
Kolhapur: आपदा के दौरान लोगों की सैलरी कटी, नौकरियां गई, काम धंधा बंद हो गया, कई तो दो वक्त की रोटी के लिए भी तरस गये। लेकिन इसी दौरान कुछ ऐसी सच्ची और प्रेरणा से भरी कहानियां भी सुनने को मिली जिसने लोगों को हिम्मत दी फिर से खड़े होने के लिए हौसला दिया।
ऐसी ही एक कहानी (Story) जो सबसे अलग है, कोल्हापुर की रहने वाली Amruta Karande की। उनके पिता ऑटो ड्राइवर हैं। आपदा के दौरान ही अमरुता की जॉब लगी। आपदा में तो लोगो को सेलरी मिल पाना भी सम्भव नही दिख रहा था वही हैरत कर देने वाली बात यह है कि अमरुता का सालाना पैकेज 41 लाख रुपये है।
कौन है अमरुता (Who is Amruta Karande)
मीडिया के अनुसार, उनकी उम्र केवल 21 बरस है। अभी वो (Amruta Karande) सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग कोर्स के चौथे वर्ष में पढ़ाई कर रही है। वो कोल्हापुर इंस्टीट्यूट ऑफ टेकनोलॉजी में पढ़ाई कर रही हैं। इसी दौरान उनकी प्री प्लेसमेंट हुई। उन्हें यूएस की सॉफ्टवेयर कंपनी Adobe ने बतौर सॉफ्टवेयर डिवलेपमेंट इंजीनियर (Software Developer Engineer) के तौर पर हायर किया है। जिससे उनके परिवार में खुशी की लहर है।
परिवार ने किया है बहुत संघर्ष
अमरुता के माध्यम वर्गीय परिवार से आती हैं। उनके पिता विजय कुमार ऑटो चलाते हैं। परिवार की परिवारिक स्थिति उतनी अच्छी नही है। फिर भी अपने होसलो से अपने लक्ष्य को पाने के लिए कोशिश करने से कभी हार नही मानी। वो कहती हैं, मेरे माता-पिता ने मुझे पढ़ाने के लिए बहुत संघर्ष (Struggle) किया है। मुझे खुशी है कि मैं उन्हें वो खुशी दे पाई जिसके वेयो खकदर है।
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KIT के चेयरमैन सुनील कुलकर्णी से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि अमरुता का प्रथम बार कोडिंग कंपटीशन में ‘सी’ रैंक आया था। इसके बाद उन्हें ढाई महीने की इंटर्नशिप दी गई। बाद में इसके दौरान ही उनके कई टेस्ट हुए, जिसमें वो सफलता हासिल करती चली गई। इसके बाद उनकी प्लेसमेंट हुई। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पश्चिमी महाराष्ट्र में किसी लड़की को पहली बार इतना हाई पैकेज मिला है।
डॉक्टर बनने का सपना
उनके पिता विजय कुमार ने बताया कि उनकी बेटी पढ़ाई में काफी तेज है। एसएससी में उसके 97 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए थे। वो पहले डॉक्टर बनना चाहती थी, लेकिन बाद में उनका मन सॉफ्टेवयर इंजीनियरिंग की ओर लग गया। उनके परिवार वाले अपनी बेटी की इस सफलता से काफी खुश हैं।



