पति के इलाज के लिए पैसे इक्कठा करने, गरीब बुजुर्ग महिला ने नंगे पांव दौड़कर जीती मैराथन रेस

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Meet Lata Kare, The 68-Year-Old Grandmother Who Runs Marathons Wearing A Sari. Maharashtra 61 year-old Lata Kare runs barefoot, wins Baramati Marathon.

File Photo

Mumbai: बारामती, महाराष्ट्र की लता कारे पहली बार 2013 में चर्चा का विषय बनी थी। जब उन्होंने 61 साल की उम्र में नंगे पैर और साड़ी पहनकर अपने जीवन की पहली मैराथन दौड़ में हिस्सा लिया था। वह न तो सम्मान के लिए दौड़ीं और न ही किसी खोए हुए जुनून को पूरा करने के लिए दौड़ीं। 5000 रुपये का इंतेजाम करने के लिए मैराथन उनका अंतिम रास्ता था।

अपने पति की हृदय संबंधी समस्या के लिए एमआरआई स्कैन करवाने के लिए उनको पैसों की जरूरत थी। उन्होंने अपने आत्मसम्मान न खोते हुए खुद ही पैसों के इंतेजाम के लिए जुट गई। इस मुसीबत के समय उन्होंने हार ना मानते हुए रेस में हिस्सा लिया, उसने नुकीले पत्थरों पर कदम रखा, सड़क पर अपने पैरों को जला दिया, और उसकी टखने की लंबाई वाली साड़ी ने उनको मजिंल तक पहुचने में बहुत बाधा डाली।

उन्होंने संघर्ष जारी रखा और अपनी मंजिल की ओर प्रयास किया। लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ा, क्योंकि उसका एकमात्र लक्ष्य दौड़ जीतना था और उसने करके भी दिखाया। जैसे ही उसकी छाती लाल रिबन को छूती, उसके आंखों से आँसू की झड़ी लग जाती। लेकिन वह जल्दी से खुद को मजबूत कर गर्व से मंच पर जाकर पुरस्कार राशि एकत्र की।

हैद्राबाद स्थित एक फिल्म प्रोडक्शन कंपनी ने पतनज्योति क्रिएशन लताबाई को लेकर फिल्म बनने की इक्छा जाहिर की। उनके जीवन पर बनी फिल्म ने राष्ट्रीय पुरस्कार जीता था। क्षेत्रीय भाषा श्रेणी में फिल्म ‘लता भगवान करे-एक संघर्ष गाथा’ ने पुरस्कार जीता।

बुलढाणा जिले के महेकर की मूल निवासी लता ने अजीबोगरीब काम करके अपना जीवन व्यतीत किया। उसने अपनी तीन बेटियों की शादी कर दी। वह बारामती में रहने लगी। उनके पति भगवान हृदय रोग से पीड़ित थे और उनके इलाज के लिए धन जुटाने के लिए, उन्होंने स्थानीय मैराथन में हिस्सा लिया।

महाराष्ट्र के बारामती ज़िले के एक गांव में रहती हैं। अभी 68 साल की हैं। आज लता मैराथन रनर के नाम से जानी जाती हैं। साल 2014 तक कोई उनका नाम कोई नहीं जानता था, लेकिन उस साल कुछ ऐसा हुआ कि उन्होंने मैराथन रेस में हिस्सा लेकर जीत का परचम लहराया।उनकी जीत ने उनको एक नया मुकाम हासिल करा दिया। आज उन्हें हर कोई जनता है। दरअसल, उस साल लता के पति काफी बीमार हो गए थे। उनके इलाज के लिए पैसे नहीं थे। पैसे पाने के लिए ही लता ने मैराथन में हिस्सा लिया था।

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