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फिर आया मामा राज, शिवराज सिंह चौहान ने CM शपत ग्रहण करते ही रच दिया इतिहास

Shivraj Singh Chouhan Again
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Image: Social Media

Bhopal, Madhya Pradesh: मध्यप्रदेश में राजनीति के सियासी ढोल बज गए है। जानकारी के मुताबिक 17 दिसंबर 2018 की है। इस दिन कमलनाथ ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। पुर्व मुख्यमंत्री शिवराज भी शपथ ग्रहण में उपस्थित थे। लेकिन कांग्रेस खेमे में कुछ ऐसा हुआ, जिससे राजनीति में उठा पटक हो गई। कांग्रेस सामान्य के ज्योतिरादित्य सिंधिया जिन्हें महाराज भी कहते हैं। उनके 22 समर्थक विधायकों की मदद से शिवराज मुख्यमंत्री बन गए हैं।

शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) मध्यप्रदेश के इतिहास में ऐसे पहली बार होने जा रहा है, जब कोई नेता चौथी बार सीएम (Chief Minister) बन रहा है। शिवराज 2005 से 2018 तक लगातार 13 साल सीएम रह चुके हैं। मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री पद के दावेदार के लिए कई लोग लाइन में शामिल हुए, लेकिन किसी को भी सहमति नही मिली। फिर बीजेपी ने मध्यप्रदेश के अगले मुख्यमंत्री के लिए शिवराज सिंह चौहान का नाम तय कर दिया है।

वे आज रात 9 बजे राजभवन में शपथ ले रहे हैं। 20 मार्च को कमलनाथ के इस्तीफे के बाद बीजेपी में मुख्यमंत्री पद के लिए शिवराज सिंह चौहान का नाम फिर एक बार सामने आया। Madhya Pradesh मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शिवराज ही सबसे मजबूत दावेदार थे। वे 2005 से 2018 तक लगातार 13 साल मुख्यमंत्री रह चुके हैं। इस दौरान उन्होंने तीन बार मुख्यमंत्री पद की शपथ भी ली है।

मध्यप्रदेश के इतिहास में पहली बार होगा, जब कोई चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेगा। शिवराज सिंह के अतिरिक्त कई नेता ऐसे है जो अब तक तीन तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके है। जिसमे अर्जुन सिंह और श्यामाचरण शुक्ल का नाम शामिल है। कमलनाथ के इस्तीफे के बाद मुख्यमंत्री पद के लिए शिवराज के साथ-साथ नरेंद्र सिंह तोमर और नरोत्तम मिश्रा के नाम की भी सुर्खियों में थे।

बीजेपी विधायक दल की बैठक से पहले गोपाल भार्गव ने नेता प्रतिपक्ष पद से त्यागपत्र दे दिया। इसके बाद विधायक दल की बैठक प्रारंभ हुई। बैठक में शिवराज और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा उपस्थित थे। गोपाल भार्गव ने शिवराज के नाम का प्रस्ताव सामने रखा। सभी ने उसका समर्थन किया। कुछ ही विधायक बैठक में उपस्थित थे। कोरोना का संक्रमण न फैले, इसका एहतियात लेते हुए बाकी विधायकों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। सभी विधायकों ने शिवराज के नाम पर मुहर लगाई और उन्हें अपना नया नेता के रूप में चुन लिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को चार बार वार्तालाप की। इसके बाद शिवराज को मुख्यमंत्री बनाने का निर्णय लिया गया। PM मोदी ने शिवराज को कल ही इस बात के संकेत दे दिए थे कि उन्हें मुख्यमंत्री पद जिमेदारी उठानी है। सोमवार सुबह गृहमंत्री अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ पार्टी के संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने मीटिंग की और इस निर्णय को अंतिम रूप दिया। प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने बताया कि विधायक दल की मीटिंग के बाद हम राज्यपाल से मिलने जाएंगे।

15 सालों तक सत्ता में रही बीजेपी सरकार जब दिसंबर 2018 में चुनाव हार गई, तो उसके बाद शिवराज सिंह चौहान के राजनीतिक पद पर भी कई प्रश्न खड़े होने लगे थे। जानकारों से मिली खबरों के मुताबिक पता चला था कि शिवराज को केंद्र में भेजा जा सकता है लेकिन उन्होंने मध्य प्रदेश में ही रहने की बात कही थी।

शिवराज चुनाव हारने के बाद भी प्रदेश में एक्टिव रहे। लोगो से सम्पर्क करते रहे, उनकी बात सुनी। शिवराज ने इसी साल जनवरी में सिंधिया से बातचीत भी की थी। लेकिन उन्होंने इसे शिष्टाचार भेंट बताया था। मध्यप्रदेश में हाल ही में 17 दिन तक चले सियासी ड्रामे बाज में सबसे ज्यादा मुनाफे में शिवराज ही दिखाई दिए।

बीजेपी सरकार बना लेती है, तब उसे विधानसभा में फ्लोर टेस्ट से गुजरना होगा। पिछले साल कुछ ऐसा ही महाराष्ट्र में देखने को मिला जब देवेंद्र फडणवीस के इस्तीफे के बाद शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने विधायकों के समर्थन पत्र राज्यपाल को सौंपकर मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके बाद भी उन्हें विधानसभा में फ्लोर टेस्ट से गुजरना पड़ा, जिसमें उन्होंने विजयी हासिल की।

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