पोती को अच्छी शिक्षा देने गरीब दादा ने घर तक बेचा और ऑटो को घर बना लिया

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Auto wale dada sold his house for giving good education to her grand daughter. Awesome Grand Father story.

Mumbai: मुंबई में एक ऑटो चालक की दिल को छू जाने वाली स्टोरी सामने आई है। एक ऑटो चालक ने अपनी पोती को अच्छी शिक्षा देने के लिए अपना घर तक बेच दिया। बेटे की मौ-त के बाद उसके बच्चों और पत्नी की जिम्मेदारी संभाल रहे बुजुर्ग देसराज दिन रात कड़ी मेहनत कर रहे हैं। ये सब देख लोगों ने उनकी मदद की अपील की है। जिसके बाद काफी लोग उनकी सहायता के लिए आगे आए हैं।

सोशल मीडिया पर इन दिनों मुंबई के एक 74 वर्षीय बुजुर्ग ऑटो चालक की खबर सुर्खियों का विषय बन गई है। एक ऐसा बुजुर्ग जिसने कड़ी परिस्थितियों के बाद भी अकेले घर की सारी जिम्मेदारी संभाली हुई है। यह संघर्ष बहुत कुछ बयां कर देता है।

देशराज दो जवान बेटों इस दुनिया से चले जाने के बाद काफी कमजोर पड़ गए, लेकिन उन्होंने हौसला नहीं हारा, दोनों बेटे अपने पीछे अपना पूरा परिवार छोड़ गए, आज देशराज रिक्शा चलाकर न सिर्फ पूरे परिवार की जिम्मेदारी उठा रहे हैं, बल्कि अपने पोती के सपने को भी उड़ने के लिए पंख दे रहे हैं।

बेटों के बाद 7 सदस्यों के परिवार को पालना मुंबई के एक 74 वर्षीय बुजुर्ग के लिए एक चुनौती का विषय बन गया था। लेकिन बावजूद इसके वे चेहरे पर मुस्कान लिए और हर मुश्किल परिस्थितियों का सामना करते हुए परिवार की हर जरूरत की चीजों की पूर्ति कर रहे हैं।

इतना ही नहीं उन्होंने अपनी पोती के शिक्षक बनने के सपने को पूरा करने के लिए अपने पहचान आशियाने घर को ही बेच दिया और ऑटो रिक्शा में ही रहने लगे। अपनी पोती की पढ़ाई के लिए उस घर को भी बेच दिया जिसमे वह अपने परिवार के साथ रहा करते थे। ऐसा उन्होंने केवल इसीलिए किया ताकि उनकी पोती अपनी पढ़ाई पूरी करके सफल शिक्षक बन सके। इसके बाद उन्होंने बेघर हो कर अपनी ऑटो रिक्शा को ही घर बना लिया और अब उनका ऑटो में ही खाना-पीना और सोना होता है।

बुजुर्ग की कहानी ने कई दिलों को झकझोर कर रख दिया था। वहीं अब फंड इक्ट्ठा कर बुजुर्ग को 24 लाख का चेक सौंपा गया है, ताकि वह दोबारा एक घर खरीद सकें। देशराज ने कहा कि, मेरे साथ उसका एक भाग चला गया हो, लेकिन ज़िम्मेदारियों का इतना बोझ हो गया था, मेरे पास शोक करने का वक्त भी नहीं था। अगले दिन, मैं सड़क पर वापस आ गया, अपना ऑटो चला रहा था। दो साल बाद उनके दूसरे बेटे ने भी खुद ख़ुशी कर ली थी।

देसराज ने कहा अब मेरे पास बहुओं और चार बच्चों की जिम्मेदारी है, जिसकी वजह से मैं अभी भी काम कर रहा हूं। उनकी पोती जब 9 वर्ष की थी तो पैसे न होने के कारण स्कूल छोड़ने की स्थिति आ गई है। अब समझ नहि आता की कैसे दिक्कत का समाधान किया जाये।

एक दादा के अपनी पोती के लिए प्यार देखकर कई लोग इस बुजुर्ग की सहायता के लिए आगे आए हैं। सोशल मीडिया पर खबर Viral होने के बाद क्राउडफंडिंग पहल के माध्यम से 24 लाख रुपये इक्ट्ठा किए गए हैं और इन रुपयों का चेक ऑटो चालक को सौंप दिया गया है।

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