक्र के विषय में जानकारी दी। जिसके बाद उन्होंने धान की जगह मक्का बोना शुरू किया।

आधे लागत में मक्का बोई और लाभ भी दिखने लगा। आमदनी भी अधिक हुई और मक्का के बचे हुए अवशेष से खेतों को खाद मिल गई। इससे मुख्य रूप से बाद में धान की फसल भी बीमारी रहित हुई। साथ ही भूजल स्तर भी साधारण बना रहा।

इन प्रयासों के लिए पीएम मोदी (PM Modi) ने सुरेश राणा से वर्चुअली बात की और उनकी प्रसंसा की। सुरेश राणा ने पीएम से बातचीत के दौरान काशीपुर पंतनगर (Kashipur Pantnagar) के कृषि वैज्ञानिकों का भी धन्यवाद किया है। साथ ही बताया कि उनके गांव में लघु किसानों ने माधव किसान समूह बना रखा है। हर एक किसानों को कृषि विभाग की ओर से 3 लाख रुपये के कृषि यंत्र दिए गए हैं।

बता दें कि लगभग 10 एकड़ भूमि में सुरेश सिंह राणा धान, मटर, मक्का व गेहूं की पैदावार करते हैं। इसके सिवाय खाद हेतु उन्होंने देसी गाय पाल रखी हैं। वह घर में उपयोग करने वाली सब्जियां को जीविक तरीके से पैदावार करते हैं। उनकी तीन बेटियां हैं। जिसमें एक बेटी न्याय विभाग में और दूसरी बेटी शिक्षा विभाग में सेवा दे रही है। तीसरी बेटी अभी एमएससी कर रही है।

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