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Delhi: देश के लिए जनगणना की बहुत अधिक महत्वता है और इससे स्थितियों की सही जानकरी का भी आंकलन हो जाता है। आज का यह मामला वर्ष 2021 में होने वाली जनगणना में ओबीसी जनसंख्या की गणना (Enumeration of OBCs) के संबंध में है। यह खबर देश के सर्वोच्च्य न्यालय सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के सूत्रों से प्राप्त हुई है। देश की जनसंख्या में ओबीसी जनसंख्या एक बहुत पड़े अनुपात में होने का अनुमान है। ऐसे में ओबीसी जनगणना की भी महत्वता को समझने की जरुरत है।
आपको बता दे की अंतिम जनगणना वर्ष 1931 में आयोजित की गई थी और आज तक ओबीसी (OBC) की सही जनसंख्या को सूचीबद्ध करने वाली कोई भी जनगणना (Census) नहीं की गई है, जो कि सामाजिक न्याय और अनुच्छेद 15(4) के संवैधानिक जनादेश को अस्वीकार करने का कारण बन रही है, अनुच्छेद 16(4), संविधान के अनुच्छेद 243 डी और अनुच्छेद 243 टी। सर्वोच्च न्यायालय भारत के संघ, जनगणना आयुक्त के कार्यालय और पिछड़ा वर्ग के राष्ट्रीय आयोग के खिलाफ नोटिस जारी करने की बात कर रहा था।
सुप्रीम कोर्ट में यह मामला याचिकाकर्ता टिंकू सैनी (Tinku Saini) ने दायर (PIL) किया था और वकील सोनिया सैनी (Advocate Sonia Saini) और अधिवक्ता आकृति जैन ने प्रतिनिधित्व किया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में संज्ञान लिया है और आदेश भी दिया है। आने वाले समय में जल्द ही देश की ओबीसी जनसंख्या (OBC Population) का सही सही आकलन ओबीसी जनगणना (Enumeration of OBC) के माध्यम ने होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
जानकरी हो की देश में हर दस साल बाद जनगणना का काम साल 1872 से किया जा रहा है। जनगणना 2021 देश की 16 वीं और आजादी के बाद की 8 वीं जनगणना होगी। जनसंख्या गणना आवासीय स्थिति, सुविधाओं और संपत्तियों ,जनसंख्या संरचना, धर्म, अनुसूचित जाति/जनजाति, भाषा, साक्षरता और शिक्षा, आर्थिक गतिविधियों, विस्थापन और प्रजनन क्षमता जैसे विभिन्न मानकों पर गांवों, शहरों और वार्ड स्तर पर लोगों की संख्या के सूक्ष्म से सूक्ष्म आंकड़े उपलब्ध कराने का सबसे बड़ा स्रोत है। जनगणना कानून 1948 और जनगणना नियम 1990 जनगणना के लिए वैधानिक फ्रेमवर्क उपलब्ध कराता है।
बता दे की इससे पहले खबर आई थी की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने भारत की जनगणना-2021 की प्रक्रिया शुरु करने तथा राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) को अद्यतन करने की मंजूरी दे दी थी। जनगणना प्रक्रिया पर 8754.23 करोड़ रूपए तथा एनपीआर के अध्ययतन पर 3941.35 करोड़ रूपए का खर्च आएगा।
देश की पूरी आबादी जनगणना प्रक्रिया के दायरे में आएगी जबकि एनपीआर के अद्यतन में असम को छोड़कर देश की बाकी आबादी को शामिल किया जाएगा। भारत की जनंसख्या गणना प्रक्रिया दुनिया की सबसे बड़ी जनंसख्या गणना प्रक्रिया है। देश में जनगणना का काम हर 10 साल बाद होता है। ऐसे में अगली जनसंख्या गणना 2021 में होनी है। जनसंख्या गणना का यह काम दो चरणों में किया जाएगा।
राष्ट्रीय महत्व के इस बड़े काम को पूरा करने के लिए 30 लाख कर्मियों को देश के विभिन्न हिस्सों में भेजा जाएगा। जनगणना 2011 के दौरान ऐसी कर्मियों की संख्या 28 लाख थी। डेटा संकलन के लिए मोबाइल ऐप और निगरानी के लिए केन्द्रीय पोर्टल का इस्तेमाल जनसंख्या गणना का काम गुणवत्ता के साथ जल्दी पूरा करना सुनिश्चित करेगा। मंत्रालयों के अनुरोध पर जनसंख्या से जुड़ी जानकारियां उन्हें सही, मशीन में पढ़े जाने लायक और कार्रवाई योग्य प्रारूप में उपलब्ध करायी जाएगी।



