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Patna: कुछ होनहार कैंडिडेट्स जिनका बचपन या शुरुआती पढ़ाई-लिखाई बहुत आरामदायक माहौल में नहीं हुई। लेकिन पढ़ाई को लेकर गंभीर माता-पिता ने उनके भविष्य को बेहतर बनाने के लिए बचपन में ही उन्हें खुद से दूर कर दिया। ये निर्णय आसान नहीं था, उनके बच्चे के भविष्य के लिए उन्हें ऐसा करना पड़ा।
कई बार गांव में सुविधाएं न होने पर बच्चे घर से दूर रहकर पढ़ाई करते हैं। मां-बाप सीने पर पत्थर रखकर बच्चों को अपने से दूर भेज देते हैं। अगर ये सपना सच साबित हो कि आपका बचपन में घर छोड़कर गया बच्चा अफसर बनकर लौट आए। सुनकर ही लोग हैरान रह जाते हैं लेकिन ऐसा हुआ भी है।
बिहार के जमुई जिले के सिकंदरा के रहने वाले सुमित कुमार ने 8 साल की उम्र में घर छोड़ दिया था। वो कक्षा 4 से 12वीं तक घर से दूर ही रहे और पढ़ाई करते रहे। साल 2018 में सुमित घर लौटे तो अफसर बनकर। उनका रूतबा देख मां-बाप तो क्या पूरा गांव ही दंग रह गया था। उनके संघर्ष की कहानी हर किसी के लिये प्रेरणा का स्त्रोत है।
माता पिता से हुए दूर
जहां वे रहते थे, (जमुई, बिहार में) वहां न अच्छे स्कूल थे और न ही बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं। इसलिए आठ साल की छोटी उम्र में ही उन्हें बोर्डिंग स्कूल भेज दिया गया था। सुमित के माता-पिता दोनों ने अपने-अपने हिस्से के संघर्ष किए पर बच्चों की पढ़ाई पर कभी किसी प्रकार की आंच नहीं आने दी। सुमित (Sumit Kumar) का एक छोटा भाई और है, जो एमबीबीएस (MBBS) की पढ़ाई कर रहा है। दोनों ही बच्चों ने मां-बाप की मेहनत और संघर्ष का प्रतिफल दिया और अच्छी जगहों पर चयनित हुए।
कौन है IAS Sumit Kumar
इस होनहार युवा का नाम सुमित कुमार (IAS Sumit Kumar) है। सुमित मूल रूप से बिहार के जमुई जिले के सिकंदरा गाँव के रहने वाले हैं। इनके पिता सुशाल वणवाल है, जो कि बेहद गरीब थे। सुमित के पिता का बचपन से ही सपना था कि बेटे को कुछ बड़ा बनाना है। लेकिन गांव में शिक्षा के संसाधन की कमी थी।
गांव में पर्याप्त संसाधन नही थे, जिससे वो अच्छी शिक्षा प्राप्त कर सके। लेकिन सपना तो देख लिया था, बड़ा अफसर बनने का इसको पूरा करने की जिद भी बना ली थी। लेकिन उनके गाँव में ऐसी कोई सुविधा नहीं थी, जो सुमित के भविष्य को उज्ज्वल कर सके। इसके चलते सुमित को 8 साल की खेलने कूदने की उम्र में ही घर छोड़ना पडा ताकि उसका भविष्य सुनहरा हो सके।
उन्हें आईआईटी के लिए चुना गया
सुमित ने 2007 में और इंटर की परीक्षा 2009 में मैट्रिक क्लियर की। 2009 में उन्हें केवल आईआईटी के लिए चुना गया और उन्होंने बीआईटी कानपुर (BIT Kanpur) से बीटेक (Btech) की डिग्री ली। यूपीएससी परीक्षा (UPSC Exam) में सफलता पाने के लिए बहुत कड़ी मेहनत की। गरीबी के चलते सुमित का बचपन और बच्चों की तरह नही गुजरा। जिस उम्र में माता पिता अपने बच्चे पर ध्यान देते है, उनकी परवरिश पर फोकस करते है, उस समय आर्थिक तंगी के चलते माता पिता को भारी मन से अपने बच्चों को खुद से दूर करना पड़ा।
यूपीएससी (UPSC Civil Services) जैसी कठिन परीक्षाओं में सफलता पाने के लिए, प्रीलिम्स और मेन्स इंटरव्यू की तैयारी पर जोर देना बहुत आवश्यक है। कई उम्मीदवार इसमें ज्यादा ध्यान नही दे पाते है, इसलिए वो पीछे रह जाते हैं, उसका कारण ये भी है की वो विशेष रूप से रणनीति तैयार नहीं कर पाते हैं। सुमित कुमार ने कहा कि इंटरव्यू के दौरान सभी स्टूडेंट्स से जो प्रश्न पूछे जाते हैं, वे उनके विस्तृत आवेदन पत्र में दी गई जानकारी पर आधारित होते हैं।
इंटरव्यू के लिए प्रेक्टिस करना बहुत जरूरी
प्रत्येक स्टूडेंट्स की इन्फॉर्मेशन किस क्षेत्र में अधिक है, उसकी रुचियां क्या हैं, इंटरव्यू में प्रश्न पूछकर सभी का ध्यान रखा जाता है। सुमित ने कहा कि इंटरव्यू के लिए प्रेक्टिस करना बहुत जरूरी है हर दिन आपको प्रेक्टिस के लिए समय देना होगा। ये नही की एक दिन प्रेक्टिस करके कुछ दिन तक उसमे धयान ही ना दिया जाए। टेस्ट सीरीज को सॉल्व करे, इससे आपको ये पता चलेगा कि आप किस विषय मे कमजोर है।
