Sunday, December 5, 2021
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दीवाली 2019: भगवान गणेश की कैसी मूर्ति लेना शुभ है, बैठी, लेटी या खड़ी मुद्रा वाली, जानें

Ganesha Lucky statue

दिवाली 2019 पर माता लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की भी पूजा का विशेष महत्‍व होता है।पौराणिक मान्यता है कि धन की देवी की पूजा समृद्धि के लिए करते हैं वहीं भगवान विध्नहरण गणेश की पूजा सभी विघ्‍नों को हरने के लिए करते हैं। बाजार में भगवान गणेश की विभिन्‍न मुद्राओं वाली मूर्ति मिलती हैं।

इनमें लेटी हुई, बैठी हुई और खड़ी मुद्रा में अधिकतर मूर्ति मिलती हैं। ऐसे में यह जान लेना जरूरी हो जाता है कि आपके लिए कौन सी मुद्रा वाली प्रतिमा लेनी चाहिए घर में किस कोने में विराजमान करनी चाहिए। पंडित के अनुसार घर में आनन्द और सुख का स्थायित्व बनाये रखने के लिए गणेश जी ऐसी मूर्ति लानी चाहिए जो आसन पर स्थापित हो सके।

गणेश जी की मूर्ति विशेष होती है

इसके अतिरिक्त लेटे हुए मुद्रा में हों तो ऐसी मूर्ति को घर में लाना शुभ होता है। वहीं सिंदूरी रंग वाले गणेश को समृद्घि दायक का प्रतीक माना गया है, इसलिए इनकी पूजा व्यवसायियों और गृहस्थों के लिए शुभ दायक माना गया है।

घर में उन्नति, आनंद और उत्साह के लिए नृत्य मुद्रा वाली गणेश जी की मूर्ति लानी चाहिए। इस प्रतिमा की पूजा से विद्यार्थियों और कला जगत से जुड़े लोगों को विशेष लाभ प्राप्त होता है। इससे घर में आनन्द और धन की भी बढोत्तरी होती है।

भगवान गणेश मूर्ति की स्थापना ऐसे करें

घर के ब्रह्म स्थान या पूर्व दिशा या फिर ईशान कोण पर गणेश जी को स्थापित करना मंगलकारी और शुभ माना जाता होता है। पंडित से मिली जानकारी के मुताबिक इस बात का विशेष ध्यान रखें कि गणेश जी की सूंड उत्तर दिशा की ओर हो।

भगवान गणेश जी को कभी भी दक्षिण या नैऋत्य कोण में नहीं रखना चाहिए। घर में जहां भी गणेश जी को स्थापित कर रहे हों वहां कोई अन्य गणेश जी की मूर्ति नहीं हो। अगर आमने-सामने गणेश जी मूर्ति होगी तो आपके लिए शुभ संकेत नही देगी।

भगवान गणेश जी की प्रतिमा बैठी हुई मुद्रा में ही स्थापित करना चाहिए। भगवान गणेश जी की पूजा भी बैठकर आसान पर करनी चाहिए, जिससे व्यक्ति की बुद्धि विवेक स्थिर बनी रहती है।

शास्त्रों के मुताबिक गणेश जी की प्रतिमा बैठी हुई मुद्रा में ही विराजमान करना चाहिए। प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा आसान पर बैठकर ही की जाती है। खड़ी प्रतिमा की पूजा भी खड़े होकर करनी पड़ती है, जो शास्त्र निषेध माना गया है।

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