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अमेरिका ने चीन की 800 कंपनिया बैन कर दी और यहां भारत का साथ देते हुए जिनपिंग की चिंता बढ़ाई

America China India Corona
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Delhi: पूरी दुनिया वैश्विक महामारी कोरोना के कहर से लगातार जूझ रही है। दुनिया में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले अब तक 51 लाख से अधिक हो गए, जबकि कोरोना से अपने प्राण गवाने वालों की संख्या 329768 हो चुकी है। इस बीच अमेरिका और यूरोप में कई जगह अर्थव्यवस्था खोलने के बावजूद हालात गंभीर बने हुए हैं।

दुनिया को कोरोना की चपेट में लपेटने वाले चीन के बुरे दिन अब शुरू हो गए है, चीन पर अब चारों तरफ से आर्थिक प्रहार किया जा रहा है, चीन पर आर्थिक प्रहार के अलावा सैन्य कार्यवाही का भी विकल्प खुल गया है। दुनिया भर के देशों की कम्पनियाँ चीन से बाहर निकल रही है और अब अमेरिका की सीनेट ने चीन पर सबसे बड़ा निर्णय लिया है।

अमेरिका के सीनेट में चीन खिलाफ बिल पास हो गया

अमेरिका के सीनेट में चीन की 800 कंपनियों को अमेरिका के शेयर बाज़ार से बैन कर दिया है, आज ही सीनेट ने ये प्रस्ताव पारित किया है। अमेरिकी सीनेट में रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक दोनों ही पार्टियों ने चीन के खिलाफ इस प्रस्ताव को पास कर दिया है, प्रस्ताव पास होने के बाद अमेरिका में चीन की टोटल 800 कंपनियों को अमेरिकी शेयर बाज़ार में बैन कर दिया गया है।

आपको बता दे की अमेरिका का शेयर बाज़ार पूरी दुनिया का सबसे बड़ा आर्थिक बाज़ार है, और इस बाज़ार में चीन की 800 कम्पनियाँ लिस्टेड थी, अब इन सभी 800 कंपनियों को Dlist करवाया जायेगा। उसका सीधा मतलब है की अब ये 800 चीनी कम्पनियाँ अमेरिका से फंड्स नहीं ले सकेंगी। इस कारण चीन को लगभग 30 लाख करोड़ रुपए का फटका लगा है। अभी तो चीन को आज लगभग 30 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है, जिसमे अलीबाबा, बैडू और अन्न बड़ी चीनी कंपनि शामिल है।

आपको बता दे की डोनाल्ड ट्रम्प 30 दिनों के भीतर WHO की भी पूरी फंडिंग रोकने की भी चेतावनी दी है। हालाँकि चीन भी बाज़ नहीं आ रहा है। चीन ने अमेरिका से साफ कहा है कि वह इस मामले में किसी मुकदमे को ना तो मानेगा और ना ही हर्जाने की मांग को स्‍वीकार करेगा। महामारी के लिए चीन को दोषी ठहराने को लेकर अमेरिका में कोई विधेयक पास होने की स्थिति में चीन ने इसके खिलाफ जवाबी कदम उठाने की चेतावनी भी दी है।

अमेरिका कोरोना महामारी के लिए चीन को जिम्मेदार बताता है

अमेरिका शुरुआत से ही कोरोना महामारी के लिए चीन को जिम्मेदार मान रहा है। अमेरिका इसे वुहान में पैदा हुआ वायरस मानता है। इस मामले में चीन से हर्जाने की मांग के साथ अमेरिका में मुकदमा भी किया गया है। चीन के प्रवक्‍ता ने कहा कि हम अमेरिका के हर कदम का सख्ती से विरोध करेंगे और देखेंगे कि विधेयक पर वहां आगे क्या होता है।

भारत-चीन की सीमा पर बढ़ते तनाव के बीच अब अमेरिका ने भी भारत का समर्थन किया है और चीन की विस्तारवादी नीति का विरोध किया है। अमेरिका की एक शीर्ष राजनयिक ने चीन पर आरोप लगाया है कि वो अपने परेशान करने वाले व्यवहार से यथास्थिति को बदलने की कोशिश कर रहा है और ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है।

भारत-चीन सीमा पर तनाव अमेरिका भारत के साथ आया

वरिष्ठ अमेरिकी राजनयिक एलिस जी वेल्स ने भारत-चीन सीमा पर तनाव और विवादित दक्षिण चीन सागर में चीन के बढ़ते कब्जाधारी व्यवहार पर इसे चीन की नापाक साजिश की आशंका बताया है। चीन ने हाल ही में कहा कि भारत-चीन सीमा मुद्दे पर अमेरिका की एक वरिष्ठ राजनयिक की टिप्पणियां बेतुकी हैं और दोनों देशों के बीच राजनयिक माध्यम से चर्चा जारी है और वाशिंगटन का इससे कोई लेना-देना नहीं है। मतलब अब भारत की मोदी सरकार को चीन से सीमा विवाद पर अमेरिका का साथ मिल गया है।

अमेरिकी विदेश विभाग ने दक्षिण एवं मध्य एशिया ब्यूरो की निवर्तमान प्रमुख वेल्स ने कहा, था की मुझे लगता है कि सीमा पर जो तनाव है वह इस बात को याद दिलाता है कि चीन आक्रामक रुख जारी रखे हुए है। चाहे वह दक्षिण चीन सागर हो या भारत से लगी सीमा। हम चीन द्वारा उकसाने वाला और परेशान करने वाले व्यवहार को लगातार देख रहे हैं। यह मसले में सवाल खड़े होते है कि चीन अपनी बढ़ती शक्ति का उपयोग किस तरह से करना चाहता है। यह साफ़ दुरपयोग है।

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