Wednesday, February 26, 2020
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गरीब मजदूर का बेटा भाजपा की सीट पर जीतकर बना विधायक, अब राजा का बेटा राजा नहीं बनेगा।

BJP MLA Satpute Story
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अष्टी क्षेत्र के रहवासी सतपुते ABVP में प्रदेश मंत्री के Post पर भी कार्य कर चुके हैं। इसके बाद वह उन्होंने भाजपा युवा मोर्चा में अपना कदम रखा। यहां वह प्रदेश उपाध्यक्ष नियुक्त हो गए है। उन्हें मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का करीबी समझा जाता है। उनके पिता विट्ठल सतपुते चीनी मिल में मजदूरी करके जीवन यापन करते थे।

मालशिरस महाराष्ट्र विधानसभा के परिणामो में भाजपा एक बार फिर से 105 सीटो पर जीत दर्ज करके सबसे बड़ी पार्टी के रूप में सामने आई है। 105 विधायकों में से एक विधायक बने हैं राम सतपुते। उन्होंने मालशिरस सीट से जीत दर्ज की है। उनकी जीत इसलिए भी अहम है, क्योंकि वह बहुत ही साधारण गरीब मजदूर परिवार तालुकात रखते हैं।

राम सतपुते के पिता मजदूरी करते थे

उनके पिता मजदूरी करते थे। इस बार भाजपा ने उन्हें टिकट दिया और उन्होंने एक कड़े मुकाबले में NCP प्रत्याशी को हराकर जीत अपने नाम दर्ज की।
मालशिरस सीट से भाजपा के राम विट्ठल सातपुते ने जीत हासिल की। उन्होंने 2590 मतो के अंतर से NCP के प्रत्याशी उत्तमराव शिवदास जानकार को पराजय किया है।

सतपुते लम्बे अरसे तक संघ के अनुषांगिक संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के भी मेम्बर रहे हैं। उन्होंने इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त की है। एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने बताया की, “मेरे लिए ये पल काफी अहम और खुशी देने वाला है। एक मजदूर का बेटा विधायक बना है। ये ठीक वैसे ही जैसे अभी हाल में आई एक फिल्म में कहा गया था कि राजा का बेटा राजा नहीं बनेगा, जो हकदार होगा वही बनेगा।”

मालशिरस विधानसभा सीट राकांपा का गढ़ थी

राम सतपुते के पास 16 हजार रुपये नगद और 68 हजार रुपए बैंक में जमा राशि है। 3 लाख 65 हजार रुपये के टू व्हीलर गाड़ी हैं। इनमें एक बुलट, तीन होंडा स्कूटर और एक स्कूटी शामिल है। 5 लाख रुपए के सोने चांदी के गहने हैं। मालशिरस विधानसभा सीट राकांपा का गढ़ कही जाती है।

यहां पर जीत दर्ज करना भगवा खेमे के लिए टेढ़ी उंगली से घी निकलने के बराबर माना जाता है। लेकिन, यहां भाजपा के लिए जीत दर्ज करना एक प्रकार से बड़ा इशारा है। हालांकि सभी क्षेत्रों में NCP उसी तरह ताकतवर रही है। उसने अपने विधायकों की संख्या में 13 की बढ़ोतरी करके जीत हासिल की है, जबकि सत्तारूढ़ गठबंधन में बीजेपी और शिवसेना के गठबंधन से कुल 24 सीटों का हर्जाना भुगतना पड़ा।

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