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Patna, Bihar: मोहनपुर गांव के लिए शुक्रवार का दिन ऐतिहासिक रहा। दो दिन पहले राजकिशोर सिंह की 85 वर्षीय माता जानकी देवी का देहांत हो गया था। उन पर सामाजिक रीतियों के तहत भोज कराने का दबाव था। जबकि उनके दिमाग में गांव में ही स्थित रघुनंदन सिंह हाईस्कूल के जर्जर हो चुके भवन और कमरे को फिर से नया रूप देने का बार-बार विचार आ रहा था।
इस पर उन्होंने गांववालों की बैठक बुलाई और स्कूल भवन निर्माण के लिए राशि देने और तेरहवीं भोज को कम करने का विचार रखा। ग्रामीणों ने इस नई पहल का स्वागत किया। राजकिशोर सिंह ने बताया कि गांव में शिक्षा और छात्रों की स्थिति बेहतर हो, इसके लिए वह हमेशा प्रयत्नशील रहते हैं। उनके लिए हमेशा वो कुछ अच्छा करना चाहते है जिससे गांव के बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल सके।
कोई भी गांव का बच्चा शिक्षा के अभाव में ना रहे। हर कोई अपने सपने को पूरा करे। बिहार के बेगूसराय के मोहनपुर गांव में रहने वाले बेटे ने एक नई मिसाल पेश की है। उन्होंने अपनी मां के देहांत के बाद तेरहवीं की जगह गांव में जर्जर हो चुके हाईस्कूल की बिल्डिंग को बनवाने का विचार किया। गांव के लोगो ने जब ये बात सुनी तो सभी खुश हो गए।
बेगूसराय जिला मुख्यालय से करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मोहनपुर गांव में शुक्रवार को समाजसेवा राजकिशोर सिंह ने दुनिया को एक नई दिशा दिखाई। सामाजिक रीतियों को तोड़ते हुए, उन्होंने अपनी मां के देहांत के बाद भोज की जगह गांव में जर्जर हो चुके हाईस्कूल के भवन को बनवाने के लिए पहल की। भोज के नाम पर खर्च होने वाली राशि को समाज के विकास में लगाने की उनकी पहल की गांववालों ने बहुत सराहना की।
रूढ़िवादी व्यवस्था को तोड़कर शिक्षा के विकास में आगे आने के लिए धन्यवाद देता हूं। जिले के दस प्रतिशत लोग भी ऐसा करने लगें तो शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति आ जाएगी। समाज के सहयोग से जिले के हर स्कूल में स्मार्ट क्लास की पढ़ाई शुरू हो सकेगी। गांव के लोगों ने उनके इस प्रस्ताव की तारीफ की। सबका कहना था कि इससे शिक्षा और छात्रों के लिए प्रयास करने का एक नई मंजिल मिलेगी।



