पिता बेचते थे अखबार, बेटी ने पहली बार में ही क्रैक किया HCS Exam, अफसर बन पूरा किया सपना

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Shivjeet Bharti IAS
Newspaper vendor's daughter Shivjeet Bharti cracks Haryana Civil Services (HCS) exam. Newspaper seller daughter Shivjeet Bharti became Officer in Haryana Government. Her Next mission is crack UPSC exam and became IAS Officer.

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Delhi: कहते हैं अगर हौसले बुलंद हों, तो हर मंजिल आसान हो जाती हैं। कुछ कर गुजरने का जुनून हो तो कोई भी काम नामुमकिन नहीं होता। कुछ ऐसा ही कर दिखाया और कई लोगों की मिसाल बन चुकी हरियाणा की बेटी शिवजीत भारती (Shivjeet Bharti)। हर जीवन की कहानी एक सी नहीं होती, लेकिन किसी मोड़ पर कुछ ऐसा होता है, जिससे पूरी कहानी चेंज हो जाती है।

कुछ जुनून से भरे सफल स्टूडेंट्स होते है जो विषम परिस्थितियों से लड़कर कामयाबी हासिल करते है, उनमें कुछ ऐसे भी होते हैं, जो पहले ही प्रयास में और बेहद कम उम्र में यह उपलब्धि हासिल कर लेते हैं। इन्हीं होनहारों में से एक हैं शिवजीत भारती। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक भारती ने कहा कि वह अपने पूरे करियर के दौरान विनम्र बनी रहेंगी और अपनी कामयाबी को सिर पर चढ़ने नहीं देंगी।

हरियाणा सिविल सेवा परीक्षा (HCS) का परिणाम जारी हो गया है और इसमें 48 छात्रों का चयन हुआ। चुने गए उम्‍मीदवारों में एक नाम भारती का है 26 साल की शिवजीत भारती, अखबार बेचने वाले की बेटी हैं। अपनी बेटी की कामयाबी पर भारती के पिता गर्नाम सैनी ने कहा कि मुझे अपनी बेटियों पर गर्व है और उनकी कामयाबी देखकर मैं आज गर्व महसूस कर रहा हूँ। भारती के पिता ने बताया कि जमीन विवाद को लेकर उन्‍हें सरकारी दफ्तरों के काफी चक्‍कर काटने पड़े थे।

कहां हुआ जन्म

मूल रूप से हरियाणा से ताल्लुक रखने वाली शिवजीत भारती के पिता गुरनाम सैनी एक अखबार विक्रेता (Newspaper vendor) हैं, जो सूरज निकलने से पहले जगते हैं और जगह जगह अखबार बांटने का काम करते हैं। वही उनकी माँ शारदा सैनी आंगनबाड़ी में काम करती हैं। 26 साल की उम्र में भले ही भारती ने इस परीक्षा को पास कर लिया हो मगर उनके लिए ये सफर आसान नही था।

भारती ने अपने पिता के लिए समाचार की सुर्खियां बटोरने का कार्य किया है। उनके पिता का अधिकारियों और नौकरशाहों का बर्ताव पिता के साथ अच्छा नही था। इस बात को लेकर वह काफी निराश रहती थी। उनके पिता गुरनाम सैनी रोज सुबह जल्दी उठते हैं, ताकि अखबार बांट सकें, उन्हें साल में केवल चार छुट्टियां मिलती हैं। उनकी मां शारदा सैनी एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं।

परिवार की आर्थिक स्थिति

भारती ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नही थी। इतना पैसा नही था कि भाई बहन अच्छे स्कूल में शिक्षा प्राप्त कर सके। फिर भी मेने हौसला नही हार सफलता कभी गरीबी अमीरी नही देखती। सफलता केवल मेहनत की मोहताज है। परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुये मेने कभी अपने होसलो को कम नही होने दिया।

