अब भारत ‘पाम तेल’ के लिए दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रहेगा, Palm Oil पर ‘आत्मानिर्भर’ बनेगा

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Palm Oil India Mission
Rs 11,000 crore National Edible Oil Mission-Oil Palm to make India self-sufficient in cooking oils including palm oil will ensure that farmers get all facilities quality seeds technology under the mission.

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Delhi: देश में केवल पेट्रोल के दाम ही नहीं पढ़ रहे है, बल्कि खाने वाले तेल के दाम भी बढ़ रहे हैं और पाम तेल तो और भी महंगा हो गया है। खाद्य तेल पर भारत की आयात निर्भरता लगातार बढ़ रही है, ऐसे में एक कृषि प्रधान देश भारत खाने के तेल के लिए विदेशों पर निर्भर रहे, यह सही नहीं है। इसके लिए हाल ही में भारत सर्कार ने 11000 करोड़ रुपये के राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-पाम तेल (NMEO-OP) की घोषणा की।

इससे भारत को ताड़ के तेल (Palm Oil) सहित खाना पकाने के तेल मेंं भी आत्मनिर्भर बनाया जायेगा। PM मोदी ने पीएम-किसान (PM-K। SAN) की एक किस्त जारी करने के उपलक्ष पर एक वर्चुअल कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, ‘सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि किसानों को मिशन के तहत गुणवत्ता वाले बीज से लेकर प्रौद्योगिकी तक की सभी सुविधाएं मिलें।’ उन्होने यह भी कहा कि भारत चावल, गेहूं और चीनी के मामले में आत्मनिर्भर हो गया है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है, क्योंकि देश आयातित खाद्य तेलों पर अत्यधिक निर्भर है। मतलब अब फुल आत्मनिर्भर (Atmanirbhar) बनना है।

विदेशी निर्भर और आयात (Import) कम करने के उद्देश्य से पिछले कुछ सालों से भारत मेंं तिलहन और पाम तेल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र पहले से ही तिलहन और पाम तेल पर एक राष्ट्रीय मिशन चला रहा है। कुछ मीडिया सूत्रों से खबर मिली है कि नए मिशन की योजना 2025-26 तक पाम तेल की खेती को 10 लाख हेक्टेयर और 2029-30 तक 17-1.8 मिलियन हेक्टेयर तक बढ़ाने की है।

पाम तेल पर आयात कम करने पर जोर

खबर के मुताबिक़ भारत सरकार अब किसानों को पाम तेल की खेती की ओर स्थानांतरित करने के लिए दी गई वित्तीय सहायता को बढ़ाने और उनकी उपज के लिए लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने पर भी सोच रही है। भारत अपनी घरेलू मांग के 60 प्रतिशत से अधिक को पूरा करने के लिए विदेश से आयात किये जाने वाले खाद्य तेल पर निर्भर है, क्योंकि घरेलू तिलहन उत्पादन कम है।

भारत दुनिया का सबसे बड़ा वनस्पति तेल आयातक है और खाद्य तेल (Food Oil) आयात पर सालाना अरबों रुपये खर्च करता है। भारत ताड़ के तेल का भी दुनिया का सबसे बड़ा आयातक है, जो अधिकांश रूप से इंडोनेशिया और मलेशिया से सालाना 9 मिलियन टन से अधिक की खरीद करता है। देश मेंं सालाना खपत होने वाले लगभग 24 मिलियन टन खाद्य तेल के आधे से भी कम का उत्पादन होता है।

आपको बता दे की इंडोनेशिया और मलेशिया से पाम तेल, ब्राजील और अर्जेंटीना से सोया तेल और मुख्य रूप से रूस और यूक्रेन से सूरजमुखी तेल खरीदकर बाकी का आयात करता है। भारत ने खाद्य तेल आयात पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए है। ऐसे में PM मोदी का कहना है की यह पैसा किसानों के पास जाना चाहिए।

उन्होंने कहा था की ताड़ की खेती के लिए उत्तर-पूर्वी राज्यों और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह को बढ़ावा दिया जा सकता है। भारत अभी पाम तेल बड़े पैमाने पर मलेशिया और इंडोनेशिया से आयात किया जाता है, जिनके लिए भारत सबसे बड़ा उपभोक्ता है। पाम तेल मलेशिया का सबसे बड़ा कृषि निर्यात है।

खाना पकाने के तेल (Food Cooking Oil) से लेकर जैव-ईंधन, इंस्टेंट नूडल्स और यहां तक ​​कि पिज्जा आटा और लिपस्टिक तक, दुनिया भर मेंं इसका व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। अब भारत हर प्रकार से खाद्य तेल मेंं पूर्णतः आत्मनिर्भर होना चाहता है।

