दर्जी का बेटा अखबार बेचकर परिवार चलाता था, दोस्त के नोट्स से पढ़कर IAS अफसर बने, देश की सेवा कर रहे

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Nirish Rajput IAS
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Delhi: जब भी कोई युवा आईएएस (IAS)और आईपीएस (IPS) जैसी परीक्षा में सेलेक्ट होता है, तो उसकी कामयाबी की चर्चा हर जगह होती है। हर कोई जानना चाहता है कि आखिर इन युवाओं ने देश की सबसे कठिन परीक्षा को क्रैक कैसे किया, उनकी क्या सोच थी। उन्हें नहीं पता था कि IAS अधिकारी कैसे बना जा सकता है, लेकिन वे जानते थे कि देश के शीर्ष परीक्षा में सफल होने के बाद हीं वे अपना भाग्य बदल सकते हैं और उन्हें विश्वास था कि यदि कोई दृढ़ संकल्पी हो और कड़ी मेहनत करने को तैयार हो तो उनकी गरीबी उसकी सफलता की राह में बाधा नहीं हो सकती।

आज हम आपको ऐसे शख्स के बारे में बता रहे है, जिन्होंने मुश्किल भरे दिनों में भी अपने होसलो को कम नही होने दिये। बेहद मुश्किल हालातों में इस परीक्षा में सफलता पाई। इस शख्श का नाम है, नीरीश राजपूत (Nirish Rajput)। एक वक़्त ऐसा था, जब नीरीश के पास पढ़ने के लिए पैसे नहीं थे।

वह अपनी पढ़ाई का खर्चा उठाने के लिए अखबार बेचा करते थे। वहीं पिता के साथ सिलाई के काम में हाथ बंटाते थे। ऐसे हालातों में भी नीरीश ने हिम्मत नहीं हारी। वो डटे रहे। इसका नतीजा ये है कि आज वे एक आईएएस अफसर (IAS Officer) हैं। उन्होंने UPSC की परीक्षा में 370वीं रैंक पाई।

पिता थे दर्जी और बेचते थे अखबार

नीरीश राजपूत बताते हैं कि उनके पिता एक दर्जी थे, वो सिलाई का काम करते थे, उनके काम मे भी अपना भी सहयोग देता था। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नही थी। मुश्किल भरी परिस्थितियों में भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी, लेकिन वो फिर भी डटे रहे। इसका परिणाम ये रहा कि आज वे एक सफल IAS Officer हैं। उन्‍होंने UPSC की परीक्षा में 370वीं रैंक हासिल की।

कहां हुआ जन्म

नीरीश राजपूत Madhya Pradesh के भिंड जिले के रहने वाले हैं। उनके पिता कपड़ों की सिलाई का काम किया करते थे। नीरीश राजपूत बताते हैं कि महज 15 बाई 40 फीट के छोटे से घर में नीरीश अपने 3 भाई-बहनों और माता-पिता के साथ रहते थे। घर इतना छोटा था कि वँहा पर पढ़ाई कर पाना बहुत मुश्किल होता था। वो बचपन से ही पढ़ाई में काफी होशियार थे। परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए निरीश की पढ़ाई सरकारी स्कूल में हुई थी।

फीस भरने के लिए बेचा अखबार

कहा जाता है कि मेहनत करने वालो की कभी हार नही होती। कोई भी चीज़ यदि पूरी शिद्दत से चाहो तो उसको मिलाने में सारी कायनात एक जुट हो जाती है। किसी भी मुश्किल परिस्थितियों को देखकर अपने लक्ष्य से पीछे नही हटना, सफलता बिना कोशिश से नही मिलती। नीरीश राजपूत (Nirish Rajput) बचपन से ही पढ़ाई में काफी अच्छे थे, लेकिन उनके घर की आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं थी कि वो अच्छे स्कूल में शिक्षा ले सकतें। उनका सपना यह कि वो अच्छे स्कूल में पढ़े।