परिवार के कम संसाधनों में अच्छी शिक्षा प्राप्त करना चुनौतीपूर्ण था, ऐसे में पढ़ाई करना और एक सरकारी नौकरी हासिल करना मेरा एकमात्र उद्देश्य है। तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी भारती ने कहा, मैं संघ लोक सेवा आयोग यूपीएससी की परीक्षा की तैयारी कर रही थी। इसके बीच ही मुझे समय मिला और मैंने एचसीएच (HCS) के लिए आवेदन किया और पहली कोशिश में ही इसे पास कर लिया। अब मुझे विश्वास है और मेरे पास संसाधन है कि मैं सिविल सर्विस परीक्षा भी पास कर सकती हूं।

UPSC की तैयारी कैसे की

शिवजीत बताती हैं कि जब वो UPSC Exam की तैयारी कर रही थी। इसी बीच उन्‍हें HCS (Executive) परीक्षा देने का मौका मिला और पहली ही कोशिश में उन्‍होंने इस परीक्षा को पास भी कर लिया था। इस बारे में बात करते हुए शिवजीत बताती हैं कि अब उन्‍हें पूरा यकीन है कि वह UPSC Civil Services Examination भी पास कर सकती हैं। उनका अगला लक्ष्‍य UPSC Exam को क्‍ल‍ियर करना है।

किताब खरीदने के लिये पढ़ाती थीं कोचिंग

शिवजीत बताती हैं कि उनकी छोटी बहन Public Administration में पोस्‍ट ग्रेजुएशन कर रही हैं और उनका छोटा भाई स्‍पेशल चाइल्‍ड है। ऐसे में भाई-बहनों की पढ़ाई पर भी खर्च होता है। पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ से वर्ष 2015 में, मैथ्‍स ऑनर्स से पोस्‍ट ग्रेजुएशन करने वाली भारती अपना खर्च चलाने के लिये घर पर कोचिंग पढ़ाती हैं। इसी से उनकी किताबों का और पढ़ाई का खर्च निकलता है। साथ ही अपनी इसी कमाई से उन्होंने अपनी तैयारी लायक सभी किताबों को खरीदा था।

सफलता की कहानी

शिवजीत (Shivjeet Bharti HCS) बताती हैं कि सफलता कभी अमीरी नही देखती है। अगर आप अपनी जीवन में कुछ करना चाहते हैं तो इस बात को जान लीजिए कि सफलता के लिए हमेशा कड़ी मेहनत ही उसकी मंजिल होती है और आसानी से सफलता हासिल करने का दूसरा कोई रास्ता नहीं होता है। साथ ही उन्होंने बताया कि उन्‍हें किताबों से बेहद प्‍यार है और इसी मोहब्‍बत ने उन्‍हें यह सफलता दिलाई हैं। शिवजीत को किताबें, अखबार, मैग्‍जीन पढ़ना और यूट्यूब पर जानकारी से भरे Video देखना पसंद है। साथ ही शिवजीत ने बताया कि परीक्षा की तैयारी में ये सभी चीजें महत्वपूर्ण रोल अदा करती है।

शादी के लिए दबाव बनाने लगे

शिवजीत बताती हैं कि उनकी पढ़ाई के दौरान ही उनके माता-पिता ने उन पर शादी का बहुत दबाव बनाया गया था। आस-पड़ोस, रिश्‍तेदार, भारती के माता-पिता को सलाह देते थे कि बेटी की जल्‍दी शादी कर दो, भारती के माता पिता को अपनी बेटी पर भरोसा था। भारती के माता-पिता के लिए उनकी शिक्षा सबसे जयादा जरूरी थी। इसलिये उन्‍होंने, रिश्‍तेदारों की बातों को दरकिनारे कर बेटी की पढ़ाई जारी रखी और आज उन्‍होंने यह साबित कर दिया कि अगर इच्‍छाशक्‍त‍ि हो तो छोटे से गांव में रहकर भी काफी कुछ हासिल किया जा सकता है। आज के समय में शिवजीत एक IAS Officer के पद पर तैनात हैं और देश को अपनी सेवा दे रही हैं।