ताड़ के तेल के फायदे (Taad Ka Tel Ke Fayde) होने के कारण दुनिया के बहुत से देशों में इस तेल का उपयोग खाद्य चीजों को तलने के लिए उपयोग किया जाता है। ताड़ के तेल से बहुत सी बीमारियों और स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं को दूर करने में मदद मिलती हैं। ताड़ का तेल (palm oil) , मुख्य रूप से बीटा-कैरोटीन, विटामिन ई और संतृप्त और असंतृप्त वसा का गठन करता है।

इसमें मक्खन के रूप में अधिक संतृप्त वसा होता है। यह तेल विटामिन ए जैसी कमियों को रोकने में मदद करता है और उम्र बढ़ने के कारण कैंसर और मस्तिष्क में होने वाले रोगों से भी रक्षा करता है। यह मलेरिया के इलाज, उच्च रक्तचाप और उच्च कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में मदद करता है। यह तेल वजन घटाने में भी मदद करता है। इस तेल का उपयोग दक्षिण पूर्व एशिया, अफ्रीका और ब्राजील के कुछ हिस्सों के उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में एक आम खाना पकाने वाले घटक के रूप में उपयोग किया जाता है।

Palm Oil Benefits in Hindi

इस तेल को खाद्य तेल कहा जाता है। इसे कमरे के सामान्‍य ताप में रखा जा सकता है। ताड़ के तेल में अत्‍याधिक मात्रा में वनस्‍पति वसा होता है। इस तेल में बीटा-कैरोटीन, विटामिन ई की अच्‍छी मात्रा होती है। इस तेल में फाइटोन्‍यूट्रिएंट्स जैसे स्‍टेरोल्‍स आदि की भी उच्‍च मात्रा होती है। पाम आयल में कैरोटीनॉयड भी होते हैं जिनमें अल्‍फा, बीटा और गामा कैरोटीन होते हैं। ताड़ का तेल घुलनशील एंटीऑक्‍सीडेंट और फ्लेवोनोइड से भरा होता है। ये सभी पोषक तत्‍वों की उपस्थिति ताड़ के तेल को फायदेमंद बनाते हैं।

रिसर्च में पता चलता है कि पाम आयल का सेवन करने से ऊर्जा में वृद्धि होती है। यह घटक मस्तिष्‍क के स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ावा देने में मदद करता है। मुख्य रूप से यह मस्तिष्‍क की उन धमनियों में रक्‍त परिसंचराण को बढ़ाता है, जो स्‍ट्रोक का सामना करती हैं। इस तरह से स्‍ट्रोक के लक्षणों को कम करने में ताड़ के तेल का उपयोग किया जा सकता है।

ताड़ के तेल के फायदे दिल को स्‍वस्‍थ्‍य रखने में सहायक होते हैं। इस तेल का सेवन करने से कोलेस्‍ट्रॉल के स्‍तर को कम करने में मदद मिलती है। यह उच्‍च घनत्‍व वाले लिपोप्रोटीन को बढ़ाने में भी सहायक होता है। दिल को स्‍वस्‍थ्‍य रखने के लिए आप ताड़ के तेल का उपयोग कर लाभ प्राप्‍त कर सकते हैं।

पाम ऑयल अग्‍नाशय कैंसर का उपचार करने के लिए फायदेमंद हैं। नियमित रूप से ताड़ के तेल का उपभोग अग्‍नाशय कैंसर के लक्षणों को कम करने में सहायक हो सकता है। ताड़ तेल में मौजूद एंटीआक्‍सीडेंट और विटामिन ई कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकने और उन्‍हें नष्‍ट करने में अहम योगदान निभाते हैं।

औषधीय गुणों से भरपूर पाम आइल

बहुत देशों में प्राचीन समय से औषधीय गुणों से भरपूर पाम आइल का उपयोग खाद्य तेल के रूप में किया जा रहा है। ताड़ के तेल का उपयोग करने से खाद्य उद्योगों को विशेष लाभ होता है। इसका उपयोग खाना पकाने, गैर-डेयरी क्रीमर और आइस्‍क्रीम के रूप में किया जाता है। इसके अलावा पाम तेल का उपयोग उन उत्पादों में भी किया जाता है, जहां पशु आ‍धारित वसा का उपयोग नहीं किया जाता है। ताड़ का तेल आक्‍सीकरण को रोकने में समर्थ होता है, इसलिए इसका उपयोग कुछ खाद्य पदार्थों के साथ भी किया जाता है।

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