
Lucknow: हम कई बार देखते है कि महिलाओं में कुछ काम करने की इक्षा तो होती है, वो आत्मनिर्भर बनाना चाहती है, लेकिन गांव की रूढ़िवादी सोच उन्हें आगे नही बढ़ने देती। जिस कारण वो अपने सपनो को पूरा नही कर पाती है, घर के काम काज में ही अपनी जिंदगी गुजार देती है।
इन सबसे अलग कई महिलाएं ऐसी होती है, जो गांव की सोच को तोड़ अपने सपनो को पूरा करने में लग जाती है। क्योंकि जब तक सफ़लता नही मिलती तब तक सभी लोग ताने देने से पीछे नही हटते, लेकिन जिस दिन कामयाबी मिल जाती है। उस दिन सारा गांव खुशी के जश्न में डूब जाता है। ऐसी ही एक बेटी का कहानी से रूबरू करा रहे, जिसने अपने मजबूत होसलो से सफलता के झंडे गाड़ दिये।
आज हम बात कर रहे हैं, लखनऊ निवासी बिटाना देवी (Bitana Devi) की। बिटाना का कहना है कि “मेरा जन्म रायबरेली के समीप सेहगो ग्राम में हुआ। मेरे स्वर्गीय पिताजी राम नारायण एक किसान थे। खेती बाड़ी से ही घर का ख़र्चा चलता था।मेरी एक बहन और दो भाई है। मेरी शादी लखनऊ के निगोहा के रहने वाले हरिनाम से की गई।” फिर जिंदगी आगे बढ़ी।
बिटाना देवी (Bitna Devi) उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के मोहनलालगंज अंतर्गत निगोहा के मीरख नगर ग्राम की रहने वाली हैं। वे सिर्फ पांचवी कक्षा तक ही पढ़ी हैं और डेयरी उद्योग चलाती हैं। 28 वर्षों पूर्व मात्र दो गायों से ही उन्होंने इस काम को प्रारंभ की थी। वे बताती हैं कि 1982 मेरे घर में पहला बेटा पैदा हुआ।
उस वक़्त मेरे पिता ने बच्चे को दुग्ध पिलाने के लिए एक दिन बछड़ा खरीद कर दिया। उसकी मैंने काफी सेवा की और वे बड़ी होकर 2 लीटर दुग्ध देने लगी। कुछ दुग्ध बेटा पीता था, बाकि जो दूध था उसका घर के लोग दही जमा कर खाते थे। कुछ दिनों पश्चात हमने एक और गाय खरीद ली।
वर्ष 1990 में एक दिन हमारे घर पर पराग के प्रभारी यूवी सिंह पति से मिलने के लिए आये। उन्होंने पति को गाय के साथ भैंस खरीदकर डेयरी उद्योग प्रारंभ करने की सलाह दी। उसके बाद से ही हमने एक एक कर गाय और भैसों खरीदना प्रारंभ कर दिया।
Bitana devi from meerakhnagar, started a dairy business 28 years ago with just 2 cows and now she owns around 40 cow and Buffaloes earn around 15 lakh a year #dairy pic.twitter.com/Qym9h3HzTa
— BSSITM LUCKNOW (@bssitmlko) February 2, 2019
बिटाना (Bitana Devi) ने गाय और भैंस का दुग्ध बेचकर फिर एक गाय खरीद ली। उनकी डेरी से जो भी आए होती थी उससे वे गाय भैंसे खरीद लेती थीं, इस प्रकार से लगातार उनके पास गाय, भैस की संख्या बढ़ती गयी। अभी बिटाना ने आपनी परिश्रम के बल पर डेयरी उद्योग को अति विशाल कर लिया है और अब उनके तकरीबन 35 दूध देने वाले पशु हैं।
वे प्रतिदिन प्रातः 5 बजे उठकर मवेशियों को चारा और जल देकर फिर उनका दूध (Milk) निकालती हैं। दूध निकालने में लगभग उन्हें डेढ़ से 2 घंटे तक का समय लगता हैं, फिर उस दूध को डेयरी तक भी वो ही लेकर जाती हैं।
कमाती हैं सालाना 15 से 20 लाख रुपए
बिटाना बताती हैं कि मेरे पास इस समय कुल 35 गाय और भैंसे है। मैं वार्षिक 56 हज़ार लीटर के आसपास दूध बेच लेती हूँ। दूध और खाद से हर वर्ष 15 से 20 लाख रूपये तक कमाई हो जाती है। निगोहा, मोहनलालगंज, से लेकर लखनऊ के आस-पास के बहुत से ग्रामीण क्षेत्रों और दुकानों में मेरे डेयरी फ़ार्म से प्रतिदिन तकरीबन 5 हज़ार लीटर दूध सप्लाई होता है।
Invited Bitana Devi (5th pass buisness woman) for telling her motivational story at our college premises.@AnandShekhar08 @bssitmlko @RAVIKANTRAIAMIE @mhrd_innovation pic.twitter.com/vR3WhD8zT3
— BSSITM LUCKNOW (@bssitmlko) October 31, 2019
Bitana Devi (5th pass buisness woman) for telling her motivational story at a college premises. Bitana devi from Meerakhnagar, started a dairy business 28 years ago with just 2 cows and now she owns around 40 cow and Buffaloes earn around 15 lakh a year.
वे आगे बताती हैं कि अब हमारा निर्धारित लक्ष्य 100 गाय और भैंसें खरीदना हैं। बिटाना को प्रोत्साहित करने हेतु 14 फरवरी 2018 को कानपुर के चंद्र शेखर आजाद विश्वविद्यालय में आयोजित एक समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें उत्कृष्ट कृषक अवार्ड देकर सम्मानित किया।



