Thursday, May 28, 2020
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कोरोना जमात के चलते निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर यह करने की मांग उठी: Ek Number

Nizamuddin Railway Statioin Name Change
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Nizamuddin, Delhi: देश की राजधानी दिल्ली में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज़ों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। दिल्ली में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या अब 669 हो गई है। इनमें 426 तब्लीग़ी जमात मरकज़ से जुड़े लोग हैं। आपको बता दें की पिछले 24 घंटों में दिल्ली में 93 नए कोरोना मामले सामने आए हैं, जो की सभी मामले निजामुद्दीन मरकज़ के हैं। मतलब नए सभी 93 मामले मरकज के लोगों के हैं।

आपको बता दें की निजामुद्दीन मरकज इलाके से 2348 लोगों को निकाला गया था, इनमें से 536 अस्पताल में भर्ती किए गए थे, जबकि 1810 क्वारन्टीन सेंटर में रखे गए थे। अस्पताल में भर्ती किए गए लोगों में से 335 लोग पॉजिटिव हुए थे। इसके बाद क्वारंटीन में रखे लोगों के कोरोना से संक्रमित होने से आंकड़ा तेज़ी से बढ़ना आरम्भ हो गया है।

बाहर निकलने पर लोगों को मास्क लगाना अनिवार्य

इससे पहले राष्ट्रीय राजधानी में कोरोनावायरस महामारी को फैलने से रोकने के लिए दिल्ली सरकार ने घर से बाहर निकलने पर लोगों को मास्क लगाना बुधवार को अनिवार्य कर दिया। दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद इस निर्णय का की बात करते हुये कहा कि फेस पर मास्क लगाने से काफी हद तक कोरोना वायरस संक्रमण के प्रसार को कम किया जा सकता है।

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खबर आई थी की जमाती कोरोना मरीज़ अस्पताल में भी डॉक्टरों पर थूक रहे थे और नर्सों के साथ दुर्व्यवहार कर रहे थे। ऐसे में अब उत्तर प्रदेश सीएम योगी आदित्यनाथ ने साफ कहा कि इंदौर और कर्नाटक जैसी घटना उत्तर प्रदेश में न हो, इसके लिए जरूरी है कि ऐसे लोगों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की जाए। ऐसे में कुछ लोगो पर रासुका भी लगाई जा सकती है।

23 सितंबर, 1980 को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) अस्तित्व में आया। यह कानून इंदिरा गांधी की सरकार के कार्यकाल में लाया गया था। राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम-1980 के तहत अगर सरकार को लगता है कि कोई भी व्यक्ति कानून व्यवस्था में अड़चन पैदा कर रहा है, तो उसके खिलाफ एनएसए या रासुका लगाया जा सकता है।

इसके अलावा अगर सरकार को लगे कि किसी जरूरी सेवा की आपूर्ति में कोई भी व्यक्ति बाधा डाल रहा है, तो उसके खिलाफ भी रासुका (NSA) लगाया जा सकता है। किसी व्यक्ति के खिलाफ रासुका लगाती है तो उसे बिना किसी आरोप के 12 महीने तक जेल में रखा जा सकता है। इस दौरान राज्य सरकार को केवल यह बताने की जरूरत है कि व्यक्ति को रासुका के तहत हिरासत में लिया गया है।

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वहीँ दूसरी ओर तब्लीग़ी जमात मरकज का अवैध कार्यालय दिल्ली के निजामुद्दीन पर होने की वजह से अब लोग इस नाम से भी कतरा रहे हैं और भय के माहौल में है। ऐसे में दिल्ली के निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन का नाम भी लोगो को खटक रहा हैं। अब यह मांग उठने लगी है की निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन का नाम ही बदल दिया जाना चाहिए।

निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन का नाम लोगो को खटका

ऐसे में दिल्ली बीजेपी आईटी एवं सोशल मीडिया सह संयोजक अभिषेक आचार्य कुल्श्रेस्थ ने ट्वीट कर कहा की कोरोना की वजह से निज़ामुद्दीन के नाम से अब लोग घबरा रहे है, इसलिये मेरा श्री पियूष गोयल जी से निवेदन है कि जल्द से जल्द निज़ामुद्दीन रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर इंद्रप्रस्थ या कुछ और किया जाए।

Delhi BJP IT and Social Media leader Abhishek Acharya Kulshrestha demand to Indian Railway Minister Piyush Goyal for Change the name of Nizamuddin Railway Station Delhi because of Corona Viris and Tablighi Jamaat Markaj.

दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज़ का मुखिया मौलाना साद अब जल्द पुलिस के हत्थे चढ़ सकता है। उसके होने के संकेत हरियाणा में मिले हैं। तबलीगी जमात का मामला उजागर होने के बाद से ही वह फरार है। पुलिस ने उसके ख़िलाफ़ नोटिस जारी किया हुआ है। मगर, उसका कहना है कि उसने खुद को क्वारंटाइन किया हुआ है। लेकिन कहाँ इसके बारे किसी को कोई जानकारी नहीं हैं।

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मीडिया रिपोर्ट्स में इस समय खूफिया एजेंसियों के सूत्रों का हवाला देकर बताया जा रहा है कि हरियाणा सरकार ने साद की लोकेशन ट्रेस कर ली है और उसे पकड़ने के लिए एक टीम का गठन भी कर लिया गया है। इसके अलावा सुरक्षा एजेंसियाँ मौलाना साद को पकड़ने के लिए ट्रैप भी लगा रही हैं। तबलीगी जमात के मौलाना साद के खिलाफ मामला दर्ज करने के बाद दिल्ली पुलिस (Delhi Police) की क्राइम ब्रांच की टीम अब उसकी खोजबीन कर रही है। साद की तलाश में अलग-अलग जगहों पर छापेमारी की जा रही है। इसके आवला दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने 26 सवालों की लिस्ट तैयार करके नोटिस बनाकर मौलाना साद के घर पर भेजा है।

मौलाना साद के मनमानी भरे रवैये ने उनके ऊपर अंधविश्वास करने वाले सैकड़ों लोगो और समर्थकों का जीवन खतरे में डाला और साथ में पूरे भारत को कोरोना के कहर तले दवा दिया। मरकज में भाग लेने वालों में कई को कोरोना के लक्षण थे और उन्हें दूसरे लोगों के बीच छोड़ दिया गया। देश के सभी कोरोना मामलों का 30 फीसदी तब्लीग़ी जमात से जुड़े हैं। वहीं उत्तर प्रदेश में यह आंकड़ा लगभग 50 प्रतिशत तक का है।

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