Tuesday, August 4, 2020
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ड्रैगन के मुँह से अब झाग निकल रहा, चीन अपने ही बुने जाल में उलझ गया, बहाने बनाने लगा

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Delhi: पहले कोरोना और फिर लद्दाख स्थित गलवान घाटी में भारत से फैला पसरी करने के बाद गच्चा खाये चीन को इस वक़्त वक्‍त पूरी दुनिया में अलग-थलग क्र दिया गया है। दुनिया के कई सभी सक्षम और बड़े देश पहले से ही उसके खिलाफ एकजुट हो चुके है। अब इन देशों का ध्‍यानधीरे-धीरे उसकी आर्थिक शक्ति को कम करने में लगा है। भारत ने तो चीन के ऐप पर प्रतिबंध लगाने के अलावा कई और व्‍यापारिक मुद्दों पर भी चीन को से नाता ख़त्म कर दिया है।

अब अमेरिका और ब्रिटेन ने उसकी बड़ी कंपनी हुआवेई पर प्रतिबंध लगाकर चीन की मुस्किले बढ़ाने का काम किया है। इतना ही नहीं अमेरिका ने इस कंपनी के कुछ कर्मचारियों पर भी पाबंदी लगा दी है। इसके अलावा बीते दिनों चीन के चार शीर्ष राजनेताओं को भी अमेरिका ने प्रतिबंधित किया है। सीधा मतलब है की चीन की दिक्कते बढ़ाने का काम पूरी तेजी के साथ दुनिया के कई देश मिलकर कर रहे हैं।

चीन की इस हालत पर विशेषयज्ञ मानते हैं कि ड्रैगन अपने ही बनाए जाल में खुद उलझता जा रहा है। मीडिया के विशेषयज्ञ बताते हैं कि हुआवेई पर लगे प्रतिबंध से चीन बुरी तरह से तिलमिलाया हुआ है। इसी वर्ष जनवरी में ब्रिटेन ने इसको दूरसंचार के क्षेत्र में अनुमति दी थी। परन्तु अमेरिका के लिए गए कड़े फैसले के बाद उसने भी अपने फैसले को पलट दिया है और उस पर प्रतिबंध लगा दिया है।

अमेरिका ने ब्रिटेन के इस फैसले का स्‍वागत करके न सिर्फ चीन को आर्थिक नुक्सान पहुँचाया है, बल्कि उसने समान विचारधारा वाले देशों को चीन के खिलाफ आमंत्रित कर चीन की चिंता भी बढ़ा दी है। वे मानते हैं कि चीन अब तक कारोबारी और प्रौद्योगिकी रिश्‍तों को अपनी ताकत बनाता रहा है, लेकिन अब शतरंज का पासा पलट गया है और इस इसे दूसरे देश भी इस्‍तेमाल करना सीख गए हैं। ऐसे में वह अपने ही जाल में फंसता दिखाई दे रहा है।

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कई जानकार मानते हैं कि यूरोपीय संघ से अलग होने के बाद जिस तरह से ब्रिटेन अन्‍य देशों से दोबारा अपने संबंधों को मजबूत कर रहा था उससे चीन को काफी उम्‍मीदें थीं। लेकिन ब्रिटेन और अमेरिका द्वारा लिए गए कड़े फैसलों ने उसकी इन उम्‍मीदों पर पानी फेरने का काम किया है। ब्रिटेन के लगाए प्रतिबंधों के बाद अब स्‍वदेशी मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनियां हुआवेई से 5 जी उपकरण नहीं खरीद सकेंगी। हालांकि, ब्रिटेन ने अपने इस कदम पर सफाई देने में देर भी नहीं लगाई है और इसके पीछे अमेरिकी फैसले को एक बड़ी वजह बताया है।

आपको बता दे की चीन अब लगातार उसके खिलाफ लिए जा रहे कड़े फैसलों से पहले से चिंता में है। चीन की तरफ से कहा गया है कि ये प्रतिबंध आधारहीन हैं। चीन की तरफ से चेतावनी भी दी गई है कि वो अपनी कंपनियों के हितों की रक्षा के लिए कड़े फैसले लेने से भी पीछे नहीं हटेगा। आपको बता दें कि चीन इससे पहले अमेरिका द्वारा उठाए गए कदमों के खिलाफ जैसे को तैसा वाली नीति पर चलता आया है। दोनों ही देश अपने यहां पर स्थित एक-एक वाणिज्‍य दूतावास बंद कर चुके हैं और एक दूसरे के राजनेताओं पर प्रतिबंध लगा चुके हैं। ऐसे में चीन अपनी कंपनियों पर लगे प्रतिबंधों के बाद क्‍या फैसला लेगा फिलहाल ये तो वक्‍त ही बताएगा।

Donald Trump on China

अमेरिका की डोनाल्ड ट्रंप सरकार ने जातीय और धार्मिक अल्पसंख्यकों के कथित मानवाधिकार हनन के लिए चीन के पश्चिम शिनजियांग क्षेत्र में एक प्रमुख संगठन और उसके कमांडर पर प्रतिबंध लगा द‍िया। विदेश और वित्त विभागों ने शुक्रवार को पाबंदियों की घोषणा की। साथ ही वाइट हाउस ने कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के कारण स्थानीय सरकार के चुनाव स्थगित करने के लिए हांगकांग में अधिकारियों की निंदा की।

हॉन्‍ग कॉन्‍ग में चुनाव में देरी को लेकर आलोचना ऐसे वक्त में की गई है जब एक दिन पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद नवंबर में होने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति पद के चुनावों को टालने का सुझाव दिया था। इन प्रतिबंधों का मतलब है कि अमेरिका में इन संगठनों और व्यक्तियों की किसी भी संपत्ति को कुर्क किया जा सकता है और अमेरिकियों के उनके साथ व्यापार करने की मनाही होगी।

उधर कोरोना के नाम पर दक्षिण एशिया के तीन देशों नेपाल, अफगानिस्‍तान और पाकिस्‍तान के विदेश मंत्रियों के साथ चीन की बैठक के बाद कुछ ही दिन बाद शुक्रवार को नेपाल ने कहा कि वह गुटन‍िरपेक्ष रहेगा। नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप ज्ञवली ने चारों देशों को मिलाकर उपक्षेत्रीय गुट बनाने के विचार को खारिज कर दिया।

नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप ज्ञावली ने कहा कि चीन और भारत का उदय साथ-साथ कैसे जुड़ते हैं, उनकी साझेदारी कैसे आगे बढ़ेगी और कैसे वे अपने मतभेदों को दूर करेंगे। इससे निश्चित रूप से एशिया या कम से कम इस क्षेत्र का भविष्य निश्चित होगा। उन्होंने कहा कि वुहान समिट ने दोनों देशों के बीच साझेदारी को गहरा किया लेकिन गलवान घाटी में संघर्ष के बाद तनाव बना हुआ है। दोनों देश तनाव दूर करने की कोशिश कर रहे हैं, हालांकि यह मुश्किल है।


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