Tuesday, October 27, 2020
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भारत ने चीन को कहा बेतुकी चेतावनी देना बंद करों, भारतीय सेना ऐसे तुमसे ज्यादा सक्षम है ड्रैगन

Indian Army Modi China
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Delhi: लद्दाख (Ladakh) समेत समूची LAC पर भारत की सॉलिड जवाबी तैयारी से चीन को समझ नहीं रहा है कि वह अब क्या कदम उठाए। इसीलिए वह कभी अपने मंत्रियों के जरिए शांति की बात कर रहा है, तो वहीं अपने सरकारी मीडिया तंत्र ग्लोबल टाइम्स (Global Times) के जरिए भारत का मजाक बनाकर खुद को तसल्ली देने में लगा है। वह खुद अपने मुँह मिया मिट्ठू बन रहा है।

चीन (China) के विदेश मंत्री वांग यी ने बुधवार को भारत से आग्रह किया कि अपने सख्त रवैये में कमी लाए और बॉर्डर (Indo-China Border) पर तैनात सैनिकों को डिस-एंगेज करने की प्रक्रिया जल्द से जल्द बहाल करे। इसके साथ ही चीनी विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि चीन-भारत सीमा पर विवाद भारत की वजह से शुरू हुआ है। इसलिए इसे शांत करना भी भारत की जिम्मेदारी है।

पूर्वी लद्दाख क्षेत्र की ऊंचाई वाली लगभग सभी चोटियों पर भारत ने कब्जा कर लिया है। चीन तिलमिलाया हुआ है। वो चाहता है कि किसी भी तरह से भारतीय सेना इन चोटियों के कब्जे को छोड़ दे। इसके लिए चीन का मीडिया रात-दिन जंग को लेकर प्रोपेगैंडा फैला रहा है। चीन की ओर कहा जा रहा है कि सर्दी आने पर भारतीय सेना युद्ध में बुरी तरह से परास्त हो जाएगी, उसे सर्दी वाले दुर्गम स्थलों में युद्ध करना नहीं आता है। चीन के इस भ्रामक प्रचार का भारतीय सेना ने जवाब दिया है।

चीनी मीडिया में भारतीय सेना की अधूरी तैयारियों के दावे वाली खबरों के चलने के बाद इंडियन आर्मी (Indian Army) ने कहा है कि वह किसी भी स्थिति में सामरिक हालात से निपटने में पूरी तरह से तैयार है। अपने एक बयान में भारतीय सेना ने कहा कि सर्दी के मौसम में अगर जंग के हालात बन जाते हैं, तो चीन का सामना भारत की एक ऐसी सेना से होगा, जो कि सक्षम और पूरी तैयारी के साथ उनके सामने खड़ी होगी।

भारतीय सेना ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि चीन जिस सेना के बल पर प्रोपोगैंडा फैला रहा है, उसके जवानों को फील्ड और ऊंचे इलाकों में जंग का कोई अनुभव नहीं है। ये लोग शहरी इलाकों से आते हैं और इन्हें जमीनी हालात का कोई अंदाजा नहीं। सेना की उत्तरी कमान के प्रवक्ता ने कहा कि अगर सर्दी के मौसम में पूर्वी लद्दाख में जंग जैसे हालात बन भी जाते हैं, तो भारतीय सेना इसके लिए पूरी तरह से तैयार और सक्षम दिखेगी।

भारतीय सेना प्रवक्ता ने कहा, ‘भारत एक शांतिप्रिय देश है और हम चाहते हैं कि पड़ोसियों से हमारे रिश्ते हमेशा ही बेहतर रहें। हम हमेशा बातचीत के जरिए मसलों को हल करना चाहते हैं। ऐसे वक्त में जब भारत और चीन के मध्य कूटनीतिक स्तरों पर बातचीत हो रही है, उस वक्त में भी हम सैन्य मोर्चे पर पूरी तरह से तैयार हैं।’ प्रवक्ता ने कहा कि लद्दाख रेंज के तमाम इलाके उच्चतम पर्वतीय क्षेत्रों में आते हैं। इस इलाके में नवंबर के महीने में भारी बर्फबारी होती है।

इसके अलावा यहां न्यूनतम तापमान -30 से -40 डिग्री के आसपास पहुंच जाता है। ठंड की इन स्थितियों में कई बार लद्दाख को जोड़ने वाले तमाम रास्ते भी बंद हो जाते हैं, लेकिन इन सब स्थितियों के बावजूद ये जानना जरूरी है कि भारतीय सेना ऐसी स्थितियों से निपटने में पूरी तरह से सक्षम है। हमारे पास ऐसे इलाकों में ड्यूटी करने का एक लंबा अनुभव रहा है और हम एक शॉर्ट नोटिस पर भी किसी भी स्थिति में जाने के लिए पूरी तरह से तैयार रहते हैं।

प्रवक्ता ने कहा कि दुनिया को यह याद रखना चाहिए कि हमारे पास सियाचिन जैसे मुश्किल रणक्षेत्रों में रण का अनुभव है। चीन के ग्लोबल टाइम्स ने यह दावा किया था कि भारतीय सेना लद्दाख के हालातों में लॉजिस्टिक कैपेबिलिटी के हिसाब से कम तैयार है।

वहीं चीन के सरकारी मीडिया और प्रवक्ता माने जाने वाले ग्लोबल टाइम्स ने लिखा कि भारत मानसिक प्लान को आगे बढ़ाते हुए कह रहा है कि सर्दियों में तैनाती के लिए उसकी सेना तैयार है। लेकिन इस सर्दियों में न तो उसकी लॉजिस्टिकल सप्लाई अच्छी है और न ही ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम।

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि चीन के ये सब तरीके मानसिक प्लानिंग का हिस्सा हैं। वह एक ओर तो डिसएंगेजमेंट की मांग कर रहा है, वहीं अपनी तैयारियां भी लगातार बढ़ता जा रहा है। लेकिन उसकी इन बेतुकी रणनीतियों का भारतीय सेना पर कोई असर नहीं हो रहा है और वह चट्टान की तरह सीमा पर डटे रहकर अपनी सेना की रक्षा में जुटे हुए है।


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