Thursday, July 2, 2020
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कोठारी बंधुओं ने अयोध्या विवादित ठांचे के गुम्बद पर भगवा झंडा फहराया था, आज माँ को गर्व है

Kothari Brothers of Ram Mandir
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Image Credits: Twitter

Ayodhya, Uttar Pradesh: अयोध्या विवादित स्थल के चारों ओर और अयोध्या शहर उत्तरप्रदेश PAC के लगभग 30 हजार जवान नियुक्त किए गए थे। इसी दिन बाबरी मस्जिद के गुंबद पर शरद 20 साल और रामकुमार कोठारी 23 साल नाम के भाइयों ने मिलकर भगवा झंडा फहराया। 21 से 30 अक्टूबर 1990 तक अयोध्या में लाखों की तादात में कारसेवक एकजुट हो गए थे। सब विवादित स्थान की तरफ जाने की प्लांनिग में थे।

विवादित स्थल के चारों ओर बहुत अधिक सुरक्षा थी। अयोध्या में कर्फ्यू लगने के बाद भी सुबह करीब 10 बजे चारों दिशाओं से बाबरी मस्जिद की ओर सेवक आगे कदम रखने लगे। इनकी निगरानी कर रहे थे विनय कटियार, अशोक सिंघल, उमा भारती जैसे नेता। विवादित स्थल के चारों ओर और अयोध्या शहर में UP PAC के तकरीबन 30 हजार जवान तैनात कर दिए गए थे।

कोठरी भाइयो इस इस कारण याद किया जाता है

इसी दिन बाबरी मस्जिद के गुंबद पर शरद 20 साल और रामकुमार कोठारी 23 साल नाम के भाइयों ने भगवा झंडा फहरा दिया था। सेवको और साधु-संतों ने 11 बजे सुरक्षाबलों की उस गाड़ी को अपने कब्जे में कर लिया जिसमें पुलिस ने सेवकों को गिरफ्तार करके शहर के बाहर छोड़ने के लिए तैयार की थी। इन बसों को हनुमान गढ़ी मंदिर के समीप खड़ा किया गया था।

इसी बीच, एक साधु ने बस के ड्राइवर को धक्का देकर नीचे गिरा दिया। इसके बाद वो स्वंय ही बस की स्टीयरिंग पर बैठ गया। बैरिकेडिंग तोड़ते हुए बस विवादित स्थल की ओर तेजी से बढ़ी। बैरिकेडिंग टूटने से मार्ग खुला तो 5000 हजार से अधिक सेवक विवादित स्थल तक आसानी से पहुंच गए।

उस समय उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव थे

मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) उस समय उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री थे। उनका स्पष्ट रूप से निर्देश था कि मस्जिद को कोई हानि नहीं पहुंचना चाहिए। पुलिस को पहले साफ तौर पर निर्देश दिया गया था कि जनता को भागने के लिए केवल आंसू गैस के गोले का ही प्रयोग किया जाए। लेकिन, बैरिकेडिंग टूटने के बाद सेवक विवादित ढांचे के गुंबद पर चढ़ गए। वहां, कोठारी बंधुओं ने गुम्बद में चढ़कर भगवा झंडा फहरा दिया।

इसके बाद पुलिस ने सेवकों पर फायरिंग करना प्रारंभ कर दिया। सरकारी आंकड़ों से मिली जानकारी के मुताबिक 30 अक्टूबर 1990 को अयोध्या में हुई फायरिंग में 5 सेवकों को अपनी जान गवानी पड़ी थी। CRPF के जवानों ने दोनों कोठारी भाइयों को मार मार कर खदेड़ दिया।

पुस्तक “अयोध्या के चश्मदीद” में है जानकारी

पुस्तक “अयोध्या के चश्मदीद” के मुताबिक 30 अक्टूबर को विवादित स्थल के गुंबद पर झंडा लहराने के बाद शरद और रामकुमार 2 नवंबर को विनय कटियार के नेतृत्व में दिगंबर अखाड़े की ओर से हनुमानगढ़ी की ओर जा रहे थे। जब पुलिस ने गोली चलाई तो दोनों पीछे भागकर लाल कोठी वाली गली के एक घर में जा छिपे, लेकिन थोड़ी देर बाद जब वे दोनों बाहर निकले तो पुलिस फायरिंग का शिकार बन गए। दोनों भाइयो ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

4 नवंबर 1990 को शरद और रामकुमार कोठारी का सरयू के घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। उनके अंतिम संस्कार में हजारों की संख्या में लोग उमड़ पड़े थे। दोनों भाइयों के लिए अमर रहे के नारे गूंज उठे थे। शरद और रामकुमार का आज भी परिवार पीढ़ियों से कोलकाता में निवास कर रहा है। मूलतः वे राजस्थान के बीकानेर जिले के निवासी थे। दोनों भाइयों के अंतिम संस्कार के करीब एक महीने बाद ही 12 दिसंबर को इनकी बहन का विवाह होने वाला था।

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