Friday, September 25, 2020
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भारतीय जवानों ने लद्दाख की ऊंचाई वाली जगहों पर अपने अड्डे बनाये, ऐसे हुआ चीन का षड्यंत्र विफल

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Demo File Images Credits: Twitter

Ladakh: भारत और चीन का सीमा विवाद अभी लगातार ज़ारी है। लगभग 45 सालों तक वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर एक भी ऐसी घटना नहीं हुई थी, लेकिन चीन की नापाक हरकतों की वजह से अब बॉर्डर पर माहौल बिगड़ने लगा है। जानकारी के मुताबिक, 20 दिन में पूर्वी लद्दाख में सीमा विवाद को लेकर भारत-चीन के बीच तीन बार फायर वाली घटना हो चुकी है।



दूसरी ओर पूर्वी लद्दाख में चीनी सेना की ओर से किए जा रहे दुस्साहस की वजह से जारी तनाव के बीच, भारतीय सेना ने अपने अजेय बोफोर्स हॉवित्जर को ऑपरेशन के लिए तैयार कर लिया है। लद्दाख में भारतीय सेना ने चीन को हर मोर्चे पर पराजय दी है। चीन के हर षड्यंत्र को सॉलिड जवाब मिला है। अप्रैल महीने से पूर्वी लद्दाख की वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीन लगातार चाल चल रहा है।

भारतीय जाबांजों ने चीन की सेना को गलवान से पैंगोंग क्षेत्र की सभी ऊंचाई वाली चोटियों से खदेड़ दिया है। अब इन चोटियों पर भारतीय सेना का कब्जा है। करारी शिकस्त झेल रहे चीन ने भारत को चेतावनी देते हुए कहा था कि सर्दी आने पर भारतीय सेना को सबक सिखाएंगे। चीन को लगता था कि कड़ाके की ठण्ड के मौसम में भारतीय सेना के जवान लद्दाख की जबतदस्त ठंढ नहीं झेल पाएंगे, लेकिन भारतीय सेना की ओर से अब उन्हें जवाब मिल गया है।

लद्दाख में सर्दी के मौसम में तापमान माइनस डिग्री में चला जाता है। यहां माइनस 22 डिग्री से लेकर माइनस 50 डिग्री सेल्सियस तक तापमान गिरता है। ऐसी ज़बरदस्त ठंढ से निपटने के लिए भारतीय सेना ने तैनात अपने सैनिकों के लिए लॉजिस्टिक्स सहायता देनी शुरू कर दी है।



सेना लद्दाख में आने वाले समय में पड़ने वाली कड़ाके की सर्दी में भी 50 हजार सैनिकों की तैनाती करेगी। इसके लिए अभी से सेना के विशेष सर्दियों के कपड़े, राशन, आर्कटिक टेंट से लेकर पोर्टेबल हीटर तक पहुंचाने के लिए सैन्य विमान और हेलीकॉप्टर तकरीबन रोजाना लद्दाख के लिए उड़ान भर रहे हैं।

यहां सेना जवानों को ठंढ से बचाने के लिए विशेष किस्म के तंबू गाड़ दिए गए हैं। चीनी सेना सोच रही थी कि ठंढ शुरू होते ही हमेशा की तरह भारतीय सेना के जवान दुर्गम स्थानों से वापस चले जाएंगे और वे फिर से उन जगहों पर दोबारा होने पैठ जमा लेंगे। परन्तु चीन सेना के सभी मनसूबे धरे के धरे तह गए।

भारतीय सेना सूत्रों के मुताबिक, 29-30 अगस्त की रात को जब चीन ने पैंगोंग झील के दक्षिण किनारे चुशूल सेक्टर के अपॉजिट मूवमेंट किया और भारतीय इलाके में घुसपैठ की कोशिश की तब भारतीय सैनिकों ने उन्हें चेतावनी देने के लिए हवा में शॉट किया गया था। चीनी सैनिकों की तरफ से भी हवा में यही रिप्लाई दिया गया। इस दौरान भारतीय सैनिकों ने दक्षिण किनारे अहम चोटियों पर अपनी पोजिशन जमा ली।



जिससे भारतीय सेना वहां अडवांटेज पोजिशन में आ गई। 7 सितंबर को चीनी सैनिकों ने इन्हीं चोटियों पर भारतीय पोजिशन के करीब आने की कोशिश की भारतीय सेना ने जो वायर ऑब्स्टिकल लगाई हैं, उन्हें हटाने की कोशिश की। तब चीनी सैनिकों को चेतावनी देने के लिए भारतीय सैनिकों ने हवा में फिर फाये किया। चीनी सैनिकों ने भी दबाव बनाने के लिए यही काम किया था।


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