
Image Credits: Twitter Video Crap
Modhera village/Mehsana, Gujarat: भारत के प्रधानमंत्री के गृह राज्य गुजरात (Gujarat) की प्राचीनता और खूबसूरती तो जगज़ाहिर है। गुजरात के कई प्राचीन मंदिर रहस्य से भरे पड़े है। गुजरात में पिछले एक सप्ताह से कई जगहों पर लगातार भारी बारिश हो रही है, जिसकी वजह से स्थिति गंभीर हो चुकी हैं। कई बांध ओवर फ्लो हो चुके हैं। तो वहीं मेहसाणा जिले (Mehsana District) मे भारी बारीश के बाद मोढ़ेरा सूर्य मंदिर (Modhera Sun Temple) का द्रश्य बहुत ही अध्भुत हो गया है।
गुजरात के सुन्दर शहर मेहसाणा जिले में दो दिन पहले की बारिश का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें मोढ़ेरा सूर्य मंदिर देखने में ऐसा प्रतीत हो रहा है, मानो सूर्य भगवान को आसमान से देवता जल अर्पित कर रहे हों। लोग कह रहे है की यह सीन तो केवल स्वर्ग का ही हो सकता है। बारिश का पानी सूर्य कुंड में झरनों की तरह गिर रहा है। बारिश के साथ, नया पानी सुर्य कुंड में आ गया। जो की किसी प्राकृतिक उपहार से कम नहीं है।
आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मोढ़ेरा सूर्य मंदिर के वायरल विडियो को अपने ट्विटर हैंडल से भी शेयर किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कुछ दिन पहले ही अपने आवास पर राष्ट्रीय पक्षी मोर का भी वीडियो सोशल मीडिया के विभिन्न माध्यमों से देशवासियों के साथ साझा किया था।
गुजरात के मोढेरा में यह सूर्य मंदिर स्थित है, जो सोलंकी राजवंश के राजाओं ने 10 वीं सदी में बनवाया था। मोढेरा सूर्य मंदिर गुजरात के मेहसाना जिले के ‘मोढेरा’ नामक गांव में पुष्पावती नदी के किनारे स्थित है। बता दे की वर्तमान समय में यह भारतीय पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है और इस मंदिर में पूजा करना मना है।
इस मंदिर परिसर के मुख्य तीन मुख्या भाग हैं, जो की गूढ़मण्डप (मुख्य मंदिर), सभामण्डप तथा कुण्ड (जलाशय)। इसके मण्डपों के बाहरी भाग तथा स्तम्भों पर अत्यन्त सूक्ष्म नक्काशी की गयी है। कुण्ड में सबसे नीचे तक जाने के लिए सीढ़ियाँ बनी हैं और कुछ छोटे-छोटे मंदिर भी हैं।
मोढेरा सूर्य मंदिर गुजरात के पाटन नामक स्थान से 30 किलोमीटर दक्षिण की ओर मोढेरा गॉव में निर्मित है। यह सूर्य मन्दिर विलक्षण स्थापत्य और शिल्प कला का बेजोड़ उदाहरण है। इस मंदिर के निर्माण में जोड़ लगाने के लिए कहीं भी चूने का प्रयोग नहीं किया गया है।
ईरानी शैली में बने इस मंदिर को सोलंकी वंश के राजा भीमदेव प्रथम ने 1026 ई. में दो हिस्सों में बनवाया था। जिसमें पहला हिस्सा गर्भगृह का और दूसरा सभामंडप का है। गर्भगृह में अंदर की लंबाई 51 फुट, 9 इंच और चौड़ाई 25 फुट, 8 इंच है। मंदिर के सभामंडप में कुल 52 स्तंभ हैं।
इन स्तंभों पर विभिन्न देवी-देवताओं के चित्रों के अलावा रामायण और महाभारत के प्रसंगों को बेहतरीन कारीगरी के साथ दिखाया गया है। इन स्तंभों को नीचे की ओर देखने पर वह अष्टकोणाकार और ऊपर की ओर देखने से वह गोल नजर आते हैं। मंदिर का निर्माण कुछ इस प्रकार किया गया था कि सूर्योदय होने पर सूर्य की पहली किरण मंदिर के गर्भगृह को रोशन करे। सभामंडप के आगे एक विशाल कुंड है जो सूर्यकुंड या रामकुंड के नाम से प्रसिद्ध है।
सोलंकी राजा सूर्यवंशी थे, और सूर्य को कुलदेवता के रूप में पूजते थे। इसीलिए उन्होंने अपने आद्य देवता की पूजा के लिए इस भव्य सूर्य मंदिर बनाने का निश्चय किया, इसके चलते मोढ़ेरा के सूर्य मंदिर का निर्माण हुआ। विदेशी आक्रांताओं के हमले के क्रम में अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के दौरान मंदिर को काफी नुकसान पहुंचा, उसने मंदिर की मूर्तियों को भी फोड़ा, इसीलिए वर्तमान समय में इस मन्दिर में पूजा करना निषेध है।
Modhera’s iconic Sun Temple looks splendid on a rainy day 🌧!
Have a look. pic.twitter.com/yYWKRIwlIe
— Narendra Modi (@narendramodi) August 26, 2020
मोढ़ेरा के मंदिर का जिक्र कई पुराणों में किया गया है। जैसे स्कंद पुराण और ब्रह्म पुराण जिनमें कहा गया है कि प्राचीन काल में मोढ़ेरा के आसपास का पूरा क्षेत्र धर्मरन्य के नाम से जाना जाता था। पुराणों के अनुसार ये भी बताया गया है कि भगवान श्रीराम ने रावण के संहार के बाद अपने गुरु वशिष्ट को एक ऐसा स्थान बताने के लिए कहा जहां जाकर वह आत्मशुद्धि कर सकें और ब्रह्म हत्या के पाप से भी मुक्ति पा सकें। तब गुरु वशिष्ठ ने श्रीराम को यहीं आने की सलाह दी थी।
जानकारी हो की भारत में आधुनिक युग में सूर्य मंदिर नहीं बने हैं, लेकिन 10 वीं 11वीं सदी तक खूब बने हैं। गुजरात के मोढेरा में इस 1000 साल पुराने सूर्य मंदिर की नक्काशी और मंदिर के पत्थरों पर बनाई गई प्रतिमा को देखकर लोग हैरान रह जाते है और थम से जाते है। उस वक़्त और उस कलाकार से मिलने की इक्षा उत्पन्न होती हैं, जिसने इसका निर्माण किया है।



