
Ujjain: प्राचीन भारत की एक प्राचीन नगरी उज्जैन भी है और भगवान् महादेव यहाँ महाकाल (Mahakal) नाम से विराजे है। महाकाल मंदिर क्षेत्र और आस पास इतिहास की प्राचीनता अभी भी दबी हुई है। हाल ही में बीते महीने महाकाल मंदिर के पास खुदाई के दौरान विशाल जलाधारी शिवलिंग (Big Jaladhari Shivling Found In Ujjain) निकला है, जिसकी खूबसूरती देखकर सभी देखने वाले मोहित है।
आपको बता दें की 20-22 फुट की गहराई में पहले परमार कालीन शिव परिवार की मूर्तियां निकली और फिर एक प्राचीन मंदिर का चबूतरा और दीवार (Ancient Temple and Wall Found) भी निकला है। इसके अलावा अन्य मूर्तियां भी मिली। इन सबके बाद हाल ही में कुछ दिनों पहले विशाल शिवलिंग भी दिखाई दे गया।
इस बड़े शिवलिंग पर अभी भी रहस्य बना हुआ है। जब पुरातत्व अधिकारियों की टीम मंदिर और प्राप्त अवशेषों की जाँच करेंगी, तब जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। फिलहाल जिला प्रशासन व पुरातत्व आधिकारियों के निर्देश अनुसार शिवलिंग को चद्दर(पतरे) से ढकवा दिया था, जिससे शिवलिंग सुरक्षित रहे।
वह मंदिर शुंग काल में भी स्थापित था
मंदिर के विस्तारीकरण को लेकर चल रहे खुदाई कार्य में पिछले वर्ष भी हवन कुंड, चूल्हा व अन्य सामान के साथ मंदिर की मूर्तियां निकली थी, जिसके बाद इस वर्ष दोबारा मूर्तियां निकलना चमत्कार है। उस समय आई जांच टीम ने बताया था कि मंदिर में मिले अवशेषों से यह साफ़ पता चलता है कि वह मंदिर शुंग काल में भी स्थापित था।
परिसर के दक्षिण में शुंग काल की दीवार और उत्तर में परमार काल की मूर्तियां मिली, जो की 11वीं, 12वीं शताब्दी की है। अन्न प्राप्त चीज़ों में स्तम्भ खंड, शिखर के भांग, रथ का भांग और कुछ मिटटी के बर्तन शामिल है। इस सबसे यह स्पष्ट हुआ की यह मंदिर की शुंग काल (Shunga Dynasty) बनाया है था।
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पुरातत्वीय अधिकारी ने हिंदी अख़बार को बताया था कि मंदिर के उत्तरी भाग में 11वीं-12वीं शताब्दी का मंदिर नीचे दबा हुआ है और दक्षिण की तरफ चार मीटर नीचे एक दीवार मिली है, जो लगभग 2100 साल पुरानी हो सकती है।
महाकाल मंदिर क्षेत्र में खुदाई के दौरान नरकंकाल भी निकले
अधिकारियों ने पत्रिका को बताया की दिल्ली से आये मुस्लिम आक्रमणकारी इल्तुमिश द्वारा मंदिर पर आक्रमण किया गया और मंदिर को ध्वस्त किया गया था। आपको बता दें की 2016 सिंहस्थ मेले के पहले महाकाल मंदिर क्षेत्र में खुदाई के दौरान नरकंकाल भी निकले थे, जिसकी जांच अभी जारी है। वह नरकंकाल उस समय आक्रमण के दौरान मारे गए लोगो और पंडित के हो सकते है।
जलाधारी शिवलिंग 9वीं से 10वीं शताब्दी का
अधिकारियों के मुताबिक जलाधारी शिवलिंग 9वीं से 10वीं शताब्दी के समय का है। विष्णु की मूर्ति भी 10वीं शताब्दी की है। मंदिर परिसर में पहले मिले परमारकालीन मंदिर (Parmar Dynasty Temple) से यह शिवलिंग अलग है, क्योंकि परमारकालीन मंदिर 11वीं शताब्दी का है। महाकाल मंदिर परिसर और आस पास खुदाई के समय बीते मई माह में 11वी शताब्दी का परमारकालीन मंदिर का ढांचा प्राप्त हुआ था। उस मंदिर का पूरा स्ट्रक्चर एकदम क्लियर देख रहा था।
उज्जैन में महाकाल मंदिर के पास, खुदाई के दौरान 5वीं शताब्दी(1700 साल)पुरानी ईटें, 9वीं शताब्दी की विष्णु मूर्ति व 11वीं शताब्दी का जलाधारी शिवलिंग मिला है। नीचे पूरा शहर हों सकता है।
Near Mahakal temple in Ujjain, during excavation,11th century Jaldhari Shivling have been found pic.twitter.com/C27cLNmq9B
— sanatanpath (@sanatanpath) September 3, 2021
आपको बता दें की इस्सके पहले 30 मई को महाकाल मंदिर के पास खुदाई (Digging near Mahakal Temple Ujjain) के दौरान माता की प्रतिमा और स्थापत्य खंड के अवशेष मिले थे। माता की प्रतिमा और स्थापत्य खंड के अवशेष मिलने की सूचना जैसे ही संस्कृति विभाग को लगी, उन्होंने तत्काल पुरातत्व विभाग, भोपाल की चार सदस्यीय एक टीम महाकाल मंदिर के लिए भेज दी थी।



