
Photo Credits: Pixabay
Delhi: भारत मे भगवान गणेश के करोड़ो भक्त है और हर साल धूम धाम से गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। भारत की जनता अपने घरों में छोटे छोटे गणेश मूर्ति स्थापित करते हैं और 7 दिनों। तक पूजा करने उन्हें विदा करते है यह कहके की अगले बरस तू जल्दी आ।
ऐसे तो भारत मे गणेश भगवान (Bhagwan Ganesh) के बहुत मंदिर है और उनकी महिमा अपरंपार है। परंतु एक गणेश मूर्ति (Ganesh Statue) देश के बाहर एक मुस्लिम देश मे भी स्थापित है और उसे वहां का रक्षक कहा जाता है। जी हां, यह बात जानकर आपको हैरानी हो रही होगी।
इस देश में एक धधकते ज्वालामुखी (Volcano) के सबसे ऊपर के टॉप पर 700 सालों से गणेश पूजा की जा रही है और वे यहां रक्षक हैं। इंडोनेशिया (Indonesia) में ज्वालामुखी की तादात बहुत ज्यादा है। यहां कुल 141 ज्वालामुखी हैं, जिनमें से 130 अब भी सक्रिय अवस्था मे हैं।
आपको बता दें की इन 130 ज्वालामुखीयो में हमेशा समय समय पर विस्फोट होता रहता है और गरम लावा निकलता रहता है। इन्हीं में से एक है ज्वालामुखी माउंट ब्रोमो (Mount Bromo) है। दुनिया के सबसे सक्रिय ज्वालामुखियों (active volcanoes) में से एक होने के चलते इंडोनेशिया (Indonesia) जाने वाले टूरिस्ट के लिए इसके बहुत से हिस्सों तक जाने की पाबंदी है।
इस ज्वालामुखी के एक खतरनाक हिस्से पर एक भगवान गणेश जी की प्रतिमा स्थापित है। इसके बावजूत लोगों को इसके इस गणेश मंदिर (Ganesha temple) तक जाने से कोई रोक नहीं पाता है। पुराने लोग बताते है कि उनका मानना है की भगवान गणेश जी (Lord Ganesha Ji) की पूजा के चलते ही अब तक वहां के लोग सुरक्षित हैं।
आपको बता दें कि माउंट ब्रोमो (Mount Bromo) का मतलब लोकल भाषा जावानीज में ब्रह्मा (Brahma) से जोड़ा जाता है। परंतु यहां पर मंदिर गणेश है। स्थानीय लोग बताते हैं कि ये गणेश मूर्ति 700 सालों से वहां पर स्थापित है, जो उनके पूर्वजों ने स्थापित की थी। यहां की मान्यता है कि इस गणेश मूर्ति की वजह से ही अब तक जलते हुए ज्लावामुखी (Active Volcano) के पास होने के बाद भी उनकी रक्षा हो रही है।
यही वजह है कि यहां के पूर्व में बसा एक जनजातीय समूह, जिसे ‘Tenggerese’ नाम से जाना जाता है। यह लोग कई सदियों से गणेश जी की पूजा करते आ रहे है। यहां पर इस गणेश मंदिर को ‘Pura Luhur Poten’ के नाम से जाना जाता है। यहां पर गणेश जी की अलग-अलग तरह की मूर्तियां हैं और सभी मूर्तियां ज्वालामुखी के जमे हुए लावे से बनी हुई हैं। इस कारण यह मुर्तिया अनमोल हैं।
माउंट ब्रोमो के आसपास बने 30 गांवों में इस जनजाति (Tribe) के करीब 1 लाख लोग निवास करते हैं। आपको बता दें कि यह के गाँव वाले खुद को हिंदू (Hindu) मानते हैं और हिंदू रीति-रिवाज से जीवन जीते है। यहां के लोग त्रिमूर्ति (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) की पूजा (Pujan) किया करते है।
Lord Ganesha at The Edge of Mount Bromo Volcano Crater Protecting Citizens In Indonesia pic.twitter.com/uu0vM42IHl
— sanatanpath (@sanatanpath) September 13, 2021
इन सभी पूजा में ‘Tenggerese’ की पूजा का काफी महत्व है। वे हर साल 14 दिनों के लिए माउंट ब्रोमो के मुहाने पर बने गणेश मंदिर में भगवान गणेश की पूजा (God Ganesh Puja) करते हैं। इस पूजा को ‘Yadnya Kasada’ पर्व के नाम से स्थानीय लोग जानते हैं। माना जाता है कि 13वीं से 14 सदी के बीच इस पूजा का आरंभ हुआ था।
इसके पीछे भी एक लोककथा है, जिसके अनुसार भगवान ने वहां के राज-रानी जो सालों तक निःसंतान थे, उन्हें 14 संतानें दीं, इस शर्त पर कि 25वीं और आखिरी संतान को वे पहाड़ को अर्पित कर देंगे। इसके बाद से हर साल पूजा और पशु बलि का रिवाज चालू हो गया। अब भी यहां बकरियों की बलि दी जाती है। इसका उत्सव मनाया जाता है।
इंडोनेशिया के रखवाले है गणेश जी।
Lord Ganesha at The Edge of Mount Bromo Volcano Crater Protecting Citizens In Indonesia#Ganesha pic.twitter.com/BVDyVefgMP— sanatanpath (@sanatanpath) September 13, 2021
एक रिवाज के अनुसार ज्वालामुखी के अंदर इस बलि के साथ फल-फूल और सब्जियां भी अर्पित की जाती हैं। मान्यता है कि गणेश जी की पूजा और धधकते ज्वालामुखी को फल अर्पित करना ही उसमें विस्फोट को रोकता है। माना जाता है कि यदि ऐसा नही किया गया, तो ये समुदाय ज्वालामुखी के कहर से जलकर खत्म हो जाएगा।
यहां रहने वाली जनजाति का एक अपना कैलेंडर है। इसी के मुताबिक हर वर्ष तय समय पर 14 दिनों की पूजा होती की जाती हैं। इस 14 दिनों की पूजा के त्योहार को ‘Eksotika Bromo Festival’ कहा जाता है। इस त्योहार के दौरान पहाड़ पर बड़ा मेला लगता है और यह त्योहार, विदेशी सैलानियों को भी आकर्षित करता है।
#JaiGanesh Bhagwan Ganesha at The Edge of Mount Bromo Volcano Crater Protecting Citizens In Indonesia pic.twitter.com/aaOk9lnVzf
— sanatanpath (@sanatanpath) September 13, 2021
यहां पर पूजा के कई तरीके हिंदुओं से मिलते-जुलते हैं। जैसे हमारे यहां के मंदिर की पुजारी की तरह ही यहां भी पुजारी होते हैं, जिन्हें ‘Resi Pujangga’ कहा जाता है। ये विधि-विधान पूरा करने में लोगों की मदद करते हैं। आगे चलकर पुजारी का बेटा ही पुजारी बनता है। इंडोनेशिया (Indonesia) में हिंदुओं की संख्या बहुत ज्यादा है और यहां भी मंदिरों की कमी नहीं है। यही कारण है की भारत से भी अधिकतर लोग इंडोनेशिया में घूमने जाते है। भारतियों के लिए वहां अनुकूल वातावरण है।