लेकिन उनके पास इतना पैसा नहीं था कि वो अच्छे स्कूल में पढ़ाई कर सके। पैसे ना होने के कारण अपनी पढ़ाई के दौरान कई बार फीस भरने की स्थिति से जुझना-गुजरना पड़ता था। निरिश ने हार नही मानी अपनी पढ़ाई का खर्च उठाने उन्होंने विचार किया। स्कूल की फीस भरने के लिए उन्होंने अखबार बांटने का काम किया। वो पिता के साथ सिलाई के काम में भी हाथ उनका साथ देते।

पढ़ाई के साथ Job

नीरीश ने 10वीं में 72 प्रतिशत अंक हासिल किए। उन्होंने अपने होसलो को मजबूत बनाया। इसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए नीरीश राजपूत ग्वालियर चले गए, जहां उन्होंने सरकारी कॉलेज से BSc और MSc किया, जिसमें उन्होंने पहला स्थान हासिल अपने नाम किया। पढ़ाई को आगे जारी रखने के लिए पेसो की जरूरत थी। परिवार में इतना पैसा नही था जिससे आगे पढ़ाई जारी रखी जा सके, इसके लिए नीरीश ने पढ़ाई के साथ-साथ Part Time Jobs भी किया।

UPSC तैयारी के दौरान दोस्त ने तोड़ा हौसला

नीरीश राजपूत बताते हैं कि उन्होंने पार्ट टाइम जॉब के साथ UPSC Exam की तैयारी शुरू कर दी थी। उनके एक दोस्त ने उत्तराखंड में नया Coaching Institute खोला और नीरीश को यहां पढ़ाने का ऑफर दिया। दोस्त ने इस बात का वादा किया कि इंस्टीट्यूट की अच्छी शुरुआत हो जाने पर वह नीरीश को Civil services की तैयारी के लिए Study Material उपलब्ध करा देगा।

कहा जाता है, किसी पर ज्यादा भरोसा नही करना चाहिए। नीरीश ने 2 सालों की कड़ी मेहनत के चलते जब वह इंस्टीट्यूट फेमस हो गया और काफी इनकम होने लगी तो उस दोस्त ने नीरीश को नौकरी से निकाल दिया। उस समय मानो निरीश की जिंदगी बिखर सी गई। तब वे बेहद टूट गए थे। लेकिन आगे बढ़ना था। इसी हौसले से फिर एक बार खड़े हुये ओर अपने सपने को पूरा करने निकल पड़े।

दोस्त के मटेरियल से करते थे पढ़ाई

दोस्त से धोखा खाने के बाद नीरीश अपने मजबूत होसलो के साथ दिल्ली चले चाए। दिल्ली में उनका एक दोस्त बना जो खुद भी IAS की तैयारी कर रहा था। नीरीश राजपूत बताते हैं कि वो उसके साथ रहकर पढ़ाई करने लगे। वो दिनभर में लगभग 18 घंटे पढ़ाई किया करते थे। जॉब छूटने के बाद उनके पास इतने पैसे नही थे, जिससे वे जरूरत की किताबे खरीद ले। पढ़ने के लिए वो दोस्त से नोट्स उधार मांग कर अपनी पढ़ाई जारी रखते।

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नीरीश ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि मैंने किसी Coaching Institute का सहारा नहीं लिया, बल्कि दोसत के ही नोट्स और किताबों से तैयारी जारी रखी और आखिरकार मेरी मेहनत रंग लाई और मुझे 370वीं रैंक हासिल की और आज IAS Officer के पद पर तैनात हैं और देश को अपनी सेवा दे रहे हैं।

प्रेरणादायक बने

निरीश बताते है कि शुरुआत मैं नहीं जानता था कि आईएएस अफसर कैसे बना जाता है, लेकिन इतना जानता था कि देश की इस सबसे चुनौतीपूर्ण परीक्षा में चयन होना मेरी किस्मत बदल देगा। चुनौतियां कम होने का नाम नहीं ले रही थीं। इस बीच निरीश विश्वासघात का शिकार भी हुए। निरीश बताते हैं, मैंने किसी कोचिंग इंस्टीट्यूट का सहारा नहीं लिया, बल्कि अंकित के ही नोट्स और किताबों से अपनी पढ़ाई जारी रखी और आखिरकार एक IAS अधिकारी बनकर खड़ा हो गया।

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