Thursday, September 24, 2020
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मिलिए 3 फीट की IAS अफसर से, जो अपार संघर्ष और चुनौतियों का सामना कर बनी अफसर

IAS 3 Feet
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Image Credits: Twitter

Jaipur: इस दुनिया में लोगो के ताने और खुद को इग्नोर किये जाने के बावजूद भी सफलता हासिल करना बहुत ही मुश्किल होता है। भारत में अनेक रूढ़िवादी लोग लड़कियों को बोझ मानते हैं और अगर उनकी लड़की शारीरिक रूप से दिव्यांग हो, तो उसको बहुत कुछ झेलना पड़ता है। ऐसे ही एक लड़की की कहानी आज आप जानेंगे हैं, जो शारीरिक रूप से दिव्यांग होने पर समाज के ताने झेलती रही और एक दिन कड़ा संघर्ष करके बड़ी सफलता हासिल करके सबके मुंह पर ताला भी लगा दिया।

आपको बता दे की राजस्थान के अजमेर की एक नई जिलाधिकारी की नियुक्ति पर सभी हैरान हो गए। यह अधिकारी है आरती डोगरा, जो 3 फीट की हैं। काम कद होने के बावजूद, उनके काम और हौसले बुलंदी पर है। आरती डोगरा (Aarti Dogra) आज राजस्थान कैडर की IAS अफसर हैं। आरती आज आरती देशभर की महिला IAS के प्रशासनिक खेमे में मिसाल के तौर पर जानी जाती हैं। उन्होंने समाज में बदलाव के लिए कई मॉडल पेश किए हैं, जो देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी काफी पसंद आए हैं।

आपको बता दे की IAS आरती (IAS Aarti Dogra) मूल रूप से उत्तराखंड की रहने वाली हैं। उनका जन्म उत्तराखंड के देहरादून में हुआ था। आरती साल 2006 बैच की IAS अफसर हैं। उनका कद केवल 3 फुट 6 इंच का है, जिसके कारण उनको बचपन से ही भेदभाव का सामना करना पड़ा था और काफी लोग इग्नोर भी किया करते थे। परन्तु आज पूरा देश उन्हें सलाम करता है।

यह कहानी उस लड़की की है, जिसने कड़े संघर्ष से सम्मान पाया है। समाज के लोग उन पर हंसे, ताने दिए, भेदभाव भी किया और बताया जाता है कि कुछ लोगों ने उनके परिवार को ये तक कहा कि ये लड़की बोझ है, लेकिन आरती के माता-पिता को इन सारी बातों से ऊपर अपनी बेटी से स्नेह था। उन्होंने अपनी बेटी को पढ़ाया लिखाया और इस काबिल बनाया कि वो आज अफसर बन चुकी हैं।

बताया जाता है की IAS आरती ने अपने कार्यकाल में अनेक महत्वपूर्ण काम किए हैं। उन्हें राजस्थान के अजमेर की नई जिलाधिकारी के तौर पर नियुक्ति मिली। इससे पहले भी वे SDM अजमेर के पद पर भी पदस्थापित रही चुकी थी। आरती राजस्थान के बीकानेर और बूंदी जिलों में भी कलेक्टर का पदभार संभाल चुकी हैं। इसके पहले वो डिस्कॉम की मैनेजिंग डायरेक्टर के पद पर भी रह चुकी हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जाता है की बीकानेर की जिलाधिकारी के तौर पर आरती नें बंको बिकाणो नामक अभियान की शुरुआत की थी। इसमें लोगों को खुले में शौच ना करने के लिए जगरूख किया गया। इसके लिए प्रशासन के लोग सुबह गांव जाकर लोगों को खुले में शौच करने से रोकते थे। गांव-गांव पक्के शौचालय बनवाए गए।

इस अभियान में साफ़ सफाई का विशेष घ्यान रखा गया। जिसकी मॉनीटरिंग मोबाइल सॉफ्टवेयर की मदत से की जाती थी। यह अभियान 195 ग्राम पंचायतों तक सफलता पूर्वक चलाया गया। बंको बिकाणो की सफलता के बाद आस-पास से जिलों ने भी इस पैटर्न को अपनाया। आरती डोगरा को राष्ट्रीय और राज्य स्तर के कई पुरस्कार मिल चुके हैं।

आपको बता दे की आरती जोधपुर डिस्कॉम के प्रबंध निदेशक के पद पर नियुक्त होने वाली पहली महिला आईएएस अधिकारी रही है। IAs आरती डोगरा ने पद ग्रहण करने के बाद कहा कि जोधपुर डिस्कॉम में फिजूल खर्ची, बिजली बर्बादी पर नियंत्रण के लिए जूनियर इंजीनियर से लेकर चीफ इंजीनियर तक की जिम्मेदारी निर्धारित की जाएगी। जहां बिजली नहीं है, वहां बिजली पहुंचाने के सभी प्रयास किए गए।

जानकारी हो कि आरती के पिता कर्नल राजेन्द्र डोगरा सेना में अधिकारी हैं और मां कुमकुम एक स्कूल में प्रिसिंपल हैं। आरती के जन्म के समय डॉक्टरों ने साफ कह दिया कि उनकी बच्ची सामान्य स्कूल में नहीं पढ़ पाएगी। बाद में अन्न लोग भी कहने लगे कि बच्ची असामान्य है। उसके बाद उनके माता-पिता नें उनको सामान्य स्कूल में डाला। लोगों के तानो के वाबजूद उनके माता-पिता ने किसी और बच्चे के बारे में विचार नहीं किया। आज उन्हें अपनी बेटी पर गर्व है।

आरती के माता पिता का कहना था कि हमारी एक ही बेटी काफी है, जो हमारे सपनें पूरे करेगी। आरती की स्कूलिंग देहरादून के वेल्हम गर्ल्स स्कूल में हुई थी। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्रीराम कॉलेज से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन किया है। इसके बाद UPSC Indian Administrative Service की तैयारी की।

फिर वे पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए वो वापस देरहरादून चली आयीं। यहां उनकी मुलाकात देहरादून की DM IAS मनीषा से हुई। जिन्हीने उन्हें सही मार्गदर्शहैं दिया। आरती उनके इतनी प्रेरित हुई कि उनके अंदर भी IAS अफसर बनने का विचार आया। उन्होंने इसके लिए जमकर मेहनत की और उम्मीद से भी बढ़कर अपने पहले ही प्रयास में लिखित परीक्षा और इंटरव्यू भी पास कर लिया।


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