Wednesday, April 1, 2020
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कमलनाथ की मध्यप्रदेश सरकार की सत्ता खिसकी समझो, ज्योतिरादित्य सिंधिया पड़े भारी

Madhya Pradesh Congress Govt
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Jabalpur, Madhya Pradesh: MP में राजनैतिक तूफान आया है, BJP और Congress में खलबली मची है। मध्य प्रदेश में राजनैतिक बवाल के बीच कांग्रेस के एक विधायक ने इस्तीफा दे दिया है। खबर आ रही है की मंदसौर से सुवासरा से विधायक हरदीप सिंह डंग (Hardeep Singh Dang) ने विधानसभा अध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंपा है। हरदीप सिंह डंग उन चार विधायकों में शामिल हैं, जिनको बेंगलुरु में रखे जाने की बात सामने आ रही है।

राजनैतिक हंगामे के बीच एक व्यक्ति शांत और इस विवाद से दूर है, जिसकी चर्चा भी मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) की सियासत में खूब है। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार पर संकट है, CM Kamalnath समेत Congress पार्टी के सभी नेता सरकार बचाने के लिए एकजुट हैं। कांग्रेस के नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) इस प्रकरण में बिल्कुल शांत और अलग हैं। ऐसे में कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं कि सिंधिया इस बवाल में भी शांत क्यों हैं।

Madhya Pradesh Congress MLA Hardeep Singh Dang

कांग्रेस में कलह ज्योतिरादित्य सिंधिया की हार के बाद ही शुरू हो गई थी। गुना-शिवपुरी से हार के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया कुछ दिन तक तो मौन रहे। कुछ महीने बाद वह मध्यप्रदेश में एक्टिव हो गए। सिंधिया के एक्टिव होते ही उनके लोग उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाने की मांग करने लगे। सिंधिया को पॉवर कॉरिडोर में जगह नहीं मिली लेकिन वह लगातार इसके लिए संघर्ष कर रहे हैं। इस मांग के बाद से ही कांग्रेस में कलह है, सिंधिया प्रदेश में हुए उपचुनाव से भी खुद को अलग रखा।


Potitical Crisis Of MadhyaPradesh Government. Can Jyotiraditya Scindia be the new chief minister.

राजनैतिक घमासान में ज्योतिरादित्य सिंधिया की भूमिका बहुत मायने रखती है। विवाद की शुरुआत के बाद अभी तक ज्योतिरादित्य सिंधिया का एक बयान आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि बीजेपी की यह पुरानी आदत है। उसके बाद से वह चुप हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या ऐसे दौर में भी कांग्रेस में गुटबाजी हावी है।

Jyotiraditya Scindia Twitter Bio

शांत बैठे ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक उन्हें राज्यसभा भेजने की मांग कर रहे हैं और प्रदेश अध्यक्ष बनाने की भी। इसे लेकर अपनी सरकार के खिलाफ सिंधिया हल्ला भी बोलते रहे हैं। लेकिन पार्टी की तरफ से उनके समर्थकों की मांग पर कभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। इस वजह से मध्यप्रदेश में कमलनाथ, दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया में कभी समन्वय स्थापित नहीं हुआ।

उनके खेमे के लोग भी बहुत सक्रिय नहीं है। सिंधिया की नाराजगी और अनदेखी की खबरों पर कमलनाथ सरकार के वरिष्ठ मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि पार्टी में ज्योतिरादित्य सिंधिया की कोई अनदेखी नहीं हो रही है। वह हमारे साथ हैं। इस बीच खबर यह भी है कि सिंधिया समर्थक मंत्रियों की दिल्ली में बैठक भी हुई है।

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सिंधिया खेमे के तीन विधायक वहीं, इस प्रकरण में सिंधिया कथित रूप से संदेह के घेरे में भी हैं। हॉर्स ट्रेडिंग के खेल में चंबल अंचल के करीब पांच विधायक शामिल थे। इन 5 विधायकों में 3 विधायक रघुराज सिंह कंसाना, कमलेश जाटव और रणवीर जाटव, ज्योतिरादित्य सिंधिया के कट्टर समर्थक माने जाते हैं।

ऐसे में सवाल है कि क्या अपने लोगों पर भी ज्योतिरादित्य सिंधिया की पकड़ ढिली हो रही है या फिर अपने आका की अनदेखी की वजह से उनके गुट के विधायक इस तरफ के फैसले लेने पर मजबूर हो गएं। ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे के मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया ने सरकार पर बड़ा हमला किया था। उन्होंने कहा था कि कमलनाथ जी की सरकार को संकट तब होगा जब हमारे नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया जी की उपेक्षा या अनादर सरकार करेगी।

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