निसंतान मालिक के देहांत पर पालतू बछड़ी ने मुखाग्नि दी और आंसुओं से अपना दुख बयां किया: Video

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cow viral video
Jharkhand calf cried on cremation of its owner. Cow doing cremation of man video went viral. This little cow calf shown his emotions.

Photo Credits: Twitter Video Crap Image

Ranchi: मानवता और प्यार केवल इंसानों में ही देखने को नहीं मिलता यह भावनाएं जानवरों में ही मैं भी कूट-कूट कर भरी हुई होती है। बस उनकी भावनाओं को समझने वाला होना चाहिए। आज हम जिस वायरल वीडियो की बात कर रहे हैं, वह एक मानव और एक जानवर के अटूट प्रगांठ संबंधों की कहानी है।

यह वायरल वीडियो झारखंड के रांची शहर के एक निसंतान व्यक्ति का है, जिसने एक बछड़े का पालन पोषण अपने बच्चों के समान किया। उस व्यक्ति ने अपनी सारी मोहब्बत उस बछड़े पर लुटा दी थी। और एक पिता बन कर उसकी देखभाल की।

एक समय ऐसा भी आया कि उसने 80 साल की उम्र में अपने देह को त्याग दिया और गांव वाले उस व्यक्ति का अंतिम संस्कार करने के लिए श्मशान घाट ले गए और जब उस बछड़े को इस बात का ज्ञान हुआ।

तब वह अपनी रस्सी को तोड़कर श्मशान घाट की तरफ तेज रफ्तार से भागा और अपने मालिक के निंसप्राण देह के सामने आकर जोर-जोर से चिल्लाने लगा और उसकी आंखों से आंसू बहने लगे। जैसे वह बेजुबान जानवर कह रहा हो कि उठो मालिक मैं आपके बगैर कैसे रहूंगा।

इंसानो का जानवरो की प्रति प्रेम और जानवरो का अपने मालिक के प्रति बफादारी

आज के समय में इंसान अपनी ही समस्याओं से इतना जूझ रहा है। कि उसे किसी अन्य का ध्यान ही नहीं रहता और लोगों को अपने ही काम से मतलब रहता है। अधिकतर लोग इतने स्वार्थी और मतलबी हो चुके हैं की वह केवल अपने बारे में ही सोचते है।

उन्हे दूसरों के दुख और तकलीफों से कोई लेना देना नही रहता और इन्ही लोगो में से ऐसे कई लोग हैं। जो केवल अपने अलावा भी दूसरों के दुख दर्द में साथ देते हैं और उनकी तकलीफों को कम करने की कोशिश करते हैं।

आज के समय में ऐसे ही लोगों के कारण यह दुनिया कायम है। इन लोगो में दया और प्रेम की भावना कूट कूट कर भरी होती है। जो अपने प्रेम को जानवरो पर भी भरपुर मात्रा में लूटाते है और जानवर भी अपने मालिक के प्रति उतना ही वफादार होता है, जितना कि एक इंसान नहीं हो सकता। उसकी वफादारी अपने मालिक के प्रति असीमित और अटूट होती है, जिसका उदाहरण एक वायरल वीडियो द्वारा सभी देख चुके हैं।

निःसंतान मालिक का पुत्र बनकर शमशान घाट पहुंचा बछड़ा

सोशल मीडिया पर एक इंसान और जानवर के अटूट प्रेम का जो वीडियो वायरल हो रहा है। उसके अनुसार वह निसंतान व्यक्ति चौथी गांव का रहने वाला मेवा लाल ठाकुर है। जिसकी उम्र लगभग 80 वर्ष थी और जब उसकी मृत्यु हुई, तब गांव वाले उसका अंतिम संस्कार करने के लिए दूसरे गांव से होकर श्मशान घाट ले गए मेवा लाल ठाकुर की कोई औलाद नहीं थी।

वह एक निसंतान व्यक्ति थे। तब उन्होंने अपने प्रेम को जानवरों पर लुटाना शुरू किया और एक बछड़े को अपने बच्चों की तरह पाला और जब उनकी मृत्यु हुई, तो उस बछड़े ने भी अपने मालिक को अपना पिता समझा। जब गांव वाले उसे दूसरे गांव के श्मशान घाट ले गए, तब वह अपने घर से भागा और मालिक के पास जाकर जोर-जोर से विलाप करने लगा।

अंत में उसने अपने बेटे का फर्ज अदा किया। उस बछड़े ने अपने मालिक की निस प्राण देह को चूमा चाटा और उसके अर्थी के आगे चारों तरफ घुमा और अपने मुंह से अग्नि को छूकर अपने मालिक का अंतिम संस्कार किया। गांव वाले भी उसके बछड़े के प्यार को देखकर उनकी आंखें नम हो गई।

3 महीने पहले अन्य किसान को बेच दिया था बछड़े को

मेवा लाल ठाकुर एक बहुत ही सभ्य और दयालु प्रवृत्ति के व्यक्ति थे। जब भगवान ने उन्हें कोई औलाद नहीं दी, तो उन्होंने जानवरों को अपनी औलाद समझकर पाला उन्होंने एक गाय को पाला और उस गाय को खूब प्यार दुलार दिया।

उस गाय ने एक बछड़े को जन्म दिया। जिसे मेवालाल ठाकुर ने अपने बेटे की तरह प्यार दुलार दिया। इस प्रकार उनका जीवन चलता रहा। उसके बाद फिर जब उन्हें अपनी उम्र का भान हुआ, तो उन्हें लगा कि मेरे बाद इन जानवरों का क्या होगा।

इसलिए उन्होंने समय रहते उस बछड़े और गाय को दूसरे गांव के एक किसान को बेच दिया, ताकि वह लोग दूसरे मालिक के पास अच्छे से और सुरक्षित रह सकें। किंतु उस बछड़े की लगन देखो की वह अपने दूसरे मालिक को छोड़कर अपने गांव आकर मेवा लाल ठाकुर के पास आ गया।

ग्राम वासियों ने बछड़े को मेवा लाल ठाकुर का पुत्र मानकर उससे करवाया अंतिम संस्कार

जब मेवालाल की मौत हुई तब ग्राम वासियों ने उसके अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट ले गए। चुकी मेवलाल ठाकुर बेओलाद थी, तो गांव के लोगों ने ही सोचा कि हम लोग ही अंतिम संस्कार कर देंगे।

जब मेवलाल ठाकुर का पालतू बछड़ा भागते हुए श्मशान घाट पहुंचा और अपने मालिक की अर्थी के सामने जोर जोर से चिल्लाने और रोने लगा, तब गांव वालों को समझ में आया थी। की यह अपने मालिक के लिए दुखी है। इसीलिए उन्होंने बछड़े को मेवा लाल ठाकुर का पुत्र माना और बछड़े के हाथों अंतिम संस्कार करवाया गया।

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