बस चलाते वक़्त पिता को बेटी ने Call किया की पापा मै IAS अफसर बन गई: प्रीति हुड्डा की कहानी

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Preeti Hooda IAS
Meet Preeti Hooda from Haryana who achieved 288th rank the UPSC exam in 2017 and become an IAS officer. Her father is a bus driver in DTC.

Photo Credits: Twitter

Delhi: आये दिन देश की बेटियां नए नए सफलता के झंडे गाड़ रही है और बुलंदियों को छू रही है। ऐसे ही एक सफलता की कहानी आपको बहुत प्रेरणा देने वाली है। हर वर्ष UPSC के रिज़ल्ट आने के बाद संघर्ष के बाद मिली सफलताओं की कई स्टोरी देखने को मिलती हैं। आर्थिक और शारीरिक दिक्कतों के बावजूद अनेक लोग सफलता हासिल करते है।

आज आपको प्रीति हुड्डा से अवगत करवाते हैं। प्रीति हूडा ने हिंदी माध्यम से पढ़ाई करके सिविल सेवा परीक्षा पास UPSC की है। प्रीती ने एक हिंदी अखबार कोबताया की वे हरियाणा के बहादुरगढ़ के साधारण परिवार आती है। उन्होंने आगे कहा की मेरे पिता दिल्ली परिवहन निगम (DTC) की बस चलाते हैं।

उन्होंने आगे कहा की बचपन में कभी नहीं सोचा था कि सिविल सेवा की तैयारी करुँगी। इतने आगे तक पढ़ाई करने वाली मैं अपने परिवार की पहली लड़की हूं। प्रीती के मुताबिक़ पापा का सपना था कि मैं आईएएस बनू।, फिर मैं JNU Delhi आई और यहां इस बारे में अधिक पता चला कि UPSC की तैयारी कैसे की जाए। मैंने ये तैयारी एमफिल के बाद शुरू की। मेरा जब यूपीएससी का रिजल्ट आया, तब पापा DTC की बस चला रहे थे। पापा बहुत खुश हुए, मेरे पापा कभी मुंह पर तारीफ नहीं करते हैं।

इसके बाद इस बार पापा ने फोन पर बोला ‘शाबाश मेरा बेटा, मैं बहुत खुश हूं।’ एक लड़की होने के नाते जेएनयू में मुझे वो माहौल मिला कि मैं कॉन्फिडेंस के साथ सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर सकूं। JNU आपको एक प्लेटफॉर्म और आत्मविश्वास देता है कि अगर आप मेहनत करते हैं तो आप कोई भी मुकाम हासिल कर सकते हैं।

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प्रीती बताती है की जब वे जेएनयू आई थी, तो पहली बार इतनी आज़ादी से लड़कियों को खुले में घूमते देखा। यहां इतना सुरक्षित महसूस करती हूं, जितना अपने घर की गली में भी महसूस नहीं करती थी। जेएनयू में पढ़ाई के दौरान मुझ में बात करने का कॉन्फिडेंस भी आया।

प्रीती का कहना है की आपने आत्मविश्वास बिलकुल मत खोइए, जो लोग सब कुछ वक्त के हिसाब से करते हैं, उन्हें दिक्कत हो सकती है। तैयारी करते वक्त मस्ती करें, फ़िल्में भी ज़रूरी हैं. कॉन्फिडेंस के साथ धीरे-धीरे सिलेबस को पूरा कीजिए। 10 या 12 घंटे तैयारी करने से अच्छा है कि थोड़ा सोचकर दिशा तय करके पढ़ाई कीजिए। बहत सारी किताबें नहीं पढ़नी चाहिए। सीमित पढ़ें और बार-बार पढ़ें।

आगे वे बताती है की जब मैंने दूसरी बार प्रीलिम्स एग्जाम दिया था, तब बहुत निराशा हुई थी, क्योंकि तब समझ नहीं आया कि कहां गलती हुई। ऐसे में फिर धैर्य न खोने की सीख काम आती है। आज देश के सबसे बड़े एग्जाम मै सफलता पाने वाली देश की बेटी लोगो को सफलता हासिल करने के गुण भी ख़ुशी से बता रही है।

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