बनारस की सड़कों पर दौड़ती है इनकी Bike एंबुलेंस, अब तक हजारों को मदद पहुचाने में सफल

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Bike Ambulance Banaras
Bike Ambulance in Banaras UP: Helping People On His 'Bike Ambulance', 23-Year-Old Aman Kabeer Is Varanasi's Messiah. Aman Yadav from banaras is giving Ambulance bike facility.

Banaras: बनारस की सड़कों पर हादसे तो बहुत होते हैं मगर इन्न घायल हुए लोगों को प्राथमिक उपचार देने के लिए अमन यादव अक्सर सबसे पहले पहुंचने वाले व्यक्ति होते हैं। अपनी बाइक एम्बुलेंस (Bike Ambulance) पर फ़र्स्ट एड किट जैसे कई चीजे लेकर चलने वाले अमन अब तक सड़कों पर हजारों घायल लोगों को प्राथमिक उपचार देकर उन्हे अस्पताल पहुंचाने का काम कर चुके हैं।

इतना ही नहीं अमन गुमशुदा लोगों को उनके परिवार वालो तक मिलवाने के साथ लवारिश लाशों के अंतिम संस्कार को करने की भी ज़िम्मेदारी अपने कंधों पर लेकर चलते हैं। अमन बीते कई सालों से वाराणसी की सड़कों पर घायल व जरूरतमंद व्यक्ति की हर दिन सहयता करने से पीछे नही हटते हैं। अमन बीते कई सालों से वाराणसी की सड़कों पर घायल व जरूरतमंद लोगों की बहुत हेल्प कर रहे हैं।

ऐसे हुई शुरुआत

खास बातचीत में अमन (Aman Yadav) ने अपनी इस यात्रा और अपने इस नेक ओर अच्छे काम के बारे में खुलकर बात की है। अमन का बचपन से ही समाजसेवा (Social Worker) की ओर झुकाव ज्यादा था। उन्होने 2007 में एक महिला की गंगा घाट पर जान बचाई थी।

इस घटना को याद करते हुए अमन बताते हैं

वो महिला अपने अकेलेपन से बहुत परेशान थी। अपनी जान देना चाहती थी। उसने बताया कि उसके परिवार के सभी सदस्य विदेश में रहते हैं। इस वजह पनपे अकेलेपन से वो हमेशा परेशान रहती है। मैंने ना सिर्फ उस महिला की जान बचाई।

बल्कि कई दिनों तक उनकी सेवा भी की। यहीं से मुझे ये काम करते रहने की प्रेरणा मिली। अमन बताते हैं कि उस समय वाराणसी (Banaras) के अस्पतालों की हालत काफी दयनीय होती थी। जब एक बार वे अस्पताल परिसर गए तो वहाँ मरीजों की हालत देखकर एकदम से विचलित हो उठे।

अमन कहते हैं

वो स्थिति देखकर मैंने निर्णय ले लिया कि मैं इस तरह से परेशान लोगों के लिए कुछ प्रभावी काम करूंगा। मैंने रोजाना डॉक्टर, अधिकारियों और मंत्रियों को इस संबंध में आए दिन पत्र लिखने शुरू कर दिए। अब लोगों के सुझाव पर अमन अपने साथ प्राथमिक उपचार से संबन्धित कुछ दवाएं लेकर भी चलने लगे।

जिससे सड़क पर घायल व्यक्ति को फौरन प्राथमिक उपचार मुहैया कराया जा सके। अमन इसी के साथ लवारिश लाशों का अंतिम संस्कार भी करते आ रहे हैं। अमन के अनुसार, जिन लोगों का कोई नहीं होता है वो उनका बेटा बनकर वो फर्ज़ अदा करते आ रहे हैं। अब तक अमन बनारस के घाटों पर सैकड़ों लोगों का अंतिम संस्कार कर चुके हैं।

अमन के इस काम को देखते हुए साल 2015 में उन्हे शहर के एक व्यापारी ने उन्हे बाइक (Bike) दे दी थी। जिसके जरिये अमन अब कम समय में लोगों तक मदद लेकर तुरंत पहुँच जाते हैं। अमन की बाइक में प्राथमिक चिकित्सा से जुड़ी दवाएं और मरहम-पट्टी आदि सामान सब मौजूद होता है।

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