पिता ने बताई शिवजीत के सफलता की कहानी

शिवजीत के पिता, गुरमन, अपने पिता के साथ खेतों में काम करते, एक सामाजिक कार्यकर्ता और फिर एक अखबार विक्रेता बनने तक के अपने सफर को याद करते हैं। एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में, मुझे कभी-कभी जिला प्रशासन के कार्यालयों में जाना पड़ता था। पिता बताते है कि जब मैं एक अधिकारी के साथ एम्प्लॉयर के लिए उनकी प्रतीक्षा को देखता था, तो मैं बहुत परेशान हो जाता था। अधिकारी अपने एम्प्लॉयर के साथ अच्छा बर्ताब नही करते थे। छोटी सी गलती पर उनको अपमानित कर देते थे।

मुझे उम्मीद है कि शिवजीत और उनके जैसे कई अन्य लोग स्थिति में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। मुझे उम्मीद है कि वह लोगों की शिकायतों को समझकर उस पर जल्द कोई फैसला लेंगे। उनके समस्या के समाधान की आवश्यकता को समझेगी। बाहर हो रहे इस बर्ताव को देखते हुए में एक उम्मीद के रूप में शिवजीत के पास आया।

वह कॉलेज में थी जब उसने अपने छोटे से गांव में लड़कियों के लिए पहला क्लब स्थापित किया, जिसमें लगभग 400 घर थे। गणित में होशियार थी। उन्हें पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ में गणित के प्रतिष्ठित विभाग में प्रवेश मिला, और जल्द ही उन्हें विभाग प्रतिनिधि (डीआर) चुना गया। गणित ऑनर्स में सफलतापूर्वक पोस्ट-ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद, उन्होंने पड़ोस में बच्चों के लिए अपने घर पर गणित की कोचिंग कक्षाएं चलाना शुरू कर दिया। इसके साथ ही, उन्होंने सिविल सेवाओं के अपने सपने को पूरा करना जारी रखा।

पढ़ाई के लिए हुई घर से दूर

शिवजीत बताती है जब मैंने अपनी मुख्य परीक्षा दी है, और मैं परिणाम की प्रतीक्षा कर रही थी। इस बीच, मैंने सोचा कि मुझे हरियाणा सिविल सेवा परीक्षा देनी चाहिए और देखना चाहिए कि क्या मैं इसे क्रैक कर सकता हूं। मैंने ऐसा इसलिए किया, ताकि मुझे कुछ वित्तीय स्थिरता और सामाजिक जानकारी मिल सके। अब, एक मिशन पूरा हुआ, अगला लक्ष्य यूपीएससी (UPSC) है। हमारे चेहरे की मुस्कान दिनों, महीनों और वर्षों की मेहनत को छुपाती है।

मेरे लिए यह आसान नहीं था जब मैंने घर छोड़ा, 10 महीने दिल्ली में रही और UPSC की कोचिंग ली। लेकिन इस सब के चलते मुझे एचसीएस परीक्षा को पास करने में मदद मिली। शिवजीत कहती हैं कि एचसीएस में राज्य-विशिष्ट सामान्य ज्ञान बहुत मायने रखता है। शिवजीत याद करती हैं कि कैसे वह हरियाणा (Haryana) पर अपने सामान्य ज्ञान पर यूट्यूब पर वीडियो देखकर और अखबारों और पत्रिकाओं को पढ़कर काम करती थीं।

रिश्वत वालो को दिया जवाव

पूर्व में हरियाणा में एचसीएस भर्ती में कई ऐसे भाई-भतीजावाद के उदाहरण हैं, जहां मंत्रियों, उनके सहयोगियों, सेवारत नौकरशाहों ने प्रतिष्ठित एचसीएस में उनकी दम पर जगह मिली। लोग मुझसे कहते थे कि अगर मैं परीक्षा पास कर भी लूँ तो मुझे अंतिम चयन के लिए बहुत सारे पैसे देने होंगे। तब भी मैने हार नही मानी। अपनी मेहनत पर भरोसा था। मुझे कभी किसी समस्या का सामना नहीं करना पड़ा। मेरे पिता ने मुझसे कहा था कि चाहे कुछ भी हो, वह एक पैसा भी रिश्वत के रूप में नहीं देंगे। मेरा मानना ​​है कि पूरी निष्ठा पूरी निष्पक्षता और योग्यता के आधार पर की गई मेहनत कभी असफल नही होती।

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