Thursday, July 2, 2020
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अजित डोभाल ने पहले ही बता दिया था पाक-चीन के इस षड्यंत्र के बारे में, ऐसी चाल चली जा रही

Ajit Doval on China
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भारतीय सीना ले अंदर लद्दाख के पैंगोग शो झील क्षेत्र और गलवान घाटी को लेकर भारत और चीन के बीच तनावपूर्ण माहौल बना हुआ हैं। देश की केंद्र सरकार जहां सेना की तैयारियों से लेकर डिप्लौमेटिक लेवल पर चीन से सीमा विवाद को सॉल्व करने में लगा हुआ है, वहीं चीन लाइन आफ एक्चुयल कंट्रोल (LAC) पर अपने सैनिकों की तादात में बढ़ोतरी कर रहा है। चीन के इरादे सही नहीं है और यही कारण है कि चीन के मामले पर नजर रखने वालों का मानना है कि चीन पर अब भरोसा करना बेकार है।

मीडिया सूत्रों से मिली खबर के मुताबिक देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने अपने अनुभव की दम पर बहुत पहले ही वर्ष 2013 में ही अगाह कर दिया था कि चीन पाकिस्तान के साथ गुटबाज़ी करके भारत के खिलाफ जासूसी कर जरुरी जानकारी जुटा रहा है और नार्थ ईस्ट के उग्रवादी संगठनों की भी मदत कर रहा है।

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NSA Ajit Doval File Image Credits: IANS

आपको बता दे की एक लेख में भारत के पूर्व जासूस और पूर्व IB चीफ तथा अभी के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने बताया था किकैसे चीन ने भारत और अन्न देखों में अपने जासूस छोड़े हुए हैं, जो चीन को हर तरह से फ़ायदा पहुंचाने के लिए जासूसी कर रहे हैं। जिस वक़्त अजीत डोभाल ने ये लेख लिखा था उस दौरान वो दिल्ली के थिंक टैंक विवेकानंद इंटरनेशल फाउंडेशन से जुड़े हुए थे और फिर एक साल बाद मोदी सरकार में उन्हें NSA का कार्यभार चौपा गया।

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया की अजीत डोभाल के मुताबिक चीन के खिलाफ जासूसी तिब्बत से दलाईलामा के भारत आने के बाद से शुरू कर दी गई थी और अक्साई चिन के क्षेत्र में ल्हासा और जिनजियांग को जोड़ने वाली नेशनल हाईवे 219 पर सड़क बनाने का काम शुरू कर दिया था।अजित डोभाल ने लिखा था की भारतीय खुफिया एजेंसियों ने उस वक़्त चीन की गतिविधियों की खबर उस वक़्त की सरकार को मुहैया करवाई थी, परन्तु कांग्रेस सरकार ने एजेंसियों की रिपोर्ट पर ध्यान नहीं दिया।

एक किस्से (Chinese Intelligence: From a Party Outfit to Cyber Warriors) के मुताबिक़ 21 नवंबर 1959 को इंटेलिजेंस ब्यूरो में डिप्टी सेंट्रल इंटेलीजेंस एजेंसी के पद पर तैनात करम सिंह की चीनी सैनिकों से झड़प हुई थी, जिसमें वो वीरगति को प्राप्त हो गए थे। अजीत डोभाल के अनुसार जब साल 1959 में दलाई लामा अपने 80 हज़ार सैनिकों के साथ भारत में शरण केलर आये, तो उसके बाद से चीनी खुफिया एजेंसियां भारत में एक्टिव हो गई थी।

उस वक़्त सबसे बड़ी समयाबी तब मिली, जब 2013 में हिमांचल प्रदेश के धर्मशाला से चीनी सेना के एक जासूस Pema Tsering को गिरफ्तार किया गया था, जो फ़र्ज़ी आईडी कार्ड की मदत से अपनी पहचान छुपा कर दलाईलामा की जासूसी कर रहा था। बताया गया की चीन के जासूस भारत में कुछ मौका परस्त और देशद्रोही लोगो के साथ मिलकत भारत के खिलाफ षड्यंत्र रच रहे हैं।

एक अन्न किस्से में भारत के नार्थ ईस्ट के नागालैंड से 18 जनवरी 2011 को Wang Qing नाम की एक महिला चीनी जासूस को गिरफ्तार किया गया था, जिसने नागालैंड के उग्रवादी गुट से खुफिया मुलाकात की थी। अजीत डोभाल के मुताबिक चीन की खुफिया एजेंसियां भारत के खिलाफ बहुत सक्रिय है और इन उग्रवादी गुटों को चीन की तरफ से मदत और ट्रेनिंग उपलब्ध कराई जाती है।

चीन भारत को कमजोर करने के मकसद से बीते कई सालों से काम कर रहा है, लेकिन चीन के सभी षड्यंत्र के खिलाफ तब की UPA सरकार या तो अनदेखी करती रही और कई बार इस पर कुछ भी बयान देने या विरोध करने से कतराती रही थी। भारत के खिलाफ षड्यंत्र पर बड़ा पर्दाफाश साल 2010 में हुआ जब नेपाल से लौटे Anthony Shimray नाम के एक नार्थ-ईस्ट के उग्रवादी को भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने पकड़ा था। इस उग्रवादी ने बताया कि उसे चीन से बड़ी मात्रा में अस्त्र शस्त्र को भारत में भेजने की प्लानिग की गई।

अजीत डोभाल ने भारत के खिलाफ चीन की बड़ी साजिश का खुलासा करते हुए बताया है कि भारत के खिलाफ चीन पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की भी मदद ले रहा है। चीन और पाकिस्तान ने मिलकर ढाका में भारत के खिलाफ एक आपरेशनल हब बनाया था जिसका मकसद नार्थ ईस्ट के उग्रवादी गुटों से संपर्क साधना था।

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