Thursday, January 21, 2021
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मुसीबतों को हराकर गुजरात के साफ़िन बने सबसे कम उम्र के IPS अधिकारी। गरीब माता-पिता के सपनो को किया पूरा।

safin hasan IPS officer
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Photo Credits: Social Media

Surat/Gujarat: माता पिता अपने बच्चों को उच्च शिक्षा देने के लिए कितना कठोर परिश्रम करते है। गरीबी भी उनको हारने नही देती। अपने बेटे को IPS अफसर बनाने के सपने तो मन मे थे, लेकिन उसको पढ़ाने के लिए उतने पैसे नही थे। फिर भी माता पिता ने मिलकर अपने सपनो को पूरा करने के लिए दिन रात मजदूरी की जिससे अपने बेटे को अच्छी शिक्षा दिलवा सके। बेटे ने भी अपने माता पिता के सपनो को टूटने नही दिया।

ऐसी ही Story बताने जा रहे है, जिसने अपने माता पिता के सपनो को पूरा करने के लिए बहुत कठिन परिस्थितियों का सामना किया। 22 साल के साफीन हसन ने 2017 यूपीएससी परीक्षा में 570 रैंक प्राप्त करके अपने माता पिता के सपनो को पूरा किया। 22 साल के साफ़िन इतनी कम उम्र में IPS बनें। इन्होने इस मुकाम को हासिल करने के लिए दिन रात कड़ी मेहनत की। बहुत कठिन परिस्थितियों का सामना किया।

साफ़िन कि माँ ने खाना बनाने का काम कर पढ़ाया बेटे को

साफ़िन कि माता दुसरो के घर जाकर खाना बनाने का काम करती थीं। गरीबी के कारण कई बार तो उन्हें भूखे पेट ही सोना पड़ा। ऐसी कठिन परिस्थितियों को पार करते हुए साफ़िन आज अपने मुकाम तक पहुचे है। साफ़िन (Safin Hasan) सबसे कम आयु के IPS अधिकारी बने है। साफ़िन को जामनगर में पोस्ट किया गया है। साफ़िन 23 दिसंबर से पुलिस अधीक्षक के रूप में अपने पद की जिम्मेदारी संभालेंगे।

साफीन गुजरात के सूरत जिले के निवासी है साफ़िन। उनका बचपन गरीबी में गुजरा है। उनके माता-पिता हीरे की एक यूनिट में मजदूरी करते थे।
एक बार उनकी स्कूल में कलेक्टर आये थे। जिनको सभी ने सम्मान दिया था ये देख साफ़िन के मन मे विचार आया, जिसका जवाब उन्होंने अपनी मौसी से पूछा कि उनको इतना सम्मान क्यो दिया तब मौसी ने समझया की वो कलेक्टर है। देश की सेवा में लगे रहते है। इसलिए लोग उनको सम्मान देता है। तभी से साफ़िन ने मन मे ठान लिया था कि वो भी बड़े होकर कलेक्टर बनेंगे।

सफीन के माता-पिता ने मजदूरी भी की ताकि खुद का घर हो

साफ़िन ने बताया कि 2000 में उनका अपना घर बन रहा था। जिसके लिए माता-पिता दिन में मजदूरी करते थे और रात में घर के लिए ईट उठाने का काम करते थे। तब उनकी परिस्थितियों ने ऐसा मोड़ लिया कि उनके पिता की नोकरी चली गई। लेकिन उनके पिता ने हार नही मानी घर का पालन पोषण और बेटे की पढ़ाई के लिए उन्होंने मजदूरी करना शुरू कर दी। और रात में ठेला लगाकर चाय बेचने का काम किया।

हसन की मां ने भी हार नही मानी और दूसरों जे घर मे रोटियां बनाने का काम करने लगी। माता पिता को इस तरह कठिन परिश्रम कर देख साफ़िन ने मन मे ठान लिया था कि बड़े होकर उनको सारी खुशियां दूंगा। साफ़िन के माता पिता का जीवन बहुत संघर्ष से भरा हुआ था। हसन को बचपन से ही पढ़ना बहुत अच्छा लगता था।

साफ़िन ने अपनी प्राइमरी शिक्षा सरकारी स्कूल गुजरारती मीडियम से पूरी की। साफ़िन ने 10वीं में 92 प्रतिशत हासिल किए थे। उस साल उनके जिले में एक प्राइमरी स्कूल खुल रहा था जिसकी फीस बहुत अधिक थी। लेकिन साफ़िन ने आगे बढ़कर उस स्कूल में अपने लिए बात की तब स्कूल की तरफ से उनकी आधी फीस कम हो गई थी।

साफ़िन ने 11वीं से ही इंग्लिश सीखना प्रारम्भ कर दिया। साफ़िन अपने लिए खुद पैसे कमाते थे, अपने हॉस्टल खर्च के लिए पैसा खुद ही जोड़ते थे। गर्मियों में बच्चों को पढ़ाकर पैसा जोड़ते थे। मुसीबतों ने साफ़िन का साथ नही छोड़ा जब वह UPSC के पहले अटेंप्ट देने पहुचे तो उनको एक्सीडेंट हो गया था। फिर भी साफ़िन ने हार नही मानी और Exam देने पहुच गए। Exam देने के बाद उन्हें हॉस्पिटल में एडमिट होना पड़ा। जब इसका रिजल्ट आया तो उनकी खुशी की सीमा ना रही। इन सब मुसीबतों को पार करते हुए, उन्होंने अपने सपनो को पूरा किया।


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