मिलिए एक ऐसी लड़की से जिसने साबित कर दिया कि मैकेनिक का काम सिर्फ़ मर्दों का नहीं है

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Revathi Lady Bike Mechanic
Story Of Revathi Lady Bike Mechanic From Visakhapatnam. Vizag girl carving a niche by breaking barriers in the man’s world. This automobile professional girl Revathi thinks mechanics is no more a man’s world.

File Image Credits: Twitter

विशाखपट्टनम: भारतीय सड़कों पर ये बाते उतनी ही सामान्य है, जितने कि स्पीड ब्रेकर्स (Speed Breakers) ड्राइविंग में ग़लती कोई भी कर सकता है, लेकिन एक विचारधारा सबके दिमाग़ में बैठ गई है कि लड़कियां या महिलाएं अच्छी ड्राइवर्स नहीं होती। अब ड्राइवर नहीं है, तब तो गाड़ी के छोटी-मोटी ख़राबियां ठीक कर पाने का तो सवाल ही नहीं उठता। चाहे वो स्कूटी (Scooty) को किक मारकर चालू करना हो या दुपहिया औऱ चारपहिया वाहन के टायर (Tyre) बदलना हो। बहुत से लोग यही समझते हैं कि ये सारे काम लड़कियों के बस का नहीं है। लडकिया इन सब कामो को नही कर सकती।

रूढ़िवादी सोच को तोड़ आगे बढ़ी

आज भी हमारे समाज में ऐसे कई लोग हैं, जो यही समझते हैं कि किसी भी तरह का वाहन चलाना महिलाओं के बस की बात नहीं है। आज भी जब कहीं महिलाएं कोई वाहन चलाती दिख जाएँ तो उन्हें ताने मारे जाते हैं, ऐसे में कोई महिला मैकेनिक का काम करे ये तो असंभव सा लगता है। लेकिन आज हम आपको एक ऐसी लड़की के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसने इस असंभव कार्य को संभव कर दिखाया है। आज ये लड़की चुटकियों में स्कूटर या गाड़ी को ठीक कर देती है। इस लड़की ने अपने सराहनीय कार्यों से ये साबित कर दिया है कि महिलाएं भी पुरुषों से कम नहीं हैं और वे भी सब कामों को बेहतर ढंग से कर सकती हैं।

करती थी अपने पिता की हेल्प

सबसे अलग विशाखपट्टनम (Visakhapatnam) की रहने वाली के रेवती (Revathi) के बारे में बताने जा रहे हैं। जो लोग आज ये मानते हैं कि वाहन चलाना और उसे ठीक करना सिर्फ पुरुषों का काम है, आज उन्हें रेवती ने गलत साबित कर दिया है। रेवती आज मैकेनिक का काम करती हैं। उन्होंने इस काम को कभी छोटा नही समझा। हमेशा अपने पिता के बिजनेस को आगे बढ़ाने के लिए उनकी हर सम्भव कोशिश की।

रेवती बचपन से ही इस काम को करती हुई आ रही हैं। दरअसल रेवती के पिता रामू की एक मैकेनिक (Bike Mechanic) की दुकान है, जब रेवती के पिता को भरोसेमंद कारीगर नहीं मिले, तो रेवती स्कूल पढ़ने के बाद शाम में अपने पिता की हेल्प करने दुकान पर जाती थी। तभी से उन्हें ये काम पसंद आने लगा। उन्होंने इसी काम को अपना शौक बना लिया।

रेवती कक्षा 8 में थी, जब उसने सीखा कि टायर पैच को कैसे ठीक किया जाए। लगभग 10 साल बाद, रेवती अब एक वाहन को खुद से ही ठीक कर सकती है। हालांकि 25 वर्षीय कोठवालसा के पी रगती डिग्री कॉलेज से बीकॉम की डिग्री हासिल की है, लेकिन एक टूल किट के टायर ने उनकी जिंदगी बदल कर रख दी। रेवती मैकेनिकों (Revathi Mechanic) की दुनिया में अपने पिता रामू को देखकर आगे बढ़ी। उनके पिता सुजाता नगर (Sujata Nagar) में एक छोटी मैकेनिक की दुकान चलाते हैं।

स्कूल के बाद, मैं अपने पिता की हेल्प करने के लिए सीधे दुकान पर आती थी। जो चाहते थे कि कोई भरोसेमंद मैकेनिक उनकी दुकान को संभले, लेकिन ये सब सम्भव नही है आज की दुनिया मे, भरोसेमंद व्यक्ति मिलना आज बहुत कठिन हो गया है। मैं अपने पिता की हेल्प करने में काफी खुश थी और आखिरकार, मुझे भी पापा का काम पसंद आने लगा।

लड़कियों को वाहनों की मरम्मत करने में अधिक समय लगता है। लेकिन रेवती का यह जुनून था कि वह कुछ ही समय में मोटरसाइकिल की मरम्मत करने की सभी कठिनाइयों को सीखने लगी। इस काम को उन्होंने अपना जुनून बना लिया। मैं 17 साल की उम्र तक कार, दोपहिया इंजन के क्लच प्लेट आदि जैसी समस्याओं को जल्द ठीक करने में बहुत फर्क महसूस करती थी।

रेवती की तारीफ करते हुए पिता ने बताया कि कभी उसे घर जाने के लिए सिर्फ इसलिए कहा करते थे क्योंकि वह एक लड़की थी। वह अपनी पूरी जिम्मेदारी के साथ काम करने लगी। कुछ महीने बाद उसने मेरी मदद करना शुरू कर दिया, मुझे पता था कि वह काम करने के लिए उत्साहित थी और उसे प्रोत्साहित करना शुरू कर दिया था, उसके होसलो को कम नही होने दिया। काम उसका जुनून बन गया था।

गरीबी ऐसी बीमारी है जो किसी को खुश नही रहने देती है। अंदर से तोड़ देती है। रेवती की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण वो अच्छी शिक्षा प्राप्त करने में सक्षम नही थी। रेवती के पिता ने हमेशा से ही रेवती का समर्थन किया। उसके हौसलों को कभी कम नही होने दिया। वे कभी भी रेवती को दुकान से घर जाने के लिए नहीं कहते थे।

रेवती के पिता को पता था कि रेवती का मैकेनिक्स में मन लगता था। वह हर काम को बारीकी से सीखती थी और जल्द पूरा कर देती थी। लेकिन उनके आर्थिक हालत ऐसे नहीं थे कि वे रेवती को मैकेनिकल इंजीनियरिंग करा पाएँ। रेवती फिलहाल BEV इलेक्ट्रॉनिक्स में काम करती हैं। साथ ही अब रेवती अन्य महिलाओं को भी मैकेनिक्स का ज्ञान देना चाहती हैं। इस काम को करने के लिए महिलाएं कभी आगे नही आई। लेकिन रूढ़िवादी सोच को तोड़ रेवती ने इस काम को अपना शौक बना लिया।

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