Tuesday, August 4, 2020
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केवल स्वदेशी कंपनियों को मिले MSME का दर्जा, RSS की सरकार से डिमांड का बड़ा कारण जानें

RSS Mohan Bhagwat
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Delhi: RSS अर्थात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ देश में स्वदेशी को बढ़ावा देने के लिए अब कमर कस चुका है। संघ से जुड़े संगठनों जैसे की स्वदेशी जागरण मंच (SJM) और लघु उद्योग भारती (LUB) ने अब डिमांड मांग कर दी है कि देश में केवल स्वदेशी उद्यमों को ही सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) का दर्जा मिलना चाहिए।

आपको बता दे की अभी अभी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लगभग 20 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज का ऐलान करते हुए कहा था कि MSME की परिभाषा में कुछ चेंज किया जाएगा। ऐसे में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ RSS के सह संगठनों लघु उद्योग भारती और स्वदेशी जागरण मंच ने कहा है की इस परिभाषा में इस चीज़ को भी सम्मलित किया जाए कि उद्यम स्वदेशी है, इसका सीधा मतलब ही की उसका मालिकाना हक़ भारतीय नागरिक के पास है और विदेशी उद्यमों को इस दायरे से बाहर रखा जाए।

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आपको बता दे की इस घोसणा से सूक्ष्म उद्यम में निवेश की सीमा 1 करोड़ रुपये और वार्षिक टर्नओवर की सीमा 5 करोड़ रुपये होने की जानकरी है। इसी तरह लघु उद्यमों के तहत निवेश सीमा 10 करोड़ रुपये तक और वार्षिक टर्नओवर की सीमा 50 करोड़ रुपये तक निर्धारित होगी। मध्यम उद्यम के तहत निवेश की सीमा 20 करोड़ रुपये तक और वार्षिक टर्नओवर 100 करोड़ रुपये तक होगा।

संघ के सह संगठनों इसके अलावा भी डिमांड की है कि MSME से ट्रेडर्स, सर्विस प्रोवाइडर और प्रोफेशनल्स को अलग रखा जाए ताकि स्वदेशी स्तर पर उत्पादन को बढ़ावा मिल सके। देश की केंद्र सरकार ने MSME को परिभाषित करने का काम अभी सुरक्षित रखा है। हालाँकि इसे निवेश और हर वर्ष के टर्नओवर के आधार पर परिभाषित किया जाने वाला है, संघ भी इस बात से सहमत बताया गया हैं। संह का कहना है की सरकार को यह भी नियम लाना चाहिए, जिससे केवल उन्हीं उद्यमों को MSME का दर्जा मिले, जिनका कण्ट्रोल भारतीय के पास हो। यह संघ की पहली डिमांड है।

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संघ के सह संगठनों के मुताबक इसमें उद्यमों के स्थान पर इंडस्ट्री को शामिल करना सही रहेगा। मैन्युफैक्चरिंग से अधिक जॉब और रोजगार के अवसर मिलते हैं, अतः हमें हमें उन्हें ही बढ़ावा देना चाहिए। गैर मैन्युफैक्चरिंग फर्म को यदि एमएसएमई दर्ज़ा देते हैं, तो ऐसे में सभी मुनाफे और प्रॉफिट वही ले जाएंगे। संघ के अनुसार केवल भारतीय उद्यमों को यह दर्जा दिया जाना चाहिए।

संघ का मानना है की ऐसा करने से देश के उद्द्योग और उत्पादन में विदेशी प्रभत्व समाप्त ही हो जायेगा और कंपनियों में भी भारतीय का प्रभुत्य बना रहेगा। यह देश के विकाश और आत्मनिर्भर भारत के अभियान के लिए जरुरी भी है। संघ के सह संगठनो की यह मांग करने का मुख्या उद्देश्य यह भी है की इससे ज्यादा से ज्यादा भारतियों को जरोजगार और नौकरिया हासिल हो।


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