
Delhi: कभी किसी भाषण में तो कभी किसी फिल्म में यह सुनने तो मिलता है की अगर किसी चीज़ या मंज़िल को पाने के लिए जी जान लगा दो, तो उसे आपको आपको ने कोई नहीं रोज़ सकता और साडी कायनात भी आपकी मदत करने में जुट जाती है। यह बात आज कितने ही लोगों के जीवन की सच्ची कहानी बन गया है। ऐसे ही एक IAS अधिकारी हैं, अंसार अहमद शेख। जिनके संघर्ष की कहानी (Struggle Story) सुनकर आप हैरान रह जायेंगे।
अंसार अहमद की कहानी उन लोगों को जरूर जाननी चाहिए, जो अपनी कठिन परिस्थितियों और मुश्किलों के आगे हार मान लेते है और प्रयास करना भी छोड़ देते हैं। किसी फिल्मी कहानी की तरह अंसार अहमद ने गरीबी में भूखें रहकर, होटलों में लोगों के जूठे बर्तन साफ किए और पूरी मेहनत से पढ़ाई की और IAS अधिकारी बनकर पूरे देश में अपने परिवार का नाम रौशन किया।
शेख अंसार अहमद (IAS Sheikh Ansar Ahmad) का परिचय
महाराष्ट्र के एक छोटे से गांव शेलगांव में रहने वाले शेख अंसार अहमद (Sheikh Ansar Ahmad) एक बहुत ही गरीब परिवार से नाता रखते थे। शेख अंसार अहमद के पिता अहमद शेख ऑटो चलाकर अपनी गुज़र बसर करते और परिवार पालते थे। अंसार के परिवार में उनके साथ उनकी 2 बहनें और 1 भाई भी रहता था।
इस परिवार का खर्च चलाना काफी मुश्किल था। उनकी मां घर का काम करने के बाद दूसरों के खेतों में काम किया करती थी । एक बार घर के कठिन हालातों और गरीबी को देखते हुए उनके पिता ने उनकी पढ़ाई छुड़वाने का विचार किया। उस वक़्त वो चौथी कक्षा में पढ़ाई कर रहे थे।
अध्यापक ने उनके पिता को पढ़ाई ना रोकने की सलाह दी
अंसार अहमद पढ़ाई में काफी अच्छे थे, तो अंसार अहमद के अध्यापक पुरुषोत्तम पडुलकर ने उनके पिता को पढ़ाई ना रोकने की सलाह दी। एक अख़बार तो अंसार अहमने बताया था कि अगर उनके अध्यापक ना होते तो शायद वो ऑटो चला रहे होते और अफसर नहीं होते। अंसार अहमद के ऑटो ड्राइवर पिता (Auto Driver Father) ने अध्यापक की बात मान ली और उनकी पढ़ाई आगे जारी रही।
Ansar Ahmad Sheikh, the youngest IAS officer of the country will join West Bengal cadre… https://t.co/a3JCjyejLR pic.twitter.com/tN02t118xK
— NewsWallet App (@newswalletapp) August 1, 2016
अंसार जब 10th कक्षा में पहुंचे, तब गर्मियों की छुट्टियों के समय उन्होंने कंप्यूटर सीखने का भी मन बनाया। जिस कंप्यूटर क्लास को वो ज्वॉइन करना चाहते थे, उसकी फीस 2800 रुपए के करीब थी। घर में पैसों की कमी के कारण यह रूपया हासिल करना कठिन था। फीस भरने के लिए अंसार अहमद ने एक होटल में वेटर का काम करना आरम्भ कर दिया।
होटल में लोगों के जूठे बर्तन साफ किये
अब वे सुबह 8 बजे से रात 11 बजे तक वो होटल में लोगों के जूठे बर्तन साफ करते, टेबल साफ करते, पानी भरतेऔ र रात में होटल की फर्श साफ करते थे। जब उन्हें दोपहर में 2 घंटे की छुट्टी मिलती, तो वो खाना खाकर कंप्यूटर क्लास ज्वाइन करने चले जाते।
अंसार अहमद ने अख़बार को बताया था की एक बार वे अपने पिता के साथ बीपीएल योजना से जुड़े काम के लिए सरकारी ऑफिस पहुंचे। ऑफिस में मौजूद अधिकारी ने अहमद के पिता से रिश्वत मांगी थी। जरूरी कार्य करवाने के लिए उनके पिता को अधिकारी को रिश्वत देनी पड़ी।
भ्रष्टाचार को पूरी तरह से समाप्त करने का मन बनाया
उन्होंने जब अपने पिता से पूछा की अधिकारी को सही काम के लिए भी रिश्वत क्यों दी गई, तो उन्होंने कहा कि बिना दिए कुछ नहीं हो सकता है। ऐसे में अंसार अहमद को आभास हुआ कि वो इस भ्रष्टाचार को पूरी तरह से समाप्त कर देंगे। तभी उन्होंने एक बड़ा अधिकारी बनने का मन बना लिया था।
अंसार अहमद जिस कॉलेज में पढ़ाई कर रहे थे, वहां के एक टीचर का सिलेक्शन एमपीएससी में हो गया था। जिनसे प्रभावित होकर उन्होंने उस टीचर से टिप्स लिए। उनके टीचर ने उन्हें UPSC के पैटर्न और परीक्षा से संबंधित जरूरी टिप्स दिए। इसके बाद अंसार अहमद का एमपीएससी में सिलेक्शन नहीं हो पाया था।
खुद काम करके अपनी कमाई से ग्रेजुएशन की पढ़ाई की
इसके बाद अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद तक अंसार अहमद छुट्टियों के समय काम करते थे। इससे जो पैसा कमाते, उससे ग्रेजुएशन की पढ़ाई किया करते थे। ग्रेजुएशन की पढ़ाई के आखिरी 2 सालों में उन्होंने पूरी तरह से यूपीएससी (UPSC) की परीक्षा में पूरी तरह से ध्यान लगाया। पढाई के कारन उन्हें काम छोड़ना पड़ा, तो पैसों की जरूरत को उनके छोटे भाई ने पूरा किया।
उनके छोटे भाई ने 5वीं कक्षा में पढ़ाई छोड़ दी थी। इसके बाद वो धार चलाने के लिए काम में लग गए थे। साल 2015 में पहले ही प्रयास में उन्होंने 361th रैंक हासिल की। अंसार अहमद अपने जीवन में छोटे भाई, माता-पिता और अपने शिक्षकों को अपनी सफलता पर धन्यवाद देते हैं।
अंसार अहमद की तंगहाली का अंदाजा आप इस से भी लगा सकते हैं कि जब वो UPSC में सफल हुए, तो उनके पास दोस्तों को पार्टी देने के पैसे भी नहीं थे। ऐसे में उनके दोस्तों ने उनको मिलकर पार्टी दी थी। अंसार अहमद कि ये सफलता लोगों के लिए बहुत प्रेरणादायक है। जीवन की कठिनाइयों से लड़कर अपनी मंज़िल को पाना भी एक कला है।