आपको उस विषय मे ज्यादा ध्यान देना होगा। मॉक इंटरव्यू से बहुत फायदा होता है। इसके अलावा, इंटरव्यू के दौरान बॉडी लैंग्वेज पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि कई बार हम उस विषय के बारे में सब कुछ पता होने बाद भी हम उसके सवालों का उत्तर देने में असमर्थ होते हैं। यह घबराहट के कारण होता है। इसलिए, आत्मविश्वास बनाए रखने के लिए भी प्रेक्टिस करना बहुत जरूरी है।
उन्होंने कहा कि अधिकांश स्टूडेंट्स इंटरव्यू में बाहर कर दिए जाते हैं क्योंकि वे प्रश्नों के सही उत्तर देने में सक्षम नही होते हैं। इंटरव्यू के दौरान सही और करेक्ट उत्तर दिए जाने चाहिए। यदि कोई प्रश्न का उत्तर नहीं दिया जाता है, तो यह कहने में घबराना नही चाहिए कि आप नहीं जानते हैं। इसका सही जवाव है।
इंटरव्यू में अधिकतर सवाल करेंट अफेयर्स से
यूपीएससी स्टूडेंट्स को बताते है कि है उन्हें अपने पर्यावरण के बारे में जानकारी होना चाहिए। इंटरव्यू में अधिकतर सवाल करेंट अफेयर्स से संबंधित होते हैं, इसलिए हमेशा समाचार पत्रों और पत्रिकाओं को पढ़ें। अपने आपको समय के अनुसार अपडेट रखे। सुमित ने एक-दो बार नहीं पूरे पांच बार यह परीक्षा दी है। उन्होंने कभी हार नही मानी।
अपने आपको हर बार से अधिक मजबूत बनाते चले गए। हर बार अपनी गलती से नई सीख ली। हमेशा अपने सपनो को उड़ान देते रहे। थके नही। ना वो थकने वालो में से थे। हर समय अपने आपको मजबूत बनाये रखा। सपनो को ही अपना लक्ष्य बना लिया। कुछ स्टूडेंट्स अपनी गरीबी का रोना रोकर अपने सपनो से पीछे हट जाते है। अपनी परिस्थिति से हार जाते है। उनमें हालात से लड़ने की क्षमता नही होती है। लेकिन सुमित इन सभी से अलग थे।
यूपीएससी जैसी परीक्षा की तैयारी जो इंसान को झकझोर कर देती है उसमें इतने साल देना आसान नहीं है, वो भी तब जब असफलता पर असफलता हाथ लग रही हो और कारण हर बार अलग होते हों। लेकिन सुमित किसी भी हार से घबराने वालों में से नहीं हैं। ऑफिस स्ट्रेस के कारण वे कई बार घर आकर भी नहीं पढ़ पाते थे, कई बार इतना थक जाते थे कि वापस आकर नहीं पढ़ पाते थे पर सुमित हमेशा लगे रहे, कभी रुके नहीं।
सुमित ने यूपीएससी परीक्षा कमाल कर दिया
आखिरकार उनकी सालों की मेहनत सफल हुयी और साल 2018 में सुमित ने न केवल यूपीएससी परीक्षा पास की बल्कि 54वीं रैंक लाकर वे टॉपर भी बने। इस पूरे सफर में सुमित की मेहनत और धैर्य काबिले तारीफ है। सुमित कहते हैं कि इस बात से खास फर्क नहीं पड़ता कि आपका पारिवारिक वातावरण कैसा है। सफलता कभी अमीर गरीब नही देखती। सफलता तो हमेशा मेहनत मांगती है।
आप जितनी मेहनत करेंगें उतने ताकतवर बनते जाएंगे। हर किसी को अपने हिस्से की मेहनत तो करनी ही पड़ती है। यह परीक्षा बहुत मेहनत और धैर्य मांगती है। सुमित कहते हैं शुरू में अपने आपको मजबूत करने के लिए पढ़ाई करनी चाहिए, क्योंकि बिना बेस मजबूत हुए इस परीक्षा में सफल नहीं हुआ जा सकता।
हर दिन आपको प्रेक्टिस करना होगी। प्रतिदिन पढ़ाई को समय देना होगा। एक बार बेसिक्स क्लियर हो जाने के बाद आगे के पढ़ाई आसान हो जाती है। जब तक आपको किसी विषय के बारे में गहराई से नही मालूम होगा, तब तक आप उसका उत्तर देने में घबराहट महसूस करेंगे। किताबों को लेकर ज्यादा कंफ्यूज़ न हों, जो है उसे ही ठीक से पढ़ें और बार-बार उसकी प्रेक्टिस करे। टेस्ट सीरीज को सॉल्व करे।
सफलता का मूलमंत्र
सुमित कैंडिडेट्स को सलाह देते हैं कि किसी की न सुनें केवल वही करें जो आपका दिल कहता है। अपने सपनो को अपना लक्ष्य बना लें। उसी को फोकस करके मेहनत करे। निराशावादी लोगों से दूर रहें और इस बात का भी ध्यान रखें कि इस परीक्षा की तैयारी के दौरान हर कोई कमजोर फील करता है, क्योंकि यह सफर है ही बहुत लंबा, लेकिन इससे पार करना हर किसी के बस की बात नही है।
सफलता भी उसी के कदम चूमती है, जो कड़ी मेहनत करता है। अगर सही रणनीति बनाकर पूरे दिल से तैयारी करेंगे तो सफलता (Success) जरूर मिलेगी। कई बार यह देर से मिलती है पर मिलती जरूर है। हार नही मानना है। अपने आपको पहले से अधिक मजबूत बनाना है। हर हार से सिख लेना है।



